Shri Dravya Drushti Prakash
Also on this day: Shri Dravya Drushti Prakash 2 · Shri Dravya Drushti Prakash 3
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Recitations restored to their canonical wording: Mangalacharan — Mangalam Bhagavan Viro, Mangalacharan — Sarva Mangala Mangalyam, Omkar bindu sainyuktam, Samaysar mangalacharan.
0:18णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं
0:23णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो
0:28लोए सव्व साहूणं नमः समयसाराय
0:35स्वानुभूत्या चकासते । चित्स्वभावाय भावाय
0:43सर्वभावान्तरच्छिदे
0:48मंगलं भगवान वीरो, मंगलं गौतमो गणी।
0:55मंगलं कुन्दकुन्दार्यो, जैनधर्मोऽस्तु मंगलम्॥
1:03सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं
1:07सर्वकल्याणकारकम। प्रधानं सर्वधर्माणां
1:14जैनं जयति शासनम॥ ॐकारबिन्दुसंयुक्तं
1:22नित्यं ध्यायन्ति योगिनः। कामदं मोक्षदं चैव
1:30ॐकाराय नमो नमः
1:35श्री द्रव्यद्रव्य प्रकाश।
1:44पंचेन ज्ञान चंचुसो वाणी
1:46के आध्यात्मिक परकरो।
1:53पत्र number 17। कोलकाता से
1:58पत्र फोंघट के पुस्तक लिखा गया। खा गया।
2:02उस जवाब में, सोनगढ़ के लिए समय उनको बुलाया है बाहर, पर फिर भी वो
2:08सोनगढ़ जाते, नहीं थे मतलब जा नहीं सकते।
2:14जवाब ये पत्र दिखा। स्पष्ट किया है कि मुझे,
2:23ऐसी कोई भावना नहीं बननी
2:27है, कि वर्तमान का पाका उड़े पलट करके
2:29पुण्य। पाप का उड़े पलट करके पुण्य का उड़े हो और अनुकूल सहयोग मिले।
2:34मैं ऐसी भावना रखना नहीं चाहता। आपने तो सादर प्रेम के कारण
2:41मुझे ऐसी सलाह दी है। लेकिन मैं मानता हूँ गुरुदेव की कृपा से।
2:52कि मेरा आत्मकल्याण तो मेरे
2:53आत्मा से होगा। मेरे आत्मकल्याण... मेरे आत्मकल्याण अनुकूल संयोगों
3:00से या गुरु की कृपा से नहीं हो पाए। पोता गुरु की कृपा से
3:04है। ये आधार बुद्धि की अपेक्षा से बाहर है। आधार मुझे किसी का नहीं है।
3:12इसीलिए,
3:15मैं तो सिर्फ चैतन्य की भावना भावूंगा। भावना भावूंगा क्या फिर पुरुषार्थ भी करना
3:21है। अकेली भावना भावने तो क्या। मुझे शांति
3:23चाहिए। मुझे शांति चाहिए तो मैं आत्म आश्रित
3:29ऐसी साधना करूँ कि राग ही खत्म हो जाए तो ही मुझे शांति मिले
3:40मैं ऐसी भावना बना
3:48पर सिर्फ भावना बनाता हूँ ऐसा नहीं वो भावना को
3:52साकार करने के लिए। वो भावना को साकार होने के लिए किस प्रकार से
3:56प्रयोग करना है वो भी उन्होंने बता दिया है।
4:00बुद्ध के वचन का आधार लेकर के बताया है।
4:07कि ज्ञानी को इच्छा की इच्छा नहीं है।
4:12आत्मा के आधार के अलावा किसी और का आधार ज्ञानी को पसंद नहीं।
4:19और अंदर में... और अंदर में सर्व प्रदेश में
4:24मैं सिर्फ चैतन्य चैतन्य और आनंद आनंद से मुक्त वस्तु हूँ ऐसी दृष्टि एक
4:26बार हो जाओ क्योंकि ज्ञानी ऐसा ही result क्या निकलेगा कि
4:28शांति के लिए जो अनुकूल संयोगों
4:31की चाहना रखते हैं वो चाह की जरूरत नहीं पड़ेगी
4:33और स्वरूप दृष्टि से।
4:40की स्वरूप
4:47दृष्टि से automatically
4:53सुख समुद्र का दरिया एकदम सहज उमड़ पड़ेगा।
4:58पर के लिए विकल्प करना बेकार है, साधन जुटाना बेकार
5:03है, उसमें इस चैतन्य का कोई लाभ नहीं है। अरे
5:07मैं बिना किसी के भी अभी ही परिपूर्ण हूँ।
5:13भगवान बनना है ये बात कहाँ है?
5:14मैं तो वर्तमान में ही परमात्मा हूँ। नहीं परमात्मा एक बार ऐसी तीव्र
5:18भावना होनी चाहिए अनुकूल संयोग मिले ऐसी भावना नहीं होनी चाहिए
5:24मैं वर्तमान में ही परिपूर्ण परमात्मा हूँ ऐसी भावना होनी चाहिए कैसी भावना होना हो
5:30तीव्र भावना होनी चाहिए मैं बिना किसी के ही
5:37अभी ही परिपूर्ण हूँ
5:39एक बार ऐसी
5:41तीव्र भावना होनी चाहिए ताकि। ताकि सामान्य वस्तु जो
5:46ध्रुव त्रिकाली चैतन्य परमात्मा विराजमान है उसका
5:52ज्ञान होवे सच्ची समझ आवे ऐसा अवसर मिले।
5:57पर में सावधानीपना नहीं। नजर बाहर नहीं। स्व में सावधानीपना होना चाहिए।
6:06जागृति हमारा attention
6:08ज्ञान का उपयोग सिर्फ चैतन्य मूर्ति के ऊपर होना चाहिए।
6:16अब जब ऐसा होता है तो क्या होता है? सौगानी जी ने
6:21अनुभव किया होगा लिखते-लिखते। कल यहाँ तक अपुन आए
6:25थे अब आगे की बात। कि ऐसा लिखते-लिखते
6:28सौगानी जी अंदर में दृष्टि की होगी और आनंद मिला होगा तो क्या लिखते हैं अब?
6:34आगे की line। अरे द्रव्य सामान्य। कौन?
6:39ये परमानंद। उसकी... उसकी महिमा करते हैं। कि अरे द्रव्य सामान्य।
6:46एक द्रव्य अवस्था है और एक द्रव्य सामान्य। अवर्ता आवे और जावे, परिणाम आवे और जावे।
6:53सामान्य आवे जावे नहीं। सामान्य
6:55मतलब क्या? 3, 6, 9, 12, 15 में कौन सा
6:59सामान्य है? 3। ऐसे
7:03अवर्ता सुख की हो या दुख की हो।
7:05विकल्प वाली हो या शून्यता हो। चिंता... चिंता वाली हो, बेफिक्री हो।
7:13दुख हो या सुख हो, ये अवस्था है। बढ़ती हो, ओठ हो। ज्वार हो, बाटा हो।
7:21धूप हो, सर्दी हो। रात हो, दिन हो।
7:25कैसी भी, वो अवस्था है।
7:29ये मैं नहीं, मैं common। इन सबको जानने वाला कौन? 3, 6, 9, 12, 15 में
7:35common कौन? 12 15 में common कौन? 3। मैं
7:40तो इन सबको जानने वाला सामान्य तत्व हूँ।
7:45इसीलिए अपने इधर नज़र करने के बाद, आनंद लेने के बाद क्या कहते हैं?
7:51उसकी महिमा करते हैं। हरि द्रव्य सामान्य।
7:56द्रव्य में अवस्था आया तो अवस्था को नहीं देखते हैं, वेदन आया तो वेदन को नहीं देखा।
8:02आनंद के ऊपर नज़र नहीं है, आनंद आया लेकिन नज़र किधर है? आनंद के ऊपर। जिसको
8:08देखने से आनंद उमड़ पड़ा, वो चैतन्य मूर्ति, मैं स्वयं परमात्मा।
8:15उसका आनंद क्या? द्रव्य सामान्य। अब उससे बात करते हैं अनुभव के बाद।
8:22और ये द्रव्य सामान्य तेरे प्रताप से।
8:29तेरा बहुत बड़ा उपकार है,
8:30तेरी बहुत बड़ी कृपा है। तेरी मेहरबानी... तेरी मेहरबानी हुई मेरे
8:34पर। परमात्मा प्रसन्न हुए मेरे पर।
8:38तुमने मुझे दर्शन दिया। मैंने तुझे बहुत भटकाया अनंत काल से चौरासी के चक्कर में।
8:45तुझे देखे बिना बहुत दुख उठाया और तुमको बहुत दुख दिया।
8:50नरक में लेके गया, जानवर की गति में, एकेंद्री में, हर जगह बहुत भटकाया।
8:56लेकिन फिर भी तू दया
8:57का सागर है। कौन? वो नहीं ये। कि मैंने जब भी तेरे
9:03को देखा तूने दरवाजा खोल दिया।
9:07गलतियां तो माफ कर दी लेकिन आनंद का समुंदर आनंद से मुझे नहला दिया।
9:14बोल तुझे क्या चाहिए ज्ञान, आनंद, सुख, शांति बोलो तुम बोलो मांगो क्या चाहिए।
9:21क्या? सब कुछ दे दिया अंदर से। हमारे भूतकाल के सारे अपराधों को माफ कर दिया।
9:28माफ़ कर दी। अब इनसे बड़ा क्षमाधारी कौन
9:33है? अपने परमात्मा से बड़ा क्षमाधारी कौन है? यही दया का सागर हो।
9:39तू प्यार का सागर है। नहीं वो गीत आता है। मदुरै गए थे तो एक बाई ने गाया था।
9:49Tu प्यार का सागर है।
9:55तेरी गुंद के प्यासे हैं। मुंद के प्यासे हैं ना। ये अंदर में
9:59मुंद क्या है वो समुंदर है आनंद।
10:04वो पूरा दे देगा
10:05दरवाजा पूरा आपका ही है अंदर पूरी मालिकी आपकी है किसी के और की नहीं। ये
10:09question। के तेरे प्रताप से तेरी मेहरबानी हुई। तेरे बड़े उपकार
10:16तेरी क्षमा में तेरी कृपा में मैं ना रहा। तेरे प्रताप से झुकती हुई पर्या है।
10:24भीख मांगने वाली पर्या
10:25है ये। भीख मांगने वाली पड़ी, ये चाहिए, वो चाहिए। कहीं नहीं तो
10:30फिर मेरा उपयोग अंदर जाना चाहिए, क्या भिखारी किया। क्या?
