Avlokan Discourses of Shri Devchand bhai Shah The book Search Photographs About

Shrimad Rajchandra Vachanamrut

18 April 2002 · Patrank 103 · 56 minutes

Transcript

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Recitations restored to their canonical wording: Mangalacharan — Mangalam Bhagavan Viro, Namokar mantra, Omkar bindu sainyuktam, Samaysar mangalacharan.

0:14णमो अरिहंताणं णमो

0:15सिद्धाणं णमो आयरियाणं

0:20णमो उवज्झायाणं णमो लोए

0:23सव्व साहूणं नमः समयसाराय

0:29स्वानुभूत्या चकासते । चित्स्वभावाय भावाय

0:36सर्वभावान्तरच्छिदे परित्यज्य। मंगलं भगवान वीरो,

0:43मंगलं गौतमो गणी। मंगलं कुन्दकुन्दार्यो,

0:50जैनधर्मोऽस्तु मंगलम्॥ सर्व मंगल मांगल्ये

0:56सर्व कल्याण कारिके। प्रधानं सर्व धर्मानु।

1:02दैवं प्रेत ॐकारबिन्दुसंयुक्तं

1:06नित्यं ध्यायन्ति योगिनः।

1:11कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय

1:18नमो नमः राजचन्द्र वचना

1:26में। पत्र number है 103। उम्मई से ये पत्र लिखा

1:29गया है। तो

1:32इसलिए पत्र झूठा।

1:37Mostly ये पत्र

1:38जूठा भाई को लिखा गया

1:40होगा। अनुमान है सारा। अभी सोभाग भाई का contact उनको नहीं हुआ था।

1:48सबसे पहले contact

1:54उनको जूठा भाई से हुआ इस प्रकार से। कहते हैं, उस time में वो आत्मज्ञानी नहीं थे।

1:59भूतकाल में साधना की थी लेकिन

2:01वो तो गिर गए। जातिस्मरण ज्ञान था, वैराग्य था। ज्ञान था,

2:05वैराग्य था, संसार में रुचि नहीं थी, ये सब।

2:09लेकिन आत्मज्ञान नहीं था। अवलोकन

2:13का प्रयोग भी जैसा चाहिए वैसा

2:16नहीं था। लेकिन वैराग्य था इसीलिए,

2:23वैराग्य की अवस्था में, अंदर से

2:27सब कार्य बोझारूप लगता है, संसार बोझारूप लगता है। और इनका तो शादी हो

2:32गया था, 23 साल। शादी हो गया था। तेईस साल की उम्र में। और कमाने के लिए Mumbai जाना

2:39था। Mumbai में रहना था।

2:40परिवार से दूर। अपने परिवार तो

2:44अवानिया गाँव में

2:47रहता था। माँ-बाप वहीं। और कमाने के

2:52लिए

2:53मैंने अकेले का कमाना होता तो दो रोटी चाहिए

2:55किधर भी काम

2:56करना। लेकिन परिवार की

2:59जिम्मेदारी थी। यही।

3:02ये हिंदुस्तान के परिवारों

3:04में इस प्रकार का है

3:05देखिए एक कमावे वो घर के पूरे।

3:08स्त्री बच्चे आदि। है ना? हाँ बाप

3:14पानी। पूरा बोझ एक के ऊपर आता था। Foreign में शायद ये

3:17system नहीं है foreign में सबको

3:18काम करना है। अब यहाँ पर ये है।

3:23कि घर का कमाने वाला जो।

3:27व्यक्ति होता है वो पुरुष होता है। बाकी सब। बाकी सब जो रहते हैं वो

3:31एक ही कमाई के ऊपर निर्भर करते हैं। तो बोझा बढ़ जाता

3:37है। अकेले आदमी को बोझा बढ़

3:39जाता है। इस संबंध में यहाँ

3:42पर बातें हैं। कुटुंब रूपी काजल

3:46की कोठरी में रहने से

3:48संसार बढ़ता है। काजल काला होता है, आँख में डालते हैं।

3:57तो ऐसे घर में रहो। तो ऐसे घर में रहो जहाँ काजल का ही घर हो। और फिर आप दाग

4:02आपको लगे नहीं कालापना, ऐसा कैसे

4:04हो सकता है? आप काजल की कोठरी में रहोगे

4:10तो कालापने का दाग कपड़े को

4:12या आपके अंग को लगे बिना रहेगा नहीं। कितना भी संभल रहो।

4:17दिन भर में, कितना भी संभल के रहो तो भी दाग तो लगने ही वाला है। ये

4:22बात ज्ञान की है कि कुटुंब रूपी काजल की कोठरी में रहने से संसार... जल की कोठरी