10:33बाहर से कुछ नहीं मांगा तो अंदर आया तो क्या बोला?
10:36मुझे सम्यक दर्शन चाहिए, बस trip में...
10:40जाने से पहले अभी 2 दिन बचे हैं, 2 दिन कहाँ, 1 ही दिन।
10:43Last है आज। Last है। Final exam अभी आज। Last exam. अगर आज शाम तक या रात भर
10:50जाऊंगा कैसा भी करके, लेकिन दर्शन हो तो... होगा कैसा
10:52भी करके लेकिन दर्शन हो जाए ना तो बस।
10:55कुछ नहीं चाहिए बेड़ा पार नहीं गंगा सागर पार हो गया।
10:59ये समुद्र में डुबकी लगा के आ रहे हैं बस। ऐसे वापस जाने में शर्म आती है।
11:05कितनी यात्रा करेंगे हर बखत वापस
11:08हर बखत वापस। अभी आज last 24 कलाक है
11:13मुझे सम्यक दर्शन हो जाए ना तो अच्छा। ये मेरा उपयोग बाहर जाता क्यों है?
11:17शर्म क्यों नहीं आती मेरे? क्या और अपने को
11:19थप्पड़... क्या और अपने आप थप्पड़ मारता है।
11:22अंदर में तो बहुत मारता है जी।
11:24अपने आप बहुत दुखी होता है। कि यहाँ कर के भी ये 6-7 दिन बेकार चले।
11:30बहुत दुखी दुखी तो बहुत होता है। कि क्या किया? भीख मंगा पनाह।
11:36किसकी भीख मांगी? परमात्मा हो करके।
11:39सम्यक दर्शन की भीख मांगी। कि मेरा उपयोग है ना
11:43बाहर नहीं रहे अंदर लग जाए आत्मा में। ये पर्याय झुक गई। पर्याय झुक गए।
11:50पर्याय झुकने में क्या खोजना पड़ता है?
11:55मांगने में ऐसा झुकना पड़ता है। और नहीं मिलता है तो
11:57दुखी दुखी हो जाते हैं। मांगने से दुख मिलता है। ऐसा हो जाता है। स्वयं बहुत दुखी हो
12:00जाता है क्योंकि इच्छा की सम्यक दर्शन और वो नहीं हुआ। उपयोग
00:12:02.1000 --> 00:12:03.540
अंदर जावे ऐसी इच्छा की
12:03और वो अंदर।
12:11वो अंदर जावे ऐसी
12:16इच्छा की और वो अंदर नहीं गया तो क्या होता है?
12:21आकुल व्याकुल परेशान tension tension BP बढ़ जाता है। क्या?
12:27मनोनी सूरत हो जाती है।
12:30सद्गुरु के सामने मुँह दिखाने में शर्म आती है। यहाँ आकर के
12:34भी कुछ नहीं किया। अब वहाँ को डर लगता है।
12:37जब यहाँ आकर के कुछ नहीं किया तो वहाँ तो फिर खिलाफ मेरी मौत ही समझो।
12:42वहाँ तो फिर business है घर में पंचायत हज़ार। फिर ऊपर से TV,
12:47फिर telephone, फिर mobile phone।
12:50नहीं जाना है तो भी फंस जाओगे। डर
12:54अभी से डर लगता है तो बोलते हैं अभी ticket cancel करा के लाओ।
12:57जाना नहीं है पूरा काम करके जाना है लेकिन नहीं वो time fix है
13:01आगे बढ़ना नहीं है अब। पूरे पुण्य
13:04अभी नहीं खत्म करना है थोड़ा बाकी रखना है भविष्य के लिए। क्या? तो झुकती
13:07हुई पर्याप्त। तो झुकती हुई पर्याय है,
13:14सम्यक दर्शन की भीख मांगने वाली पर्याय, कहीं नहीं मांगा तो यहाँ मांगो।
13:19कि नहीं नहीं, तेरे पे नज़र जाते ही बहुत कमाल हो गया। तेरी कृपा से
13:25ये झुकती हुई पर्याय भी सहज खड़ी हो जाती है।
13:30क्या? Automatic भिखारी को ना चले गया। कुछ नहीं चाहिए, लाफ मारो केवल ज्ञान को ऐसा।
13:38कितना power आया? मोक्ष, मुझे नहीं चाहिए। मोक्ष मुझे नहीं चाहिए।
13:41किसने कहा? मैं बंधा हुआ कब था? मेरी दृष्टि बदल गई।
13:46पहले तो मोक्ष चाहिए, जन्म मरण से मुक्त होना है। अंदर देखे तो
13:50अंदर ना जन्म है ना मरण है। कुछ नहीं है। चार गति में से एक गति वहां
13:55भगवान आत्मा में नहीं है कुछ।
13:59अंदर देखे तो मैं तो मुक्त ही हूं। क्या?
14:03सौगानी जी ने बहुत तारीफ
14:04की उनको। कि मेरे सुन के रखा था कि मुक्ति तो बहुत मुश्किल से मिलती है। तो मुक्ति
14:08तो बहुत मुश्किल से मिलती है बड़े-बड़े ज्ञानियों को शास्त्र पाठियों को नहीं मुक्ति
14:12है बड़े-बड़े त्यागियों को नहीं मुक्ति। और कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं।
14:17मुक्ति के लिए क्या सम्यक दर्शन के लिए भी दिमाग फट जाता है।
14:22सम्यक दर्शन भी आसानी से नहीं मिलता। ये मुक्ति शब्द को आपने इतना आसान कर दिया
14:29सौगानी जी कहते हैं। क्या इतना easy होता होगा moksha?
14:35मुझे आश्चर्य हो रहा है कौन बोल रहा है? कौन बोल रहे हैं?
14:37सौगानी जी बोल रहे हैं। मुझे आश्चर्य हो रहा है। हे गुरु आपके वचनों ने जादू कर दिया।
14:43तो ऐसा चमत्कार कर दिया है वाणी में ऐसा जादू है।
14:48कि अब मुझे नहीं लगता मुझे मोक्ष की भी जरूरत नहीं रही अब। क्या?
14:54मारो धन्य थयो आज अवतार रे कि मड़या मने।
15:00नहीं चाहिए कुछ भी। तो क्या हो गया जो भीख मंगाना था मोक्ष। गया जो भीख मंगाना था
15:05मोक्ष चाहिए। नहीं चाहिए मैं हूँ
15:10सब मैं परिपूर्ण वर्तमान में हूँ।
15:15केवल ज्ञान की परां मेरे पीछे पीछे धूम दबा के आएगी। क्या?
15:22परमात्मा मुझे सामने से
15:23बोलेगा कि नहीं तुम चलो सिद्ध स्थान। और सिद्धालय पे विराजमान हो जाओ।
15:29नहीं आप मना करोगे तो नहीं चलेगा पहले ही सोचना था। क्या? कैम कृपादेव ऐसा कहते
15:35हैं। कि भैया देखो 10 बार सोच लेना आप पहले।
15:39एक बार आत्मा को देख लोगे ना, सम्यक दर्शन हो
15:41जाएगा ना, फिर आप बोलोगे मुझे केवल ज्ञान नहीं चाहिए।
15:45निरेक मोक्ष में नहीं जाना
15:47है, घसीट के लेके जाऊँगा। ये सम्यक दर्शन की प्रतिज्ञा है।
15:53एक बार आत्मा का दर्शन किया तो फिर खलास, फिर आपको जाना ही पड़ेगा मोक्ष
15:59में। नहीं नहीं मेरे पिताजी स्वर्ग में हैं ज़रा मिल के आ जाऊँ।
16:02मेरे पिताजी स्वर्ग में हैं ज़रा मिल के आ जाओ। मेरी मम्मी अभी जानवर गति
16:05में है तो ज़रा मिल के आ जाओ। तो सब कुछ नहीं
16:09है। अब चलो सीधा। नहीं सबका उद्धार करना
16:11है कि नहीं अभी उद्धार भी नहीं करना time नहीं है। चलो ऊपर चलो।
16:17अनंत सिद्ध भगवान तुझे बुला रहे हैं आज सिद्धों से अपनी बात हो के रहेगी आज final
16:25है आज क्या है। Today is final day. आज
16:31सिद्धों से अपनी बात... आज सिद्धों से अपनी बात। शुद्ध आत्मा से मुलाकात
16:35हो के रहे। आज आज
16:36इतना वेग हुआ दरिया किनारे अंदर की दरिया में जाना है ध्यान रखना है।
16:40दरिया किनारे कोई जाना नहीं बिना पोशाक के। ये दरिया में जाना है देखना के।
16:47तो कैसे देखोगे कि मैं ही परमात्मा हूँ तो क्या होगा? नजरते क्या होता है?