4:29में रहने से संसार बढ़ता है। हम पूर्व कर्मों के उदय से एक परिवार

4:34में हम लोग इकट्ठे हुए।

4:38जिसको पहले तो हम जान माँ-बाप को भी नहीं जानते थे पहले। लेकिन जन्म होने

4:42के बाद उनके घर में जन्म हुआ

4:44तो वो हो गए माँ-बाप। धीरे-धीरे बड़े हुए तो पहचानना शुरू हुआ भाई, बहन,

4:49दादी, चाचा, चाची, सब। सबसे

4:54पहले शरीर... सबसे पहले शरीर इसके बाद परिवार से नाता जुड़ता है।

4:58और फिर relation तो है ही society है एक जाति है कुल है।

5:05ज्ञाति है। इस प्रकार से society होता है

5:10फिर। Area wise भी

5:11मंडल बनते हैं वो हर जगह मंडल ही बनते हैं। ये बरकतपुरा colony का

5:18मंडल है सब member बन जाओ भाई। सफाई

5:20अच्छा करो। सफाई अच्छा करने का। फिर building में एक bundle बनता

5:26है। Residential complex का जो होता है ना,

5:28Bhaskar Tower complex residential association, ऐसे association बनते रहते

5:33हैं। एक बरकपुर colony का, फिर

5:36Hyderabad city का, ऐसा बनते रहते हैं। ये social context से जुड़ता है।

5:42वो सबको तो avoid कर सकते हैं लेकिन

5:44परिवार को avoid नहीं कर सकते। सबसे भाग सकते हैं लेकिन परिवार को

5:49एक दिन भी छोड़ना... सकते हैं लेकिन परिवार को

5:52एक दिन भी छोड़ना बहुत मुश्किल है। गए हैं

5:56घूमने के लिए, रोज़ के 4 phone आते हैं, तबीयत कैसी

6:01है, खाना खाए कि नहीं

6:03खाए, yoga करते कि नहीं करते। अब फिर मेरे को ना यही checking होता है।

6:054 phone मेरे को आते

6:06हैं, 4 phone दूसरों को भी आते

6:08हैं। कहीं मैं झूठ तो नहीं बोल रहा

6:10हूँ। ये क्या है? ये कुटुंब रूपी काजल की कोठरी है।

6:14कुटुंब हमको कुछ नहीं कर सकता है, लेकिन हम attachment में जुड़े

6:20हुए हैं। परिवार हमको कुछ

6:22हैरान नहीं करता है, परिवार हमको राग द्वेष नहीं कराता है। लेकिन

6:25हमारा मोह परिवार के प्रति है। वो हमको राग

6:28द्वेष कराता है। एक तो शरीर के प्रति मोह रहता है।

6:32वो राग द्वेष कराता है सारा दिन। दूसरा next

6:38शरीर है तो परिवार। उनसे जुड़े रहते हैं।

6:43और संसार बढ़ता है माने क्या, संसार माने क्या? कुटुंब परिवार ये संसार नहीं

6:49है। अंदर में राग द्वेष होना वो संसार

6:52है। भूतकाल में राग द्वेष किए थे,

6:54उसके फल में अब ये परिवार आदि मिले हैं, society मिली है, शरीर मिला

7:00है। अब जो राग द्वेष करते हैं, उसका भविष्य में मिलेगा। जैसा बोते हैं,

7:05वैसा पा लेते हैं। जैसी करनी, वैसी भरनी।

7:12बाहर में कोई दुश्मन नहीं है तो हमारे

7:14तो... बाहर में कोई दुश्मन नहीं है तो हमारे तो generally तो हर एक घर के अंदर मित्र

7:17और शत्रु सब घर में ही रहते हैं।

7:20बाहर वाले से तो ऐसा भी लेना देना नहीं।

7:23क्या? अगर वो गाली देवे तो भी अपुन ज्यादा मथापूंड़ी नहीं करते।

7:27कौन जाएगा police में पंचायत अपने भाई? थोड़ा ना मारो ना बकने दो उसको। ऐसा करके

7:33उससे झगड़ा पंचायत नहीं करते लेकिन घर में अगर कोई बोल दिया।

7:37फिर देखो मजा।

7:39जब तक उसको सताएंगे नहीं सामने जवाब देंगे

7:42नहीं। इसका जवाब पत्थर से नहीं देंगे। तब तक जीव को शांति

7:47नहीं होगी। ये अपेक्षा है,

7:50आप अपने हो और अपने हो करके हमारे को इतना करते हो

7:53भला। बात नहीं समझ पाए

7:57तो भी तकलीफ। बात करते करते अगर

8:02समझ नहीं पाए अर्थ, अर्थ का अनर्थ हो गया अगर।

8:06आप मेरी बात ही नहीं समझते। मेरा कहने का ऐसा वैसा नहीं था। कहने का वैसा नहीं

8:10था। मेरा अंतःकरण बिल्कुल शुद्ध है।

8:13लेकिन आप लोग समझ नहीं पाते हो, कभी नहीं समझेंगे मेरे को। ये क्या होता है?

8:19ये घर इतना झगड़ा बाहर वाले अगर नहीं नहीं समझे तो क्या है?

8:24अगर अपनी बात को बाहर वाले नहीं समझे तो क्या है? उसकी मर्जी भैया।

8:28सब अपने-अपने घर के मालिक हैं लेकिन घर में कोई अपनी बात नहीं समझे तो देखो क्या होता

8:33है। नाच लेना कूद लेना पूरा।

8:35और जी भर के राग द्वेष कर लेना।

8:37राग द्वेष कर लेते हैं। एक कुटुंब रूपी काजल की कोठरी से

8:41रहने से संसार बढ़ता है माने राग द्वेष बढ़ता है। वो भी राग द्वेष करे अपने निमित्त से

8:47और उसके निमित्त से हम भी जी भर करके राग द्वेष करें। फिर बाद में तो कहाँ हो

8:51फिर? देह छूट जाएगा बाद में तो

8:54कहाँ मिलना है फिर राग द्वेष करना नहीं है अभी जो है अवसर है

8:57आरम पीटी जितना करना

8:59है। इतनी गालियां देना है जितना प्रेम करना है

9:01अभी कर लो। बाद में कहाँ मिलने वाले हैं बाद में यहाँ से छूट गए ना। बाद में। यहाँ

9:06से छूट गए हम। बाद में कोई

9:08letter या telephone या telephone भी नहीं करने

9:10वाला। मालूम भी नहीं पड़ेगा कहाँ जाएगा। इसीलिए यमराज हमको अलग कर देवे

9:16इसके पहले जी भर करके पूरा हिसाब किताब तय कर ले। बाकी नहीं रखना कुछ भी।

9:25कई घर वालों के साथ हमारा ऐसा है।

9:29कुटुंब रूपी काजल की... नहीं एक एक छोटे छोटे

9:32आप देखना एक एक प्रसंग बनते हैं और एक एक... एक एक प्रसंग बनते हैं और

9:34एक एक छोटी छोटी बात पे कितना discussion होता

9:37है, कितना विवाद खड़ा होता है। एक बोलेगा ऐसा करना,

9:42और कुटुंब परिवार दूसरा बोलेगा नहीं ऐसा नहीं ऐसा

9:45करना। ये serial जो बनती है ना, इसके कारण से बनती है सब। घर में जो

9:49पंचायत होती है। देखना एक एक serial का इसके पीछे heart देखना कितनी पंचायतें हैं

9:55परिवार

9:58में। जो घर की कहानियां जो

9:59होती है वो picture पे लाके। Picture चलाती हूँ। कुटुंब

10:05रूपी काजल की कोठरी। उसमें रहने से

10:08राग लगे बिना रहता नहीं है। राग द्वेष हुए बिना रहते नहीं है

10:13और अशांति हुए बिना नहीं रहती। अशांति का कारण क्या

10:18है? मोह है हमारा। मेरा भाई,

10:23मेरे father, मेरी पत्नी, मेरा पति,

10:27बस मेरा पना लगा दिया है। ऐसे बाजू में पड़ोस में भी जैसे

10:33लोग रहते हैं ऐसे हम नहीं रह सकते हैं अपने घर में।

10:36पड़ोसी के जैसा व्यवहार कैसे करें? फिर अपने में रहूंगा क्या?

10:40क्या फर्क? फिर झगड़ा किससे करना? अगर पड़ोसी रहेंगे पड़ोसी मानेंगे अपने वालों को।

10:46अपने वालों को अगर पड़ोसी मानेंगे

10:48फिर झगड़ा किससे करेंगे? लड़ना झगड़ना किससे होगा? रिस किससे

10:53करेंगे? नहीं बोलना है जाओ

10:54किसको किसको बोलेंगे ऐसा? बातचीत नहीं करेंगे। किसको

10:56बोलेंगे ऐसा बातचीत नहीं करना। क्यों

11:00नहीं करना? क्योंकि मानते नहीं हैं हमारी बात। हमारे उनके विचार नहीं मिलते।

11:05देखिए बाहर वाले के साथ विचार नहीं मिले तो क्या करते हो?