16:53कि अरे प्रभु सामान्य। तेरे प्रताप से झुकती हुई पर्याय भी। काफी झुकती हुई पर्याय
16:57भी सहज खड़ी हो जाती खड़ी करना नहीं पड़ता है।
17:02सहज माने automatic।
17:04खड़ी हो जाती माने मांगना भूल जाती। अब मुझे मोक्ष भी नहीं चाहिए
17:09मुझे सम्यक दर्शन भी नहीं चाहिए। मुझे जो चाहिए था सब
17:13मिल गया। क्या मैं मुक्त होने वाला हूँ यकीन नहीं आता है।
17:19मैं अपने को भिखारी समझता था वो नजर मिलते ही दृष्टि बदल गई।
17:24सृष्टि बदल गई पूरी। एक second में
17:28मोक्ष मुक्ति चाहिए सम्यक दर्शन चाहिए।
17:31आत्मा हे भगवान तू कब दर्शन देगा? 2 घंटे से ध्यान लगा के बैठा हूँ, कमर दुख रही है।
17:40क्या? और प्रयत्न करते करते नज़र पड़ गई तो
17:44अब मुझे कुछ नहीं चाहिए भैया। क्या? क्या हो गया?
17:50ये नजरिया बदल गया। मांगे वो भिखारी। मैं तो परमात्मा हूँ,
17:54मैं काहे को मांगूँ, भीख मांगूँ, वो भी किसकी? अवस्था की। नहीं चाहिए मुझे,
17:59जाओ। तुझे देना है तो दे,
18:02मेरे में योग्यता है तो मुझे मुक्ति भी नहीं चाहिए। वो तो बोलेगा भैया आप ही योग्य हो
18:09क्योंकि आप अपने को
18:09परमात्मा मानते हो, भिखारी नहीं मानते हो। मैं भिखारियों के पास नहीं जाती। मुक्ति
18:15की भिक्षा क्या बोलती? मैं तो कब से आपको ही ढूंढ रही थी। आई
18:19मैं आपके पास नहीं। आई मैं आपके पास में लेकिन आप सम्यक दर्शन कब होगा ऐसा
18:24देख रहे थे तो मैं वापस चली गई।
18:27क्या?
18:28आपको वरमाला लेके आई थी मुक्ति सुंदरी,
18:31फूलों की माला लेकर के आनंद की, आनंद के फूलों की माला लेकर के
18:35आप ध्यान में बैठे थे।
18:38और मैं आई मुक्ति माला लेकर के आनंद की। लेकिन मैंने देखा कि
18:44आप सम्यक दर्शन कब होगा,
18:50कब
18:57होगा,
19:05कब होगा। आप परमात्मा का ध्यान नहीं कर रहे थे।
19:11परमात्मा का ध्यान नहीं करते थे। आप किसका ध्यान करते थे? अवस्था। और
19:13फिर? अभिवेदना आएगा। अभी तक आया नहीं। अभी आया। इसका ध्यान करते थे।
19:19तो फिर मैं आई से कि मैं दूर से चले
19:21गया। कि आपको नहीं है परमात्मा का ध्यान नहीं करते उनको
19:25क्या देना है? भिखारी को क्या ध्यान?
19:27माला बेन का। मुझे तो परमात्मा चाहिए था। पलटी और मैं एक दफे और नजर
19:30करूं क्या होता है। बाद में ऐसे पलट के देखी
19:31तो आप परमात्मा का ध्यान कर रहे हो। नहीं चाहिए मुझे वेदन। नहीं चाहिए मुझे
19:33समय के साथ। तो मैं दौड़ते दौड़ते आई और आपके गले में माला...
19:36मुझे तो परमात्मा चाहिए था।
19:39देखो। किसको होता है मुक्ति किसको मिलती
19:45है। और मैं... और मैं पहना है तो आप
19:47मना करने के लिए भी
19:49उपयोग बाहर नहीं आया आपका मुझे नहीं चाहिए नहीं चाहिए। ये तो बाद में बोला कि मुझे
19:53माला भी नहीं चाहिए। अब मुझे माला का क्या प्रयोजन है?
19:59वो तो बाद में उस time में तो आपने कुछ नहीं। मेरे सामने
20:03देखा भी नहीं था मुझे ऐसा ही परमात्मा चाहिए। कि जो अपने पैरों पे खड़ा है।
20:09उससे मैं शादी करूंगी।
20:11शादी किससे करूंगी? कादी किससे करूंगी? वो मैं उसके गले पड़ूँ,
20:16वो किसी और के गले पड़ा हो, तो नहीं मेरे को नहीं चाहिए ऐसा परमात्मा।
20:22क्या?
20:23पति परम कृपालु महाराज। अविनाशी। अविनाशी सुख देना। मेरे को तो ऐसा
20:30परमात्मा चाहिए। मैं ऐसे नौकरी करता हूँ, भीख माँगता हूँ खुद ही।
20:35उसके घर... मैं तो पहले पूछती थी washing machine है आपके
20:37पास? kitchen में काम वाले servant है? Kitchen में काम वाले servant है। अलग से
20:42bedroom है, TV color TV है। AC है
20:44room में AC। क्या? Maruti
20:45car है। तुम्हें
20:48आती नहीं। अच्छा
20:52अभी आजकल वो सब...
20:54वो लड़का लड़की देखने जाता है, लड़की लड़के को
20:57बराबर देख लेती है
21:00अच्छी तरह से। कि तुम कितने पानी में हो। क्या? लड़की क्या लड़का
21:04क्या देखेगा लड़की को? अब उल्टा
21:08है कौन है उल्टा। उल्टा से कौन सा उल्टा
21:11है। अब इतनी पढ़ी लिखी रहती है लड़की कि
21:13उसकी पूरी अजामत कर लेती है। First meeting में ही पूरा पानी उतार देती है।
21:17बोलो क्या है ये सब
21:20है? यहाँ पे ये बात है। कि उसको परमात्मा चाहिए, भीख मंगा भिखारी नहीं चाहिए।
21:28तो यहाँ सौगानी जी ने क्या लिखा है? हरे द्रव्य सामान्य,
21:34तेरे प्रताप से झुकती हुई परे भी सहज खड़ी हो जाती। पर्याय भी सहज खड़ी हो जाती है।
21:41भीख मांगने वाली पर्या है।
21:43उसमें भिखारीपना चले आता है और उसको खड़ा नहीं रखना पड़ता है,
21:47वो अपने आप खड़ी हो जाती है। अनादि का बोझा प्रतिक्षण हटा जाता है।
21:54कितना बोझा था, ये करूँ, वो करूँ, क्या करूँ, सुखी होने के लिए मैं क्या करूँ, कितने
21:59file कितनी बना के रखी थी,
22:02ये करना है, वो करना है, वैसा करना है, ये
22:03नहीं करना है, ये... ये नहीं करना है। ये, ये करूंगा तो दुखी हो जाऊंगा,
22:07ये नहीं करूंगा तो दुखी हो जाऊंगा। करूं नहीं करूं कि कितनी बड़ी file थी,
22:11कितना बोझा था?
22:14आपके दर्शन हुए तो अनादि का जो बोझा था वो तकसा... तका।
22:20बोझा ही गया। क्या करना है? करना क्या हो? करना करना रहा क्या?
22:26तो जो हो रहा है film,
22:28देखो जान, और क्या। करता तो भाव ही गया। एक भी... एक भी परिणाम को
22:34आगे पीछे नहीं करना है। एक भी रजकण को आगे पीछे नहीं करना
22:39है। कर सकता नहीं।
22:41सूके घास के किनके के दो टुकड़े करने की ताकत मेरे में...
22:51परमात्मा को देखने के बाद करने को क्या बचा?
22:55कुछ नहीं बचा। अनंत का बोझा प्रतिक्षण
22:58हर हर moment हटा जाता है। हटता जाता है पूर्वों की file के कारण
23:03करूँ नहीं करूँ ऐसा होने जाते हैं। लेकिन हर वक्त इसके प्रताप से क्या होता
23:13है? बोझा नहीं, प्रत्येक क्षण बोझा हटते जाता है। देखो।
23:18और क्या होता है? बोझा कम होते जाता है हर पल। और और क्या होता है?
23:23तेरे प्रताप से क्या होता है और? उत्तरांतर, day by day, पल by पल। सु... पल
23:29सुख की वृद्धि होनी होती जाती है।
23:34देखो जानने देखने से जो सुख मिलता है वो सुख की वृद्धि day by day पल बाय पल
23:41वृद्धि होती जाती है। बोझा कम होते जाता है। और आनंद की वृद्धि
23:47होती रहती है। धन्य है तेरा बोध।
23:52मैं तेरे को भूल करके अपने आप को भूल करके हैरान हो गया था।
23:57जे स्वरूप समझा बिना, पाम्यो दुख अनंत। एक एक ही गलती की थी।
24:05मैं अपने तेरे को भूल गया था।
24:08लेकिन तेरे पे नज़र पड़ते ही, तेरा स्वरूप ख्याल में आते ही, क्या हो गया?
24:14ये सब फायदा हो गया। कठ तो भाव zero खत्म हो गया। अशांति
24:18day by day कम होते जा रही है। सुख की वृद्धि day by day बढ़ती जा रही
24:21है। भिखारीपना जो था ना अवस्था में... भिखारीपना
24:24जो था ना अवस्था में वो छूट गया और परमात्मा पद
24:29ताकत आ गई। पैरों में जान आ गई। जिंदगी जीने का एक मकसद मिला मेरे।
24:36धन्य है तेरा कोख। वाह।
24:40दृष्टि पड़ते ही समझ आते ही पूरा change हो गया।
24:47वो गिनती करता था ना 10 पुलिस में। तो 10 मूर्खे जो
24:51थे गांव के लोग। मूर्खे जो थे गाँव के लोग। एक गाँव से दूसरे गाँव जाए बीच में तालाब
24:57नदी आई पैर के गए सामने। फिर बोले हम 10 जने थे
25:01check कर लें कि 10 जने हैं कि नहीं। तो उन्होंने check किया सब लोग line में खड़े रहो
25:07मैं गिनती करता हूँ। अपने को गिनती नहीं किए।
25:13कितने थे? 1 2 3 4 5 6 7 8 9। अरे भाई ये
25:18कहाँ गया? 10 थे। तुझे बराबर... तुझे बराबर
25:21गिनती करना नहीं आता तुम line में खड़े रहो मैं गिनता हूँ।
25:26क्या किया उसने भी वही धंधा किया। अरे सही है तुम बोलता ऐसे ही है ना वो भी
25:33है। वो भी इसके उसका कोई भाई था ना मूर्ख ही था।
25:39तुम दोनों मूर्ख के सरदार हो गिनती करना नहीं आता है।
25:43चलो line में खड़े रहो मैं बोलता हूँ। तीसरा है तीसरे में
25:46भी वही। हमारे आजू-बाजू जितने भी लोग हैं सब ऐसे ही हैं।
25:53जहाँ रहते हैं, कोई अपने को जानता नहीं। सब मूरख के सरदार हैं।
26:01और इसमें से अगर एक सुलझा हुआ आदमी गया तो
26:04उसके तो बड़ा मखौल ही कर देते हैं एक बार, जीने नहीं देते हैं।
26:08क्या? तो उनके बीच में कैसे रहना? अज्ञानी बन करके
26:12रहना। भले ही ज्ञान हो गया हो लेकिन बताना नहीं कि मुझे ज्ञान हो
26:15गया है। क्योंकि नहीं तो... क्योंकि नहीं तो हकाल देंगे कि हम मूर्खों के
26:19साथ में एक अच्छा आदमी कैसे आए।
26:22सब पागलों के बीच में। उसको भी पागल कर दो। हमरे साथ के नहीं हो get out ऐसा बोलेंगे।
26:28इसीलिए अगर आत्मज्ञान हो जाए ना।
26:31तो मेहरबानी करके आज क्योंकि आज final है ना final हो जाएगा। बताना नहीं किसी
26:38को। कि मुझे आत्मज्ञान हो गया पागल बन करके
26:40रहने दो। नहीं तो धुलाई कर देंगे कि तेरे को हो गया
26:44मेरे को नहीं हुआ तो मेरे को आके। हो गया मेरे को नहीं हुआ तो मेरे को आप उनको
26:46जादू करते हो और मेरे को
26:48पक्षपात करते हो मैं इतनी कल से भक्ति नहीं करूँगा।
26:54इतने पक्षपात थी। उसको तो दे दिया मेरे से
26:58पीछे थी पीछे आए थे जल्दी हो गया। और मेरे अटक गई। तो
27:03मेरे भी गालियां हो जाएंगी इसलिए
27:04किसी को बताना नहीं कम से
27:05कम मेरी गाल रखना। बोलना नहीं किसी को अगर हो
27:10गया। क्या बोलते हैं?
27:15धन्य है तेरा बोध। ओ तेन दुखों में सबने ऐसा किया,
27:19गलती क्या हो गई थी? 10 थे के 9 थे? 10 ही
27:25थे, गलती क्या हुई थी?
27:28अपने को भुलाया था। और अगर फिर मालूम पड़ गया कि मैं तो इधर ही हूँ, यहाँ से गिनना है,
27:35हम 10 के 10 हैं और बोध हुआ तो क्या हुआ? रो
27:39रहे थे ना जो, एक हो गया, क्या... थे ना जो एक खो गया
27:41क्या मुँह दिखाएंगे गाँव में जाकर के।
27:44क्या? बिचारा कितना अच्छा था लेकिन कौन? क्या?
27:50कितने हो गए डूब गया सो लेकिन नाम क्या?
27:53नाम कहाँ से डूब गया? सब यहाँ हाजिर हैं। कानजी, हरजी सब यहाँ थे।
28:00किसका? तो वो बिचारा डूब गया। और रोने लगे।
28:05क्या आदमी मर जाते हैं। रोते हैं। कान, कान बोलते हैं मोका। कान कान बोलते हैं मो कान।
28:11तो सब बोले थे ना तो आया एक आदमी कि भैया
28:14आप 10 के 10 कैसे रो रहे हो? 10 कहाँ हैं एक तो दुख गया
28:19है। तो उसने देखा। तो
28:22है तो 10 रो रहे हैं क्या हुआ है बोले बात तो क्या है हमारे में हम 10 जने थे।
28:28ऐसा है ना एक दुख गया है। उसको समझ में आ गया। इन सबका सुख दुख
28:34मिला है। उसको समझ में आ
28:35गया एक। उसको समझ में आ गया
28:37ना कि ये काम करो। सब line में खड़े हो जाओ
28:41मैं गिनती करता हूँ बस। अभी ढूंढ के निकालता हूँ। ढूंढेगा कहाँ था? कहाँ वो आज ही था?
28:46ढूंढना कर तो पा रहा था वो। पे करके रो रहे थे। पे कौन मर गया अगर नाम तो बोलो।
28:52किसका नाम बोलेंगे?
28:56ये देखो मैं तपली मारता हूँ नीचे बैठ जाओ। जिसको तपली मारता हूँ। और जोर से बोलना ये।
29:01दो तपले मरते गए। कितने हैं दस मिल गया मिल गया कुछ। इतने दर्द मिल गया मिल
29:05गया खुशी। क्या मिला क्या था?
29:08पढ़ाई कहाँ था? इतनी बात है। इसलिए कहते हैं धन्य है तेरा।
29:14तो इतनी बात। मैं मौजूद हूँ। प्रदेशे प्रदेशे।
29:22मैं मात्र चेतन चेतन
29:26और आनंद आनंद से ओतप्रोत वस्तु हूँ। Finish.
29:30आज 24 घंटे में इतना काम करे तो
29:32परमात्मा मिल जाएगा। क्या? क्या करना है? Lesson homework।
29:39अभी डायरी पर पढ़ना नहीं है, मेरे को भी मेरा homework करना है। Lesson करने के
29:44बाद ही बात करना,
29:48बात नहीं करना मेरे साथ।
29:51डायरी नहीं पढ़ने वाला अब। इतना homework
29:57करके आना मेरे को।
29:59हाँ? Sentence। Sentence repeat करो। Homework। आज का
30:03final exam। क्या? जाओ। क्या? मैं कौन हूँ? प्रदेश प्रदेश में
30:07मैं मात्र चेतन चेतन
30:14व आनंद आनंद की ओतप्रोत वस्तु हूँ।
30:19बस। इतना काम करना है। खोजना नहीं है।
30:26खोजने को नहीं बोला है मैं हूँ। मैं। मैं।
30:33दुनिया के मगरमच्छ भी। सिर्फ देख लेना है, आज्ञाकारी को देखना है। आज्ञाकारी को।
30:41मेरे पास तो कोई नहीं आ रहा पूछने के लिए,
30:43homework करने के बाद पूछना है तो वो ऐसे लोग।
30:47उसका सर खा लेना है, मेरा सर नहीं खाना है। नहीं तो सौगानी जी के पास भेज दूंगा।
30:53सदाशिव जी कहाँ गए हैं मालूम? धन्य
30:58है तेरा बोध। अब गुरुदेव कार्यकरण
31:02देखो इस बात को गुरुदेव कार्यकरण और दोबारा करते हैं। गुरुदेव के वचन को।
31:10इन्होंने इधर repeat किया।
31:13ज्ञानी ने ज्या स्वरूप निदान प्रगट्यो। क्या?
31:19ज्ञान दर्शाने में मतलब पहले अज्ञान दशा थी
31:22अंतर्दृष्टि परमात्मा को देखा वो ज्ञानी बन गया। पांतर।
31:25अब ज्ञानी बन गए। पर अंदर के निदान जो थे,
31:28सुख, शांति, आनंद जो
31:29भी, सब बाहर आए। भिखारी में से करोड़पति
31:34नहीं बना, कितना परमात्मा बन गया।
31:38पहले भिखारी था, अब क्या हो गया?
31:41कितनी lottery लगी? ₹1,00,00,000 की, ₹10,00,00,000 की, कितनी lottery लगी?
31:46अनमोल। परमात्मा। अरे final।
31:49अब इससे ज्यादा lottery क्या चाहिए बोलो? क्या lottery किने के
31:53सबको दी? ये lottery की ticket सबको दी गई है। कौन सी ticket है ये lottery की?