11:08बात नहीं करते हो, जीत नहीं करते हो, क्या नहीं करते हो? ऐसे बहुत से लोग हैं जिनके

11:13अपने साथ बहुत से लोगों को विचार नहीं मिलते, क्या करते हो?

11:18द्वेष करते हो।

11:19ऐसा ये वितराग धर्म है, बहुत से जीव नहीं मानते हैं, हम नहीं मानते

11:21हैं। क्या करते हो? झगड़ा पंचायत।

11:24क्या करते हो झगड़ा पंचर? नहीं मानो भैया तुम मानी मर्जी।

11:29मानना है मानो नहीं मानना है मत मानो।

11:32लेकिन घर में अगर कुछ हवे एक-दुई

11:34छोटी सी बात संसार के level की

11:36बात भी देखो कोई नहीं माने। विचार नहीं मिले तो देखो कैसा होता है समाधान। वो

11:44बिना वजह का tension सर पे रहता है। जब तक वो

11:49अभी थोड़े दिन में वापस मिल जाते हैं क्योंकि कितना दिन दुख में रहो

11:51कि रहना तो इत्थे ही है

11:52कि घर छोड़ के भागना थोड़ा है। घर छोड़ के जाओ फिर TV

11:56नया लेना पड़े, घर अलग लेना पड़े।

11:59एक पंचायत थोड़ी। ये तो ये

12:02अच्छा है कि एक ही TV में सब लोग देख सकते हैं। अलग हो गए तो क्या हुआ?

12:09किराया अलग भरना। सब अलग-अलग, घर का कितना बढ़ जावे उतना तो कमाते नहीं हैं।

12:14कभी-कभी मजबूरी से साथ में रहना पड़ता है। रहना एक पल भी नहीं है लेकिन क्या करें।

12:19हाँ अगर हमारा हिस्सा दे

12:20दे तो हम चले जाएँ अभी। देते तो हम चले जाते अभी। Partition तक।

12:25हम भी इसके हैं। ये property जो होती है ना वो बांध के रखती है।

12:32कोई भागता नहीं है कि नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए मैं चलता हूँ, मुझे शांति चाहिए।

12:37ऐसे बहुत कम मिलेंगे।

12:40क्योंकि जब तक मेरे हिस्से का मुझे नहीं मिलेगा ना

12:43तब तक मैं घर छोड़ने

12:44वाला नहीं हूँ। और आपको चैन से जीने नहीं दूँगा। Picture भी आते हैं बेचैन से

12:47जीने नहीं दूँगा करके। जाते हैं बेचैन से जीने नहीं दूंगा करके ऐसे

12:51picture title भी ऐसे रहते हैं। जीने नहीं दूंगा।

12:55मार डालूंगा ऐसे title रहते हैं। इंतकाम। ये सब क्या क्या है ये सब लफड़े।

13:02हमने देखा नमोद सु के घर बम्बई में।

13:06मैं समझता हूं अभी तो उनकी value बहुत बढ़ गई है बाप दादा की जमीन है।

13:13जहां पर वो रहते हैं पूरी building उनकी है। लेकिन पुराने

13:17rent tax वगैरह सब। क्योंकि पुराने rent act वगैरह सब किराए पे कोई खाली करता नहीं है।

13:21खाली करे तो नाम बदली का जो मिलता है सो

13:23मिलता है बाकी कुछ नहीं मिलता। और repairing करने के पैसे नहीं हैं और ये

13:28एक property जो है संयुक्त परिवार में है। किसी के

13:33विचार नहीं मिलते एक

13:35ही घर के अंदर दो

13:36भाइयों के विचार नहीं साथ में रहते हैं

13:39दीरानी जेठानी जेठानी अलग से जाके खाना बनाएगी अपना।

13:43फिर वो उसका timing निकल जाती है फिर दीरानी जाके

13:46अपना खाना। निकल जाती है फिर दीरानी जाकर अपना खाना

13:48अलग बनाती है। घर में रहते हैं दिन भर बातचीत नहीं करते।

13:52क्या? वो एक दूसरे के

13:55बच्चों को भी लाड़ नहीं करते क्योंकि लाड़ करेंगे तो वो अभिषेक हो जाएगा नहीं दूर रहो।

13:59Alert alert वो alert क्या लाड़ नहीं करना है। लाड़ नहीं करने का alertness।

14:06किसका लफड़ा है मालूम है?

14:09कि बटवारा हो नहीं सकता। इतनी value है किसी एक में भी ताकत।

14:13किसी एक में भी ताक़त नहीं है कि

14:16कुछ ले लें पूरा और उसको अपना हिस्सा दे दें।

14:19इतनी ताक़त नहीं है। अब क्या करना है? ज़िंदगी भर रोते रहना है। ऐसी property

14:23नहीं है तो भी अच्छा है, मैं तो बोलता

14:27हूँ। क्या? कई लोगों की property नहीं होती है। क्या करते हैं?

14:30नहीं जीते हैं, मज़े से जीते हैं।

14:32ये property रख ले करते हैं। कितने दुखी? कि न साथ में रह सकते हैं,

14:37न प्यार से रह सकते हैं और न

14:40अलग भी हो सकते हैं। तो life... एक live example दे रहा

14:47हूँ मैं। क्या करें? जो main था वो गुज़र गया है, दादी माँ है।

14:53जो भी आया हो, कुछ भी हुआ ना दादी माँ पे। मारो जो चाहे दादी माँ पे।

14:58आपके वजह से। बंटवारा करो ना। लेकिन बोले कैसे

15:00करूँ बताइए आप, कौन देता है चलो? चलो ₹1,00,00,000 की property है। चलो तुमको

15:04अलग होना है। चलो हम

15:05अलग करने को तैयार हैं लेकिन

15:06इसमें... चलो हम अलग करने को तैयार हैं लेकिन इसमें

15:11ताकत होनी चाहिए ना कि तेरा हिस्सा दे सके

15:13cash में। ताकत नहीं। ऐसे

15:18यहाँ पर भी अपने मुंसिपल एरिया में बहुत से लोगों का ऐसा ही problem है,

15:22property का बहुत problem है। ना संभाल सकते हैं,

15:25ना उसका rent भर सकते हैं, ना repairing करा सकते हैं, ना रह सकते हैं।

15:30ना किराया भी आता है, वो मौज करता है।

15:35जो अंदर घुस गया है ना किराए पे वो देख लिया है कि झगड़े पे। वो देख लिया है कि

15:37झगड़े पंचायत पड़े हैं आपस के लोगों।

15:40किराया नहीं देंगे जो जाओ वो काम करो। कौन जाएगा court में? मजे

15:43में रहो जब दूंगा साथ में court में दूंगा मैं पैसा। और ये लोग आपस में झगड़ झगड़ के