31:59कौन सी ticket बोला हमने? sentence एक बोला था। हाँ।
32:06प्रदेश से प्रदेश से। मैं मात्र
32:12चेतन चेतन एवं आनंद आनंद से बोध बोध वस्तु हूँ। ये lottery की ticket सबको दी गई
32:18है। अब number किसका लगता है देखना
32:21है। अगर number... आंखना आगळ number लग गया तो करोड नहीं मळे.
32:24दस करोड नहीं मळे, अबजो नहीं मळे, क्यां मळशे? स्वर्ग.
32:30स्वर्गलोक, पाताळलोक, मध्यलोक नहीं मळे,
32:32एथी पण ऊंचो कोण छे? परमात्मा. परमात्मा, ए मळी
32:39जाय. अने आनंद आनंद थई जाय. तो अहींया गुरुदेव ए कहे छे,
32:43ज्ञानीने ज्यां स्वरूप निदान प्रगट थयुं, त्यां पर्यायमां... क्या पर्याय
32:46में पर्याय में ज्ञानी ने जहां स्वरूप निदान
32:48प्रकट किया वहां बहुत बड़ा change आया पर्याय में द्रव्य में change
32:49होने का कोई सवाल नहीं
32:53है परमात्मा तो
32:53जैसा पहले था
33:03वैसा है जब अपने स्वरूप को नहीं। जब अपने स्वरूप
33:07को नहीं जानता था
33:11तब भी वो परमात्मा था। अब
33:16जानता है तब भी परमात्मा है
33:20और आगे जाकर के परमात्मा बन जाएगा।
33:25शिधालय में जाएगा तब भी। उसमें तो कोई change नहीं हुई। फिर change किसमें आया?
33:32केम अवर्ता में आया। तो ज्ञानी को जब स्वरूप की दृष्टि हुई और अंदर की शांति बाहर आई।
33:39तो क्या हुआ? त्यहाँ परे में जुवानी आवी जाए छे। क्या?
33:47कल dance कर रहे थे? क्या हुआ था ये? ये क्या हुआ?
33:54जुवानी आ जाती है। किसमें आया? पर्याय में।
33:59परमात्मा को देखा तो
34:00पर्याय में जुवानी आ जाती है। Dance करने लग जाते हैं। ये
34:07बच्चे दौड़ नहीं पाते हैं और बुड्ढे दौड़ना जानते हैं लेकिन दौड़ नहीं सकते हैं।
34:12भाग नहीं सकते। ये ताकत किसमें है अकेले?
34:16जुबानी में। सब भागने लग जाता
34:20है। नाचने लग जाता है।
34:26पैरों में जोर आ जाते हैं। नाचने लग
34:31जाता है। आनंद विभोर हो
34:32जाता है। पर एमा जुबानी आ गई है। जीवन कभी बीत नहीं मालूम मैं। अगर हटा
34:38कट्टा सब प्रकार से बराबर और कोई
34:40भी young लड़का। Please 5 रुपये। Please ₹5 दो
34:42हम तो क्या बोलेंगे उसको? गरीब आदमी हो, बूढ़ा आदमी हो,
34:47तेल बराबर नहीं चलता है, हाथ में लकड़ी हो, पैर में coat हो, कुछ हो, अंधा हो, या
34:53या औरत कोई हो, उसके हाथ में छोटा बच्चा हो,
34:58पहनने के लिए wearless बराबर हो, दया आती है। या कोई कोई जुवान आदमी हो,
35:03वो मांगे तो क्या होता है? दया आती है कि गुस्सा आता है?
35:10गुस्सा आता है। अभी हाथ पैर बराबर है, काम कर सकता है।
35:15कम से कम coolie बन सकता है
35:16station के ऊपर। ये
35:18मांगता क्यों? ₹1 भी नहीं मिलेगा उसको। इसी प्रकार से
35:23जुआनी आ जाती है मतलब क्या होता है?
35:26उसका मांगना मिट जाता है। अपना पड़ोस बल जागृत होता है।
35:32अपने पैर पे खड़ा हो जाता है।
35:36खुद मेहनत करता है, मैं किसी का नहीं, मैं खुद मेहनत करूंगा, मैं खुद ही पालूंगा।
35:42किसी के सहारे की जवान आदमी को जरूरत,
35:45बच्चों को जरूरत है, बुड्ढों को जरूरत है, लेकिन जवान आदमी को
35:49किसी के सहारे की जरूरत नहीं है।
35:53तो ज्ञानी को जब स्वरूप का निदान प्रकट हुआ तब पर्याय में जुवानी आ ही जाए से।
36:00ये क्या हो जाए से?
36:02निर्भयता आ जाए से, डर निकल जाता है कि अब मेरा क्या होगा। सब निकल जाता है कि
36:07अब मेरा क्या होगा? क्या? आत्मा
36:08का दर्शन होने के बाद मेरा क्या होगा?
36:12खत्म। द खत्म हमेशा के लिए। दूसरा क्या होता है?
36:18निशंत्ता आ जाती है। शंका नहीं होती है।
36:22कि मैं परमात्मा होऊंगा कि नहीं होऊंगा कुछ दूसरा कुछ तो
36:24अनुभव नहीं हुआ ना? क्या यही सम्यक दर्शन था?
36:28इतना ही बस?
36:31क्या अपने पे doubt आ जाता है। अपने पे doubt आया था। नहीं तो मुझे
36:35पहले से मालूम था कि मैं
36:36भगवान आत्मा शरीर से भिन्न हूँ। अब देखा तो भी क्या,
36:40केन थोड़ा देखा, अलग थोड़ा देखा?
36:45क्या? पहले मालूम था वही, वही मालूम हुआ।
36:48फरक क्या हुआ? कि पहले जानते थे सिर्फ, अभी जानते हो और साथ में
36:53मानते हो, ये फर्क आया बहुत बड़ा। लेकिन difference ज्यादा नहीं लगता है।
36:58क्योंकि जैसा जाना था पहले बुद्धि में... था पहले बुद्धि में। ऐसा ही मानना
37:04हुआ। तो वो तो पहले से था, फर्क क्या हुआ? क्या इतना ही बस?
37:09मान्यता में तो बहुत बड़ा change हुआ। कभी-कभी दांव उठा जाता है।
37:14कि इतनी बात बस? रामब्रह्म में बदल गया। हाँ? रामब्रह्म में बदल गया। वो ज्ञान
37:20की निर्मलता नहीं होने के कारण, अनुभव तो हुआ।
37:24लेकिन ज्ञान की निर्मलता नहीं होने के कारण, वो दूसरे symptoms जो
37:31हैं... वो दूसरे symptoms जो है ना, उसको पकड़ने में उसके आधार से निर्णय
37:34करना होता है। बाकी उसको
37:36आश्चर्य होता है, आश्चर्य क्या उसको लगता है कि इतना पाया क्या है।
37:39ऐसे बहुत कुछ पाया है लेकिन यही सम्यक दर्शन है, down हो जाता है।
37:45लेकिन जब ज्ञानी को स्वरूप निदान प्रकट होता है तब,
37:49पर्याय में जीवानी है कि विकमगापना निकल जाता
37:52है। सम्यक दर्शन चाहिए ध्यान करना है वो बात नहीं रहती देखो।
37:57पर्याय में जीवानी... पहले में जुआनी आई मतलब क्या?
37:59और मैं ध्यान करूँ खत्म। आना है तो आएगा ध्यान करना, मैं नहीं पीछे हटूँगा। क्या?
38:06जुआनी आ जाती है मतलब क्या?
38:08जैसे young आदमी को किसी की परवाह नहीं। क्या मांगतन ऐसे
38:15ज्ञानी कभी भी अपने स्वरूप का ध्यान करने को सामने से बैठते नहीं।
38:21कर्तव्य भाव से। क्या?
38:25कि important... ये important change है। Second third में क्या फर्क है?
38:30कि second के बाद तो mesmerism हो जाता है कि यही चाहिए बार-बार देखो बार-बार देखो।
38:37पर देख लिया। पर अब ये जुआ नहीं आया कि अब ध्यान करना
38:41है। कि इच्छा ही नहीं हो रही है ध्यान में बैठने की।
38:44ध्यान में बैठने की इच्छा नहीं हुआ। देखो time क्यों waste कर रहे
38:48हो? वो time waste करता हूँ मालूम है उसको।
38:51अंदर देखूंगा शांति मिलेगी मालूम है उसको
38:53लेकिन... शांति मिलेगी मालूम है उसको लेकिन फिर भी चाहते हुए भी बैठने
38:59का नहीं हुआ है। ये क्या
39:02है? वो पढ़ाई में जुबानी आ गई। और डर नहीं लगता है कि मेरा क्या
39:05होगा। पहले डर लगता था कि
39:07गिरेगा कि नहीं गिरेगा अभी second stage है।
39:09Third stage तो अभी तक हुआ नहीं। डर लगता था। कहीं ऐसा ना हो कि वापस चले जाओ।
39:15क्या? फिर यहाँ से गिर जाओ। डर लगता
39:19था। अभी निशंका आ गई। निशंकता आ गई। क्या निडरता आ गई। और निशंकता माने क्या?
39:26कैसी निशंकता होती है मानो? आत्मा का अनुभव
39:31में। कि तीर्थंकर भगवान आकर के उसको बोले कि ऐसा थोड़ा आत्मा का अनुभव होता है।
39:37अनुभव में तो ऐसा होता है ना वैसा होता है ना, तेरे सफेद बाल काले हो जाते हैं। क्या?