15:49ना property को निकालते हैं ना बेचते हैं ना किराया वसूल कर सकते हैं।

15:53एक वो गांव में पड़ी है एक इधर पड़ी है एक उधर पड़ी है और धुन खाती है।

15:57नसीब में नहीं है भोगने का।

16:01ऐसे तो बहुत से रोज के किस्से हैं आप कितने बताऊँ अपने

16:03इधर file खोलोगे तो बहुत से

16:05निकल जाएंगे। तो मोह से निकल जाएगा। ऐसे होगा। घर-घर में लड़ाइयां होती हैं। ये

16:10कुटुंब रूपी काजल की कोठरी में रहने से संसार बढ़ता है।

16:15ना छोड़ना होता है, ना साथ में चैन से रहना होता है।

16:21और राग-द्वेष, राग-द्वेष, राग-द्वेष, राग-द्वेष। तीव्र मोह,

16:24कुटुंब से ज्यादा तीव्र मोह है तो राग-द्वेष भी तीव्र है।

16:28शरीर से ज्यादा मोह है तो उसमें

16:30उसके प्रति भी बहुत लगाव है। जरा कुछ हुआ तो ऊपर-नीचे हो जाते हैं। जरा कुछ हुआ तो ऊपर

16:35नीचे हो जाते हैं। चैन करना तो

16:38बस की बात ही नहीं है। चाहे

16:41जितना उसका सुधार करें, बहुत कितना भी अलट-पलट राग-द्वेष नहीं करना है।

16:47जोर से नहीं बोलना है, वो भी परमात्मा है, गुरु ने बोला है कि उसमें ही आत्मा देखो।

16:53उससे प्रेम करो। लेकिन

16:55नहीं बोलना, नहीं बोलना, नहीं

17:00बोलना, उसका बोझा... नहीं बोलना नहीं बोलना उसका बोझा इतना बढ़ जाता

17:03आखिर एक दफे तो पूरा साथ में निकल के बोल देना

17:06होता है। इतने दिन से जमा किया दो चार दिन से नहीं बोलना है नहीं बोलना है नहीं बोलना

17:12है। क्या हुआ? एक थप्पड़ मारे ना इधर तो दूसरा गाल देना इधर।

17:16लेकिन तीसरा मारे तो? की मार देना। इस दो का ही छूट है।

17:22इधर खाना एक किधर खाना अब तीसरा तो है नहीं।

17:25तीसरा मारो फिर देखो तुम्हारे हाथ पैर नहीं तोड़े तो बोलना।

17:29क्या? क्या? ऐसे ही एक दिन नहीं बोलना है, दूसरे दिन नहीं बोलना है, तीसरे

17:33दिन नहीं बोलना है, चार दिन नहीं बोलना है, कुछ बोलना

17:36नहीं है, अवलोकन में रहो भैया, कर्म नहीं मानना है।

17:39फिर वो जो file जमा होती है दमन कर कर। जो file जमा हो

17:44के एक दिन पूरी बरसात बरसती

17:46है। क्या? अंदर में घुट घुट करके।

17:53पूरा एक दिन में पूरा खाली होना होता है, तब ऐसा लगता है एक second भी

17:58साथ में नहीं रहना। लेकिन... कन्नू साथ में नहीं रहना। लेकिन कैसे

18:02भागोगे भैया हिस्सा नहीं मिलेगा जब तक कैसे जाओगे? हिस्सा मिलेगा तो

18:06अभी चले जाओगे। अगर ऐसे

18:08लड़ झगड़ के निकल जाएंगे तो पूरा हिस्सा किसको मिलेगा?

18:11अपने दुश्मन को मिल जाएगा। वो दुश्मन है ना घर वाले दुश्मन।

18:16तो मैं मेरा ही कन्ना काटूंगा? नहीं नहीं उसको तो साथ में लेकर के पूरे पाठ पढ़ाना।

18:22खुद भी पढ़ना, रूचा खुद भी खाना और दूसरों को भी मारना, दूसरों को भी उसको भी खिलाना।

18:27को भी मारना उसको भी खिलाना। रोज पंचायत करना। इसका आदि

18:29हो गया है ये जीव। कुटुंब रूपी

18:34काजल की कोठरी में रहने से संसार बढ़ता है।

18:38चाहे जितना उसका सुधार करे तो भी

18:41एकांतवास से जितना संसार अब क्षय होने वाला

18:46है। द्वेष कम होने वाला

18:48है। जीव को शांति मिलने वाली है। अकेले रहने से। खुद का खुद का जीव

18:52मिल जाता है। खुद का खुद का जिम्मेदार है। वो भी जितना ज़रूरत

18:55है उतना इससे ज़्यादा पंचायत नहीं।

18:58Limited अपने पुरता। 4 साल 4 4 8 दिन

19:04का ज़िंदगी है। क्या

19:05और इतने इल्ज़ाम। पार्टी में कहते थे ज़िंदगी टुँकी छै। और झंझट।

19:12ना मिलै छै। क्या करना? झंझट को टुँकी करो तो ज़िंदगी अपनी बड़ी।

19:19ये 24 घंटे के 25 घंटे होने वाला नहीं है जो भी खेल। के 25 घंटे

19:25होने वाला नहीं है जो भी खेल है वो 24 घंटे का है। अब उसमें

19:30आप कितने percentage आप अपने आत्मा

19:33के लिए दे सकते हो? अगर खुद के ऊपर ही खुद की limited जवाबदारी ले

19:36लेते हो, खुद के जितनी, कि

19:37नहीं सबको पढ़ाना लिखाना भाइयों को भी सेवा करना

19:40माँ बाप की सेवा करना सब लफड़ा ले लो तो क्या होगा?

19:43अनंत भव में ऐसा ही किया है पागल। जो अपने नहीं हैं, जो वास्तव में पराए हैं

19:49उसको अपना... संसार में पराए हैं उसको अपना मान करके सबकी हजामत की है।

19:53और फिर जो बाप के पोटले बांधे, कर्म किए वो कौन भोगा?

19:58अकेले ने भोगा। रामायण को

20:01लिखने वाले जो वाल्मीकि ऋषि हैं, उनकी बात आती है वालिया लुटेरा। वो डाकू था वालिया।

20:10वो जंगल में जाता था।

20:13वो हिरण को मार के, भैंसों को मार करके सब लेके आता था शिकार

20:18को। एक दिन माँ... एक दिन महापुरुष मिले। तो

20:21बोले क्या करते हो देखो ऐसे भोले प्राणियों को मारते हो

20:24तुझे बहुत पाप होगा। मैं अकेला थोड़ा करता हूँ मेरा पूरा परिवार है बूढ़े माँ बाप हैं।

20:31wife है बच्चे हैं सबके लिए करता हूँ सब लोग रिश्तेदार हैं। मैं अकेला कैसे भोगूँगा?

20:39इसको हिरन को मारा है तो सब साथ खाने वाले हैं। सबको भोगना पड़ेगा पाप मैं अकेला कैसे

20:45भोगूँगा? कि नहीं। मैं अकेला कैसे भागूँ? कि नहीं ऐसा नहीं है। तुम्हारी गलतफहमी

20:48है देखो अच्छी तरह से। समझो।

20:51कि नहीं मैं ऐसा नहीं मानता मेरे को proof करके दिखाओ। फिर proof करके दिखाते हैं।

20:57क्या होता है? वो wrong करता है plan पूरा ready था।

21:02घर पे जाकर के 4 दिन तक जाता नहीं सिखाने। घर के लोग भूखे मर रहे

21:07हैं। सब लोग चाहते हैं कि

21:08इसका दर्द मिट जाए और इसका रोना चिनाना बंद हो जाए।

21:12जल्दी से अच्छा हो जाए जल्दी पे जावे

21:14काम पे। से अच्छा होए जल्दी पे जावे काम पे। और खाना लेके

21:16आवे हम लोगों के लिए हम भी भूखे मर रहे हैं।

21:19और फिर क्या होता है? तो

21:23उसके चिल्लाना बंद नहीं होता है जितने महापुरुष आते हैं वहां से।

21:27घरवाले परेशान हो करके महाराज आप भी कुछ कृपा करो कुछ vibration दो आपके पास। इसको

21:33कुछ। आप ही बचा सकते हो कोई शरण नहीं है।

21:38आपकी जो तपस्या की है ना

21:40उसका थोड़ा percentage हमारे को दो। उसका थोड़ा

21:42percentage हमारे को दो अच्छा। आपके vibration चाहिए हमारे को क्या है पधारो।

21:49फिर वो

21:49जबरदस्ती करके लेके आते हैं। संसार के हेतु संत का

21:54संत की भक्ति करते हैं संसार बढ़ाने के

21:58लिए। तो पूरा plan था वो तो आए अच्छा क्या हुआ

22:02है। वो ध्यान में बैठते हैं ओ समझ में आ गया

22:04क्या है। इसके प्राण तो अभी 1 घंटा भी नहीं टिकेगा ये। क्या

22:10बात है। क्या बात करते हो फिर हम कहाँ जाएँगे?

22:12सबको चिंता है। माँ-बाप रोने लगे, wife रोने लगे,

22:15बच्चे रोने लगे।

22:18नहीं महाराज साहब कुछ करो आप vibration

22:20कुछ दो आप। कुछ मंत्र-दंतर दो, कुछ तावीज़ बांधेंगे, कुछ भी करेंगे।

22:25अच्छा भैया ठीक है। एक उपाय है।

22:30आप लोगों में से कोई मरना चाहता है तो

22:32मैं इसको ज़िंदा कर सकता हूँ। बाकी 1 घंटे का ही मेहमान हूँ। 1 घंटे के बाद रहने वाला

22:37हूँ। एक घंटे के बाद रहने

22:38में भगवान। अब सोच लो आप हिसाब करो।

22:42क्या वो रोने वालों के आँख में आँसू यहीं रुक गए नीचे नहीं उतरे।

22:47अब कौन मरने को तैयार है? आँख से दिखता नहीं है, चल नहीं सकते,

22:52ऐसे बूढ़े माँ-बाप को भी दया नहीं आई अपने बच्चों पे।

22:55बच्चे के ऊपर। मरना कौन चाहेगा?

23:02क्या? जिसके मुँह में हम फसते हैं वही नहीं चाहिए हमें। हम फँसते हैं वही

23:05नहीं चाहिए हमारा। मुझे मेरा आत्मा चाहिए।

23:08ऐसा अगर self के ऊपर आ जावे ना,

23:12तो वो धर्म पा सकता है, बाकी नहीं पा

23:14सकता। सबकी पंचायत करे, बच्चों का क्या, छोटे बच्चे हैं हम

23:17सबका क्या। दुकान का क्या, दुकान कौन

23:20संभालेगा? अभी तो कमाने दमाने की उम्र है।

23:23जिंदगी भर कमाओगे ना तो भी वही बात रहेगी।

23:26और चाहिए और चाहिए, कभी end नहीं है। कोई ना कोई

23:29जीव ने अपने मोह में फँसा दिया है। कोई ना कोई कार्य में फँसा दिया है। में फंसा

23:33दिया है कोई ना कोई कार्य में फंसा हुआ

23:34है। अब वो दूसरा काम करने लगे तो फिर ये काम कौन करेगा? हमको तो

23:38नसीब में झाड़ू लिखना रखा है ना झाड़ू मारना हर घर।

23:42अनंत भाव की अनंत परिवार के साथ झाड़ू मारना। सब ठीक ठाक करना

23:47सब बहन बना करके छोड़ के चले जाना एक दिन। वापस जा गए और नए

23:52तरीके से शुरुआत करना। cycle की फेरी करते करते आज मैं करोड़पति बना हूँ

23:57और AC में आज बैठने को मिला है

24:00शांति से। यहीं मर जाओगे।

24:03वापस जाओगे और कचरा कुंडी में। फिर वहां से वापस cycle की फेरी करते

24:07करते वापस ऊपर आना। ये चक्कर है ये।

24:10क्या है ये संसार? कभी ऊपर

24:13कभी... कभी स्वर्ग में कभी... नरक में।

24:18लेकिन ये हमारे जीवन पे रोज गुजरती है लेकिन हम नहीं सुधरे।

24:22हम होंगे कामयाब एक दिन। लेकिन वो एक दिन कब आएगा? अपूर्व अवसर एवो... कियरे अवसर।

24:29क्या रे आओ

24:30सपने में देखते जाओ। बाकी ऐसा तो नहीं होने वाला। चाहे जितना उसका सुधार करे,

24:38तो भी एकांतवास से जितना संसार क्षय होने वाला

24:43है, उसका 100वाँ हिस्सा भी,

24:47उस काजल ग्रह में रहने से नहीं होने वाला

24:53है। अकेलेपन का अभ्यास महावीर के बोध का पात्र कौन? 7वाँ number का

24:57point। सातवां number का point। एकांतवास की प्रशंसा

25:00करने वाला, निवृत्ति को चाहने वाला।

25:03कोई नहीं चाहिए, किसी का संगत नहीं चाहिए, मैं अकेला, अकेला, अकेला। ऐसी भावना तो