39:43और बुड्ढा जो यहाँ कड़तनी पड़ी है ना साहब, अच्छा रुपआड़ा हो जाता है।
39:49और शरीर में... और शरीर में रोग है ना कमर दुखती है ना ये सब।
39:52आत्मा का अनुभव होता है तो कुछ रोग बोक सब मिट जाते
39:55हैं। तुझे कहाँ ऐसा हुआ है? जा तुझे आत्मज्ञान नहीं हुआ है तो क्या बोलेगा?
40:00काहे को परीक्षा लेते हो? मुझे मालूम है तो तुझे मालूम है। क्या?
40:07परमात्मा को बोल देगा जो तने मालूम है कि मने खबर है। क्या?
40:13वो मानेगा नहीं। वो तो शंका, शंका नहीं रहती अपने आप में। शंका नहीं रहती अपने
40:18आप को। कोई भी कुछ भी बोले, मुझे मालूम है मैंने इसका स्वाद चखा है।
40:22मुझे आनंद की अनुभूति हुई है। मुझे पक्का विश्वास है कि
40:26आप मेरी परीक्षा ले रहे हो। मैं आपकी जाल में फंसने वाला, ये निस्संक है।
40:33कोई कुछ भी बोले। मुझे हुआ है, मेरा भले मुझे propaganda नहीं करना है।
40:38मुझे मान सम्मान नहीं चाहिए। लेकिन मुझे पता है कि मैं कहां खड़ा हूं। ऐसे... ऐसे
40:45गुरुदेव के वचन है कि
40:46ज्ञानी ने जहाँ स्वरूप निदान प्रकट किया, वहाँ पर्याय में जुवानी आ जाती है, निर्भयता
40:49आ जाती है, निशंकता आ जाती है। आपकी sir पहले वाली बात में तो इतना confident
40:51रहता है कि उसने पूरी आखरी बात कह दी। अब ये
40:54दोनों में चीज़ आत्मपरक
40:54आत्मा के साथ दोनों में same है। फिर ये
40:55confidence उसको
41:05आत्मा को
41:13देखने के बाद... Yes. तो अनुभव आ तो... तो अनुभव
41:15आता है। immediate आता है। नहीं immediate, ये तो immediate आता
41:18है। immediate आता है तभी तो ये बात। और
41:22एक तो ये confidence, दूसरी बात मैंने बताई निर्भयता की बात। दर्द दर्द जो
41:28मेरा क्या होगा अनुभव नहीं होगा तो क्या होगा?
41:31time चले जा रहा है,
41:32जल्दी जल्दी करूँ ऐसा दर्द जो लगता है ना वो नहीं रहता हूँ। तीसरा एक बात बताइए।
41:37पर्याय में जुबानें आ जाती हैं।
41:40जुबान कभी मांगता नहीं इस प्रकार से।
41:42जीभन कभी मांगता नहीं, इस
41:43प्रकार से ये भी ध्यान ध्यान करना है, आत्मा प्रदर्शन करना है.
41:47तो वात नहीं रहेती. ध्यान करने को बेठता नहीं, ध्यान हो जाता है वो अलग बात है. ये
41:52जात चला करके
41:53कर्तव्य भाव
41:54से ध्यान करने जाता...
42:01ए एक important बात
42:02है. 3 point है. ज्ञानी के 3 point यहां बताये. थड संकेत हो गया तो क्या होता है? ये
42:06होता है. ज्ञानीने ज्या स्वरूप निदान प्राप्त्युं,
42:09त्यां पर्यायमां... ज्ञान प्रगट्युं त्यां पर्यायमां जुवानी आवी जाय छे. निर्भयता
42:14आवी जाय छे, डर
42:15नीकळी जाता है और तीसरा
42:17निशंका आ जाती है. शंका नहीं रहेती अपने आपको.
42:26अंश में देखानी छे. देखातुं क्यां हो? तो
42:31ज्ञान होय. माने कोण? ज्ञान अने मानमां फरक छे. मानने में
42:35फर्क है। जाने और मानने में कितना फर्क है? माना
42:37भी तो अंश में तो अंत हुआ
42:38ही है, वो मान्यता तो है ही।
42:45तो फिर मैं
42:45काहे को दुखी होते हो, सर पे पतरा क्यों मारते हो?
42:48लेकिन माना नहीं है इसलिए सर पे पतरा मारता है। अभी भी कुछ चाहिए।
42:52अगर परमात्मा को देखा है,
42:54फिर परमात्मा मानता है तो ध्यान करूँ ध्यान करूँ काहे को करता है?
42:58इसका मतलब क्या, माना नहीं। जाना है, माना नहीं। Second में third में एक फर्क। सदा।
43:05सहज ध्यान का ध्यान। second stage के अंदर ये ज्ञानी है कि अज्ञानी है?
43:10अज्ञानी है। क्यों? श्रद्धा बदली नहीं है। माना नहीं है। जाना है? माना नहीं है।
43:18third में क्या होता है? जैसा second में जाना वैसा ही third में जानना होता है।
43:23लेकिन साथ में क्या add हुआ है? माना है। सहज
43:29ध्यान। आया समझ में? सहज ध्यान।
43:33difference क्या है? और उसके बाद और 3 point बताया। जुगोनी आवे जा। 3 point
43:36बताव्या. जीवनी आवी जाय छे. निर्भयता
43:38आवी जाय छे अने निशंकता आवी जाय
43:40छे. सरस. ए important छे. ओर वागे क्यां होता है?
43:43आत्मप्रदर्शन होता है त्यारे. क्षणे क्षणे अबंध स्वरूप प्रगट थतुं जाय छे.
43:51एकदम प्रगट नहीं होता है. एकदम प्रगट नहीं होता ने?
43:55श्रद्धा में तो पूरा देख लिया है के में परमात्मा हुं. पछी क्षणे क्षणे
44:00अबंध स्वरूप प्रगट थतुं जाय छे. अभंग स्वरूप
44:02प्रकट थतुजा चाहिए किसमें? Clarity के अंदर। ज्ञान में निर्मलता
44:06में। कि अनुभव तो हो गया।
44:09ये सब सारे गुण प्रकट हो गए लेकिन ऐसे हुआ है
44:13ऐसा ज्ञान ने बराबर जाना नहीं। अब क्या होता है?
44:17development। किसका development? श्रद्धा तो saint person हो गई।
44:21लेकिन ज्ञान saint person नहीं था। इसलिए क्या होता है? धीरे धीरे धीरे प्रतिपल
44:29उसका... उसका श्रद्धा का परिणमन चालू हो जाता है। वो श्रद्धा क्या करती है?
44:34श्रद्धा और ज्ञान का निमित्त नैमित्तिक संबंध है। श्रद्धा होने के बाद
44:41ज्ञान अधूरा है तो सबसे पहले वो अपने लबन की clarity हो जाती
44:45है। केवल ज्ञान तो बाद में होगा। केवल ज्ञान में तो सारी दुनिया दिखेगी।
44:50लेकिन शुरुआत कहाँ से करेगा ज्ञान की निर्मलता का? अपने समान।
44:56तो यहाँ से शुरू करेगा वो जो श्रद्धा... तो यहाँ से शुरू करेगा जो
45:01श्रद्धा हुई है ना, वो श्रद्धा के वश
45:03से ज्ञान अंतर्मुखी हो करके अपनी जो अंदर की जो उलझनें हैं, जो ज्ञान की
45:06कमी के कारण है, या निर्मलता
45:08नहीं है इसके कारण। वो अंदर में जो उलझन होती है कि मैं कहाँ खड़ा हूँ, मैं किधर हूँ,
45:14मेरी स्थिति क्या है,
45:15ऐसी वो श्रद्धा की परिणति के कारण बार-बार बार-बार वहाँ ध्यान जाते-जाते क्या होता है,
45:22उपयोग वहाँ जाते-जाते क्या होता है, ज्ञान
45:24धीरे-धीरे निर्मल होता है। ज्ञान धीरे-धीरे धूमन होता है। तो क्षणे-क्षणे
45:28अभंग स्वरूप, परमात्मा स्वरूप
45:31ज्ञान में
45:32उसकी छवि बैठ जाती है, बैठती जाती है। आगे जो
45:36धूल लगी है ना, वो निकल जाती है। सहज ध्यान कैसे
45:39हो जाता है? सहज ध्यान... सहज ध्यान कैसे
45:45हो जाता
45:46है? automatic ध्यान हो जाता है। अलग से बैठा नहीं था लेकिन अपने आप ध्यान चले गया
45:52था। उपयोग बाहर था।
45:55उसने कोई ऐसा मन में भी नहीं सोचा था कि
45:56मेरा उपयोग अंदर चले जा रहा है, मैं ध्यान करूँगा। लेकिन अचानक क्या
46:00हुआ नहीं मालूम। और बाहर से उपयोग रहा नहीं,
46:03बाहर लक्ष रहा नहीं।
46:05और अपने आप इच्छा हो गई,
46:06चलो इस time क्यों waste करूँ, चलो बैठूँ ना। बैठते ही काम शुरू हो गया।
46:12इसको क्या बोलते हैं? ये अचानक, no pre-planning.
46:16ध्यान करने की कोई pre-planning नहीं। अपने आप इसको
46:19बोलते हैं सवज। ये सब... होते है सहज.
46:22ए सब साधना करने वाले को ए सब अनुभव में आता है. उसके साधना नहीं किये यहां तक
46:26उसको problem है. अब ज्ञान की clarity की बात करना. क्षणे क्षणे अबंध
46:32स्वरूप प्रगट थतुं जाय छे.