25:08कम से कम हो अंदर में।

25:10कार्य तो जब होने वाला होगा तब होगा। वो तो contract के ऊपर depend है।

25:15अंदर में निवृत्ति की भावना है लेकिन हो सकता है हमारे contract ऐसे किए हैं।

25:20के मरते दम तक निवृत्ति ना मिले, ऐसा भी हो सकता है।

25:24पूर्व कर्मों की सजा तो काटनी पड़ती है। पूर्व कर्मों की सज़ा तो

25:29काटनी पड़ती है लेकिन

25:32जो भावना बाते हो वो फैल नहीं जाती। ये contract खत्म होते ही जैसी भावना

25:36भाई ऐसे दिन आएंगे। निवृत्ति की भावना।

25:39मुझे सिर्फ आत्मकल्याण करना है। ये निवृत्ति की भावना।

25:44कुछ नहीं चाहिए कोई साथी संगathi नहीं चाहिए

25:47किसी से help नहीं चाहिए। ये निवृत्ति की भावना।

25:50Self dependent रहना है। ये निवृत्ति की भावना। अकेले। ये निवृत्ति

25:53की भावना है अकेले रहना है

25:56ऐसी भावना तो कम से कम भा सकती

25:59है आत्मशांति वाला जीव तो भावना भाता है कोई नहीं चाहिए संसार का स्वरूप देखा है

26:05अनुभव भी किया है

26:08और कोई सार नहीं है संसार में real में कोई सार नहीं

26:12है अपनी अपनी जिंदगी को

26:13तपासो मालूम पड़ेगा। अपनी अपनी जिंदगी को तबाह

26:14सो मालूम पड़ेगा। हम एक ही परिवार में बड़े

26:18रहते हैं लेकिन कभी किसी से ना किसी को सुख दिया है।

26:22ना सामने वाले ने अपने को सुख दिया है ना हमने किसी सामने वाले को सुख दिया

26:27है। फिर वो नाटक रहता है birthday party ये सब काहे को मनाते हैं?

26:31के रोज झगड़ा करते हैं एक दिन तो उसको wish करें।

26:35लो हम भी कुछ चाहते हैं तुम्हारे पता नहीं सब wrong है।

26:38फाड़ बिछाना ये सब क्या है? मिछा में तो

26:40वो भी wrong है कोई। मिछा में जो करन वो भी ढोंग है कोई चाहता नहीं है एक दूसरे

26:43पे लेकिन अभी एक दिन तो चाह कर रहा था।

26:46कभी कभी इसीलिए मैं birthday wish करते हैं क्योंकि उसने हमारे को birthday wish किया

26:50था अभी हमारे पे कर्जा हो गया है।

26:52उसको चुकाने के लिए अभी हमको birthday wish करना है। सब नाटक नाटक नाटक की ही

26:58दुनिया है पूरी।

27:08संसार का

27:08स्वरूप देखे तो ऐसा

27:10है और आप। बार का स्वरूप देखे तो ऐसा है और राग

27:11द्वेष निरंतर बढ़ते हैं। बार वाले तो कभी

27:15अभी हमने तो सामने पैर भी नहीं रखा है।

27:20सामने ही पड़ोसी हैं। ऊपर नीचे नहीं जा सकते लेकिन इधर कभी ना तक।

27:28जाके भी नहीं देखते क्या करते हैं वो

27:30कब आते हैं कब सो जाते हैं क्या करते हैं। लेकिन घर में

27:34रोज 10 बजे आने वाला लड़का रात को 12 बजे तक नहीं आया तो क्या होता है बूढ़े माँ

27:37बाप... तक नहीं आया तो क्या

27:39होता है बूढ़े माँ बाप को। क्या हो

27:40गया अभी तक क्यों नहीं आया? नींद नहीं आती है?

27:44फौरन mobile चालू करते हैं अरे mobile भी बंद है switch off है।

27:48अब देखो मज़ा आते ही दमादम। कितना लगाया phone अभी तक नहीं लगा।

27:54मेरी battery down हो गई थी। पेपार दे रहा।

27:57क्या वो सुन... अब क्या नहीं बोलता है क्या बोलता है?

28:01मेरी battery down हो गई थी signal नहीं पकड़ रहा था। परेशान कितना होता है

28:08जीव?

28:10ये क्या है ये चीज़? अपनी आत्मा की फिक्र छोड़ कर के, बिना वजह

28:17राग द्वेष बढ़ाने वाले दूसरों की फिक्र करना उसका नाम है

28:21और परिवार का प्रेम। ये प्रेम नहीं है actual में राग है। हम उसको समझते हैं प्रेम।

28:28प्रेम नहीं है, प्रेम होता ना तो

28:30एक दूसरे को कभी दुखी नहीं करते। अपनी कुर्बानी दे देते। अपनी कुर्बानी दे रहे थे।

28:35अगर परिवार वालों के सामने चाहते ना,

28:38तो प्रेम में कभी मांगना नहीं होता है। कभी demand नहीं रहती। हमारा ये

28:44आग्रह नहीं होता है कि ये हमारी बात माने ही माने।

28:47प्रेम में कभी नहीं होता, प्रेम में surrendership रहता है। जिसमें

28:51तू राजी है वो मुझे करना

28:53है। इसका नाम प्रेम है। राग में क्या होता है? मैंने तेरे लिए इतना इतना किया है।

29:00और तू मेरे को ऐसा उल्टा... तू मेरे को ऐसा उल्टा, ये द्वेष वहीं चालू है।

29:04ये राग किया, इतने दिन तक साथ में रहकर के क्या किया?

29:08प्रेम तो किया नहीं क्योंकि जिसे अपने

29:10आत्मा से प्रेम नहीं है, वो दूसरों से क्या प्रेम करेगा?

29:14लेकिन गिनती करेगा, प्रेम करने वाला गिनती नहीं करता है मैंने

29:18दूसरों के लिए कितना किया।

29:20अगर हम किसी से प्रेम करते हैं तो उसके लिए पूरी जान भी लुटा देते हैं।

29:24अभी मांगेगा, हिसाब किताब नहीं मांगेगा।

29:27कि देखो मैंने तुम्हारे लिए इतना इतना इतना इतना। मेहनत मार दी इतना

29:29इतना इतना इतना कुर्बानियां दी।

29:31ये इतना इतना किया। कभी हिसाब किताब नहीं होता। रात में हिसाब किताब होते हैं।

29:37पूरी गिनती करके रखो।

29:40कभी वक्त पे हिसाब बताना है भले लेना नहीं है लेकिन हिसाब तो बताना है लिख के रखना।

29:45ताकि कभी वो मुंह खोलेगा ना तो उसको ये chapter बता देगा देख भाई क्या मुंह खोलते हो।

29:51इसका हिसाब किताब कर। देख मां बेटे को प्रेम करती है।

30:00अपना दूध पिलाती है कभी हिसाब किताब रखिए

30:02कितना पिया कितना liter क्या हुआ कितना पैसा। वो हमेशा यही चाहती है कि

30:06तू सुखी रहे तू सुखी

30:12रहे। बीच में से हट जाती है।

30:16अपने बेटे को जहाँ शांति होती है वो करने देती है। बीच में से अपने हट जाना।

30:23कैसे कैसे सोई कैसे कैसे रही अपने साथ। बाजू में बिस्तर पे सोया है।

30:30रात को भी पेशाब होता है तो मालूम पड़ते ही उसको सूखे पे अपने सूखे पे। वो वजह होती

30:37है। पीके वजह। ये क्या है? ये प्रेम में कुर्बानियां होती हैं।

30:41राग में कुर्बानी नहीं होती। राग में अपेक्षाएं बढ़ती हैं।

30:46Condition बढ़ती हैं। हमने हमने क्या किया आज तक अपने

30:51परिवार में रहकर? कभी किसी को प्रेम नहीं दिया। कभी किसी को प्रेम नहीं दिया

30:54तो कभी प्रेम मिला भी नहीं हमको।

30:56हम प्रेम करेंगे तो मिलेगा, प्रेम नहीं करेंगे तो कहाँ से मिलेगा?

31:00हम राग द्वेष करें और सामने वाला हमारे से प्रेम करे कैसे बन सकता है?

31:04हमको तो अपना एक भी छोड़ना नहीं है, पूरा हड़प लेना है।

31:08और सामने वाले को बोलते हैं तू थोड़ा minus कर,

31:12तू थोड़ा adjust कर। कैसे adjust करेगा?

31:16कोई adjust नहीं करेगा। चाहे जितना

31:20सुधा करे तो भी

31:21एकांतवास... सुधा करे तो भी एकांतवास से जितना संसार क्षय होने वाला है। उसका

31:26100वाँ हिस्सा भी उस काजक गृह में रहने से

31:29नहीं होने वाला है। देखो। वो कसाय का निमित्त है। अपना घर है ना।

31:35वो कसाय का निमित्त है

31:36असल में वो घर भी नहीं है।

31:41अपना घर थोड़ा है। अगर अपना घर होता तो छोड़ना क्यों होता?

31:46अपना तो चैतन्य घर है। क्या वो अपना

31:49कभी अलग... वो अपना कभी अलग नहीं होने वाला है अपना। वो permanent है। एक तो रेठी

31:54मिट्टी, चूना, cement इसका है। और इस परिवार का है पूरा।

32:01सब अपना-अपना मानते हैं।

32:04इसके तो बहुत से वो

32:05हैं क्या बोलते हैं भागीदार, partners। अपने घर का कोई partner नहीं

32:10है, अपने घर के हम मालिक

32:12हैं। असल में चैतन्य घर ही अपना घर है। जो ज्ञानमूर्ति है वो अपना घर है।

32:17लेकिन इसको... देखिए इसको भूल करके हमने पराए घर में अपनापन किया। कितने घर बदले?

32:24पहले माँ-बाप के घर में, फिर वहाँ से शादी हो करके अलग घर किया।

32:29वो colony में गए, फिर वहाँ से खाली करके दूसरी colony में आए, फिर वहाँ से जाके तीसरा

32:34चक्कर चलता है। और जहाँ गए ना वहाँ उतनी ममता से लगा करके,

32:41कितनी ममता से सजाया, वापस छोड़ा वहाँ

32:47से। ये भी घर है एक लेकिन पराया घर है ये जो इसको भी छोड़ना पड़ेगा। शरीर रूपी घर

32:54उसके अंदर हमारा परमात्मा बसा हुआ है।

32:56लेकिन कभी भी जिंदगी में आज तक अपने परमात्मा की सुध नहीं ली। घर की संभाल रखी

33:03शरीर की, परिवार की, मकान की, building की।

33:08Motor car को थोड़ा सा चुरका लगे तो ऊपर नीचे हो जाते हैं उसकी फिक्र रखी।

33:15लेकिन अपने परमात्मा की जो असल में मूल है। जो

33:20जिसको घर से लगाव है उसको ही भूल गए हम। इसीलिए वो कसाय का निमित्त है क्या है?

33:28क्रोध मान माया लोभ ये कसाय है 4। वो

33:33वो क्यों बढ़ते हैं खत्म क्यों नहीं होते हैं?

33:37कि हम निरंतर ऐसे संग में रहते हैं।

33:40कि नहीं चाहे तो भी

33:41क्रोध मान माया। चाहें तो भी क्रोध,

33:43मान, माया, लोभ आए बिना रहता? कितना भी control कर लें।

33:49वो हुए बिना नहीं रहेंगे। और संग छोड़ना हमारे हाथ में नहीं

33:54है। ये जो बाहर का जो संग मिला है शरीर से लेकर के, माँ-बाप से लेकर के, परिवार, और जो

33:59बाहर की जो सुविधा-असुविधा जो भी है, संयोग है, वो

34:02अपने हाथ में नहीं है। अब संग में रहे तो तकलीफ,

34:07तो कसाए बढ़ते हैं। और नहीं रहना है तो... और नहीं रहना है तो ये

34:10आपके हाथ की बात नहीं है।

34:12कैसे फस गए हैं? देखो ये चक्कर में बैठे हैं।

34:17चालू होने के बाद नीचे उतर सकते हैं। नहीं मेले में आता

34:26है। इसको दर्द लगे अभी उतर जाओ।

34:29क्या फिर बाद में वो रोएं धोएं कुछ भी नहीं होता भैया। पेट में दर्द होता

34:33है, उल्टियां आती है भैया जो भी होगा होगा। मरने के लिए राजी हो

34:36जाओ देखिए। मरने के लिए

34:37राजी हो जाओ देखिए बाद में

34:39कुछ नहीं। जाते हैं बहुत मज़ा करने के

34:41लिए टोरा टोरा में बैठते हैं। और फिर देखो क्या

34:43झटके लगते हैं। पूरी हवाइयां उड़ जाती हैं। क्या बोलते हैं वो

34:47होता है ना ऐसा कुछ क्या क्या खेल खेल के। मैं भी गया था एक दिन। माने SL World में।

34:51पर ऐसा में ऊपर क्या है और कुछ नहीं। नहीं वैसे ऊपर जाते हैं ऐसा में दम बोल

34:55के नीचे उतरते हैं। नीचे उतरता

35:00है। नहीं बोला नहीं

35:06बोला। मैं बोला मैं अपने

35:09को बचाने के लिए मैं बोला क्या करना है सांस रोक लो कुछ नहीं होगा।

35:13और परेशानी होगी।

35:17सांस रोकने की कोशिश की वो सुना था सांस रोकने से कुछ भी नहीं होता है

35:20हाथी भी ऊपर चढ़ जाए तो कुछ नहीं होता है। बोले अपने को कुछ नहीं होगा सांस रोकते

35:24ही second की बात है रोक लेंगे। लेकिन जो pressure आता है ना

35:30सांस को पकड़ नहीं सकते बहुत कष्ट होता है। कुछ नहीं कर

35:35सकते। 4 बार ऐसा ऊपर नीचे नहीं जाना नहीं उतरना था लेकिन क्या।

35:38वापिस धन बल के ऊपर है, वापिस धन बल के नीचे गिर गए। फंस गए,

35:43हम बीच में उतर नहीं सकते।

35:47अब शर्म आती है, आता है अंदर से रोना

35:49लेकिन शर्म आती है, रोएंगे तो कैसा सब लोग हंस रहे हैं,

35:52अपुन भी हँसो रोते-रोते।

35:54अंदर में रोना है, बाहर में हँसना है। चिल्लाना, वो करना, ये करना, उधर-उधर देखना।

36:00सामने तो देख नहीं सकते तो

36:01और चक्कर आ जाता। अभी अंदर ऐसा

36:04ही देखने हैं। क्या?