46:36जब एसा होता है तब वर्तमान में पुण्यभाव थाय
46:41अने एनुं अनुकूळ फळ मने मळे एवी वांछा
46:45आवा आत्मज्ञानीने क्यारे पण होती? होती। इसीलिए जब आप मुझे बोलते
46:52हो कि सर सोनगढ़ आओ।
46:54और नहीं आते हो तो मेरे पाप का उदय है ऐसा बोलते हो।
46:57और पाप का उदय मिटाने के लिए तीव्र भावना करो ताकि पुण्य की उदय हो जाए।
47:03पाप का उदय पलट जाए मुझे ऐसा भिखारी बनना पसंद नहीं। ये बात कह दी।
47:12सहज में पुण्य का उदय होगा और सोनगढ़ आना होगा और
47:15गुरु के दर्शन मिलने वाले होंगे तो okay।
47:19तो मैं रोकूंगा नहीं। लेकिन सामने से चला करके।
47:24मुझे गुरु का सानिध्य चाहिए ना मुझे उनके दर्शन चाहिए।
47:29और ये सब बेकार लोग हैं इनके साथ में काहे को फंसा हूँ।
47:33मुझे ऐसे लोगों के साथ नहीं रहना है भाव जाना है। ये बात मेरे पास नहीं हो।
47:37मैं पाप के उड़े से बचना नहीं चाहता।
47:41पुण्य के उड़े को मैं लाना नहीं चाहता। मैं जहाँ हूँ वहाँ।
47:46बार में अंश मात्र भी मैं changes करना नहीं चाहता। क्यों?
47:52मुझे परमात्मा मिल गया है। मारो धन्य थयो आज अवतार के,
47:59मिल्या
48:00मने परमात्मा। मुझे भिखारी बनना नहीं आता है क्योंकि मैं परमात्मा
48:05हूँ। परमात्मा था तो परमात्मा
48:07रहूँ। हो गई बात? अब कहाँ change करना है? अब तो जो भी नाटक देखने...
48:13नाटक देखने। बाद में तो film आती है पाप और पुण्य के उड़े।
48:17पल पल में फसल बनते रहते हैं
48:19लेकिन भिक्षा नहीं कमाना। पुण्य के फल की वांछा ज्ञानी को नहीं होती।
48:27अभी 10-15 minute है देखेंगे और आगे।
48:31बहुत बढ़िया actor। अपने
48:37statement और। कीचड़ में घसने पर भले
48:39गद्दी पर था। में घसने पर बड़े गद्दी पंखा जाता
48:43है। समझा जंगल में कहीं दलदल में फंस गए।
48:46अब अपने को मालूम नहीं है कितनी गहराई अंदर खटकी। पैर फिसलते ही ऐसा
48:52थोड़ा प्रयत्न करते ही और अंदर चला जाता है। अब क्या लगता है?
48:59अब तो लगता है कुछ हाथ पैर मारो, हाथ पैर मारोगे तो भी ना हो जाए, ऐसा कहीं ना हो जाए।
49:04थोड़ा पैर और अंदर गया, ऐसा पूरा चले जाए,
49:06उंगली भी चले जाए अंदर। क्या होगा? ये सब जाएगा तो... क्या होगा ये सब जाएगा तो?
49:12दलदल में पूरा अंदर गया तो क्या होता है? खत्म हो गया मामला।
49:17डर लग जाता है। कीचड़ में घसने पर
49:21भय वृद्धि पाता है। थोड़ा हाथ पैर मारा और ज्यादा खड्डे में गए।
49:26पहले ये पहले यहाँ तक था समझो।
49:29थोड़ा बचने की कोशिश की तो यहाँ तक घुस गए अंदर। अब क्या होगा? भयभीत हो
49:34जाता है। भयवान हो जाता है।
49:37भय वृद्धि पाता है। परंतु इसका opposite है।
49:42चैतन्य में घसने पर, इसमें घुसने पर क्या होता है? निर्वयता।
49:47निर्वयता वृद्धि पाती है। देखिए
49:50डर निकल जाता है। self confidence आ जाता है। नहीं नहीं मुझे
49:54मोक्ष नहीं चाहिए। मेरा क्या होगा मुझे चिंता नहीं हो रही मुझे
49:59सब कुछ मिल गया है। मुझे
50:00परमात्मा मिल गया मुझे
50:02अब कुछ मेरा बाल भी बांका नहीं। जितना... जितना अंदर जाते हो ना,
50:07इतना double confidence आ जाता है।
50:08जितनी बार जाते हो ना, उतना double confidence आ जाता
50:12है। दुनिया कुछ भी कहे, मुझे परवाह नहीं है किसी से। मेरा confidence है मेरे
50:16पास। अब मैं वापस जाने वाला,
50:21मैदान में आ गया हूँ। अब मारूँ या मरूँ नहीं, मारूँ ही मारूँ। क्या है?
50:27पहले क्या था, जब गया था interview के लिए तो कहा क्या था?
50:30मारूँ या मरूँ, या फिर मैं मारूँगा या फिर मैं मर जाऊँगा। मैं मरूँगा या फिर मैं मर
50:35जाऊँगा। लेकिन अंदर जाने के बाद क्या हुआ? कौन सा आया power?
50:40मरने का तो सवाल ही नहीं है मैं आज अमर कैसे मरूँगा? अब मरेगा कौन?
50:45जितने पूर्व में कर्म भले बांधे हैं अनंत भले हैं वो।
50:49मैं उनको सबको खत्म कर दूँगा। एक भी जिंदा नहीं बचेगा। सबसे
50:53पहले दर्शकों को मार दिया है।
50:56के अब चूहे हैं बहुत सारे।
50:58अनंत भुवन के चक्कर में। लेकिन एक... लेकिन एक को भी जिंदा नहीं रखूँगा।
51:04अब मारूँ या मारूँ नहीं।
51:05अब एक ही sentence रहा है क्या?
51:09मारूँ मारूँ। तो क्या होता है डर निकल गया कि कहीं ऐसा ना हो कि सब मिलकर के
51:14मेरे को घेरा डाल करके चक्रव्यूह में फँसा देवे।
51:18वापिस मुझे संसारी बना देवे विचार करके। Impossible है बना ही नहीं सकते।
51:24मेरा प्रभु मेरे साथ है भले ही मैं अकेला हूँ। लेकिन अनंत कर्मों के... अनंत कर्मों के
51:30रजकणों के ऊपर मैं भारी पड़ूँ।
51:33हाँ इतना ज़रूर है देर है मेरे परमात्मा होने में अंधेर नहीं है।
51:38क्या हो सकता है कि भई एक भाव में ना हो एक भाव तक ना बनो
51:42दो चार भाव बने maximum 15 भाव बने पक्का जाने में। लेकिन जीत किसकी है?
51:49हो सकता है जीत हो या हार हो लेकिन नहीं नहीं अब हार का तो question ही नहीं है।
51:54क्या? No question of हार। अब तो जीत। नो भाव. अब तो जीत ही जीत दी. केवल ज्ञाननो
51:59धंधो मने अहियांथी देखाय छे. शुं?
52:03सौभासभाई केता ता मने कथारी. अंतिम समये
52:08आया ता पंडने भेजाता अंबालालभाई को.
52:11के जाओ भईया आप उनकी सेवा में रहो. केटना दिन रहेंगे हो ज्योतिष ज्ञान तो जानते थे.
52:18दिन तो आगे थे सौभासभाई कब जावे क्यां मालुम कब देखेंगे.
52:23अंबालालभाई को भेजाता. को दे। कमल भाई उनको
52:26आत्मसिद्धि में। बोलने लगे, जागृति के। ए चुप बैठ, क्या बोले?
52:33सुबह में। इतने आत्मसिद्धि
52:38में, हम power में की पढ़ रहा हूँ, आपको जरा जागृति आना है। जागृति, क्या बोलते हो?
52:44चुप बैठ, बंद कर बोरी तेरी। भई काहे के अर्थ है, आपको तो बहुत पसंद है आत्मसिद्धि।
52:50power में लिखी है। मुझे disturb मत करो, मुझे केवल ज्ञान की धजा दिख रही है।
52:57क्या?
53:00चुप बैठ। चुप करा दिया। power
53:07क्या है? क्या power है? ये केवल ज्ञान की धजा दिखती है, चौथे गुणस्थान में है अभी।
53:14मरने की घड़ी आई है, मरण पथारी पे
53:17है। same ऐसा किस्सा हमारे
53:18इधर हुआ। ऑटिज्म का last day। Hospital का last day। 6 बजे के
53:23बाद फिर तबीयत बिगड़ी। और कोई chances नहीं थे। कि यहाँ से खून
53:29चढ़ाया था एक bottle 3 घंटे में लगती थी।
53:32लेकिन खून इतना बह रहा था। कि यहाँ भी और यहाँ भी। 3 bottle साथ में चढ़ाने को।
53:39और इतना fast खून बहता था बाहर।
53:43कि एक bottle को 3 घंटा लगता था इसकी जगह पे 3 bottle को 1 घंटा लगता था
53:48खाली होने में। इतना fast body
53:52लेती थी। भागम दोड़ी करके 20-25 bottle तो हमने cover कर लिया।
53:58कि सुबह तक रहे जिंदा तो। लव पड़ेगी तो 20-25 bottle। जिंदा
54:05बचने का तो कोई chance नहीं था लेकिन हम ये चाहते थे कि जितना ज्यादा fight करें ना
54:10जागरूक अवस्था में।
54:12जितना लंबा समय खींचे ना। उतनी उनकी साधना अंदर की अच्छी हो।
54:19साधना कैसे जिंदा रखना है इसीलिए
54:21bottle चढ़ाने का था बाकी बचने का तो
54:22कोई chance ही नहीं था। खून की bottle तो 20-25 मंगाता रहता। एक घंटे
54:28में 3 चाहिए तो रात भर निकालना है तो।
54:33सुबह तक भी 20-25 bottle तो चाहिए ही चाहिए सब मंगा लिया।
54:38और। मालूम तो पूरा पहले
54:40से 4 दिन पहले से दवा बंद की थी मालूम तो पड़ ही गया था। The end
54:44है। दो end है। 6 बजे के बाद जो तबीयत बिगड़ करके जो 8 बजे ना तो मैं गया था।
54:51तो तुम फिकर मत करो
54:52सब तुम पहले जाओ तैयारी करके रखना हम भी आ रहे हैं सब 20 पटे साल पीछे।
54:57कोई 10 साल नहीं कोई 20 साल। सब साथ में ही साधना करेंगे चिंता मत करो।
55:02ऐसा बोला। और तुम मैं मैं रमा नहीं हूँ मैं आत्मा हूँ। ऐसा बोला।
55:08कि मुझे please आप कुछ भी मत बोलो मैं मेरे आत्मा में जाना चाहती
55:12हूँ। मुझे disturb... मुझे disturb होता है अभी आप कुछ
55:14भी मत
55:20बोलना मेरे
55:24से। ये last
55:25word थे उसके बाद बोले नहीं अंदर।
55:27ऐसी 8:00 बजे के बाद 9:30 बजे first attack आया coma का। डेढ़ घंटे
55:31तक अंदर ही अंदर ना बात ना चीज ना होश में पूरे बोले। 9:30 बजे attack आया
55:37तब first stage coma का आता है। First stage... First time में क्या
55:42है कुछ थोड़ा बहुत अपना एहसास करा तो
55:44मालूम पड़ता है।
55:46फिर रात को 10:30 10:45 बजे दूसरा attack आया तब फिर अपना एहसास करा तो
55:50मालूम नहीं पड़ पाता था।
55:54इसके बाद attack आया। तो chances
55:58पूरे 10 minute का लेकिन इसके बाद भी आधे घंटे के बाद दूसरा attack आया।
56:03वो बोला 5 minute भी नहीं इसके बाद भी निकाला वो
56:05ने time। Date change हो गई। ये सब। ये
56:09सब नज़ारा आँखों के सामने सबने देखा
56:13है। ICU में हम लोग कितने 10-15 जने थे
56:15ऊपर खड़े हुए। आज्ञा मानने वाले को भी लेकिन ये
56:19ऐसे प्रसंग में सबको जाने दिया। सब लोगों ने आँखों से देखा
56:22आँखों से। ऐसा होता है केवल ज्ञान का झंडा दिखता है
56:26इतना power होता है। ये बात इस पर से निकली।
56:29कि कीचड़ में घसने पर तो भय वृद्धि होता है। लेकिन चैतन्य में घसने पर
56:35निर्भयता वृद्धि पाती जाती है। मैं चैतन्य चैतन्य में ही चलता हूँ
56:42और खोखा जड़ जड़ में चलता है। विभाव विभाव में है।
56:50मुझ नित्य में मेरी पर्याय का और वेदन का भी प्रवेश...
56:55देखो उपयोग कहाँ रखता है? ज्ञानी पुरुष का
57:00उपयोग कहाँ रहता है? जब दृष्टि
57:03अंदर रहती है तो कहाँ रहता है? एक कोखे पे तो नहीं... कहा है। ये
57:06कोके पे तो नहीं रहती।
57:08जड़ जड़ में मैं मैं। कोका मरो
57:10बोली अंदर में जो विकल्प आते हैं मन में।
57:14वो विकल्प विकल्प में और मैं मेरे जानने वाला अलग। अरे
57:18जो पर्याय होती है शांति की उत्पन्न वेदन की भर्ती आती है।
57:21कि वेदन भी मैं नहीं हूँ मेरे से बाहर boundary के बाहर वेदन वेदन में और मैं।
57:29वो चेतने पे दृष्टि रखने से constant। कानून की भर्ती करते जाते हैं।
57:36मुझ नित्य में अनित्य मेरी पर्याय का प्रवेश भी नहीं हुआ।
57:42मैं नित्य पर्याय मेरी पर्याय अनित्य।
57:47मैं सत्य मेरा
57:51मेरी पर्याय मेरी आ गई तो मेरा मेरी असत्य। मैं नित्य।
57:58मुझ नित्य में मेरी पर्याय का भी प्रवेश नहीं तो
58:01अन्य की बात... का भी प्रवेश नहीं तो अन्य की बात क्या? अरे परिणाम परिणमता है।
58:07और उसी समय same moment मैं अपरिणामी हूँ।
58:14ये ये अनुभव में से निकली हुई बातें हैं। अनुभव करते करते लिखी।
58:18अनुभव करने के बाद फौरन पत्र लिखा हो। कि परिणाम परिणमता है,
58:25परिणाम परिणमन तो रुकने वाला कहाँ है? बढ़ती नहीं तो घट, घट नहीं तो...
58:30बढ़ती नहीं तो ओठ, ओठ नहीं तो... बढ़ती, वो तो होने वाला है। चढ़ना
58:35उतरना तो पर्याय का स्वभाव है,
58:37नहीं तो होने वाला है। परिणाम परिणमते हैं, लेकिन उसी समय...
58:43मैं और परिणाम नहीं हूँ। बढ़ती हो या ओठ हो, मैं तो समुंदर हूँ।
58:48क्या? बढ़ती और ओठ तो अवस्था है,
58:51और मैं अवस्था से पार त्रिकाली द्रव्य हूँ, शाश्वत हूँ।
58:57परिणाम... परिणाम परिणमता है उसी समय में अपरिणम्य।
59:04अरे भगवान कारण परमात्मा अपने को बोलते हैं महिमा के वचन।
59:11अरे भगवान कारण परमात्मा
59:14तेरे दर्शन होते ही विभाव की पीठ दिखने लगी है।
59:21मालूम पड़ता है राग द्वेष काम क्रोध मोह... द्वेष, काम, क्रोध, मोह भागने लगे हैं।
59:28सामने नहीं आना चाहते, सामने आए तो जल जाते हैं। छुपने लग गए हैं, भाग गए काये सब।
59:35तेरे दर्शन मात्र कृष्ण भगवान रथ में बैठे
59:40हैं। रथ चला रहे हैं और दूध धनाधन ठोक के जा रहा है। मारुति कुमार सा।
59:45काये पर वो सामने आता है भाई? कोई आता है सामने, सामने आने
59:50को? तो मौत निश्चित है समझ। सामने आया। क्या हुआ? सामने आया। तो क्या होता है?
59:56कि परमात्मा का रथ। चारा है और इधर धरती की एक तार लगी है अंदर में।
1:00:03तीर के ऊपर तीर आ जाते हैं। सामने बेचारे कहाँ से आएँगे? आए ज़्यादा।
1:00:08ये अकेला है वो कितने हैं? बहुत सारे हैं। काम, क्रोध, मद, मोह,
1:00:14माया, इतना। 25 प्रकार के कसाए हैं।
1:00:18इसमें अनंत अनुबंधी के 4 हैं बाकी सब बाकी हैं। विचार है बाकी सब बाकी
1:00:22है। आराम बराबर कोई सामने आएगा तो
1:00:24सब भागने लगे छुपने लगे कि मेरे सामने आ जाएगा मर जाएगा। कचर निकल जाएगा पूरा। क्या?
1:00:32तो तेरे दर्शन होते ही विभाव की पीठ टिकने लगती है।
1:00:36वो सामना करता ही नहीं है भाग जाते हैं छुप जाते हैं। तेरा यथार्थ बाण हुए बिना।
1:00:44भूतकाल किया पूर्व में।
1:00:46परिणाम आश्रित परिणामों का इतना तीव्र बंध। परिणामों का इतना तीव्र बंध कर चुका था।
1:00:52तेरा तो मुझे पता नहीं था और मैं परिणाम के ऊपर दृष्टि थी।
1:00:56और फिर ये चाहिए ना वो
1:00:57चाहिए ना ऐसा नहीं ना वैसा नहीं ना इतना हमने परिणाम खराब कर लिए।
1:01:02और इतने कर्म बांध लिए थे और इतने तीव्र बंध कर लिए थे। कि अब
1:01:08इतने सारे वो जमा हो गए कर्मों के ऊपर।
1:01:12कि उनकी अवधि खत्म होने के लिए अब उन सबको
1:01:14एक साथ मारने के लिए जल्दी से। तेरा दस। तेरा दर्शन तो स्वाभाविक होना ही था।
1:01:20कि तू नहीं मिलता तो इनको कैसे खत्म करूँगा? इतने पैदा हो गए थे।
1:01:24कितने बंधन हो गए
1:01:30अनंत काल में?
1:01:31अब उसको खत्म करने के लिए अनंत काल लगे क्योंकि अनंत काल में बंधे गए कर्म
1:01:34हैं। अगर एक-एक करके मैं निकालूँ
1:01:37एक के बाद एक, कितना time लगे?