36:08हालत बन जाती है बराबर।

36:09वैसे ही इसके अंदर ऐसा है।

36:12कि चक्कर में बैठे ना, आप रोओ चाहे कुछ हँसो कुछ भी हो।

36:15आप ना छोड़ सकते लड्डू है या फस गया।

36:19ना नीचे निकाल सकते ना बाहर निकाल सकते, ऐसा फस गया कुछ। ये हाल हो जाते हैं।

36:27ये कुटुंब रूपी काजल की कोठरी। साथ

36:30में... साथ में नहीं रहे तो बोले कि तुम साथ में नहीं रहते हो कैसे हो?

36:33अपने घर वालों के साथ में नहीं रहते हो

36:35और साथ में रहे तो क्या होता है? रोज की पंचायतें।

36:40एक दिन नहीं आता है झगड़े के बिना। एक दूसरे को

36:42मुँह देखे तो जैसा राक्षस के जैसा देखते हैं।

36:46हमेशा मुँह चढ़ा हुआ रहता है कभी शांति से प्रेम से रह ही नहीं सकते। ये सब क्या है ये

36:52सब? सही में बोला है। ये कसाई का निमित्त है क्रोध मान माया

36:56लोभ होने का ये निमित्त है। लोभ होने का ये

36:59हिस्सा मिलता नहीं है और हिस्से

37:01के लिए रहना है तो

37:01constant जब तक हिस्सा नहीं मिलेगा ना तब तक मेरा हिस्सा मेरा हिस्सा मेरा हिस्सा।

37:07ये क्या है ये लोभ कैसा है constant रहता

37:11है। ये क्या मालूम मेरे को क्या सूझ आता था मैं तो बोला मेरे को कुछ नहीं चाहिए।

37:16क्या तीन लुगड़े से निकलना चाहता हूँ। दागिना भी जो

37:20आप शादी में दिए ना अगर वो भी चाहिए तो ये भी लो ये रखो।

37:24हमको लेकिन हमको मेहरबानी करो। लेकिन हमको मेहरबानी करो, हमको

37:30साथ में ले जाओ। क्या करोगे,

37:32क्या खाओगे, क्या कौन सा धंधा करोगे? ऊपर आकाश है, नीचे धरती है, जो भी

37:36होना होगा नसीब में होगा, हो

37:37जाएगा। लेकिन आप हमारे को sign करो।

37:41और 10 दिन लगे sign लेने में। हमको फिक्र होए, क्या करेगा लड़का?

37:47ऐसे ही सब छोड़ कर के इसको अकल नहीं है, 2-2 बच्चे हैं, छोड़ के चले आता है, लेकिन

37:51क्या होगा? हमको नहीं रहना, अशांति में हमको नहीं रहना, हमको शांति

37:58चाहिए। सबको छोड़ सकते हैं।

38:01लेकिन ये रोज़ के

38:02क्रोध, मान, माया, लोभ हमारे से बर्दाश्त नहीं होते। ये अशांति, कसाय का निमित्त माने

38:07कस, कस माने पीड़ा देना, किसको? अपने को। कस माने पीड़ा। आय माने

38:14आते रहना, पीड़ा मिलते रहना, मिलते रहना। जैसे आँख में जब तक वो

38:18कीटाणु नहीं निकालोगे तब तक क्या है? पीड़ा। ऐसे हृदय में जब

38:21तक... ऐसे हृदय में जब तक क्रोध, मान, माया, लोभ निकले नहीं, कसाय निकले नहीं,

38:27अंदर में बैठे नहीं, अशांति सब चालू है। अब क्या

38:32कोई ना कोई लोभ के कारण वहीं रहना

38:34चाहते हैं, वहीं फँसना चाहते हैं। भैया हमको चाहिए ही नहीं, मारो गोली सब।

38:39भूखा प्यासा अंदर अकेले रह जाना अच्छा है, better है, लेकिन शांति से जीना

38:44है। अशांति से हमको

38:45जीना नहीं है। Life mini है। शांति के लिए mini है, अशांति के लिए नहीं

38:48mini। शांति के लिए मिली है अशांति के लिए नहीं मिली। पैसा नहीं मिला तो नहीं मिला,

38:53हिस्सा नहीं मिला तो नहीं मिला।

38:55किसी का साथ नहीं मिला घर वालों का तो कोई बात

39:00नहीं। कोई ऐसा मिल कहाँ

39:01अपने हैं सिद्धांत की दृष्टि से तो कोई अपना है नहीं। अपना मानते हैं वो

39:05अपनी गलती है। फिर कोई ना कोई लोभ के कारण कि हिस्सा मिले

39:09तब तक राह देखना है क्या राह देखना है?

39:12नसीब में होगा तो कोई लेके नहीं जाता है।

39:15और नहीं होगा तो साथ में रहो

39:16जिंदगी भर तकलीफ उठाओ तो। रहोगे जिंदगी भर तकलीफ उठाओ तो भी आपको

39:19नहीं मिलने वाला है, नहीं मिलने वाला। छोड़िए तो, मगज मरी थी, चाहिए ही नहीं।

39:25इसके लिए बहुत आत्मबल और आत्मशांति का लक्ष्य चाहिए, तो छोड़ सकते हो।

39:29बाकी परिवार तो...

39:32परिवार में रहना बोलो तो कसाई का निमित्त है। कसाई कराने वाले नहीं हैं।

39:37परिवार वाले कसाई के निमित्त हैं। कसाई आप करते हो, अपने अज्ञानता के कारण।

39:44आपके मोह के कारण। आप मोह छोड़ो। आपके मोह के कारण आप मोह

39:48छोड़ो। आप अपना मोह छोड़ो, कोई कुछ नहीं करता है।

39:52कि क्रोधमान माया लोक में निमित्त नहीं हो।

39:55लेकिन वो निमित्त कब बनते हैं? जब आप गलती करते हो, तब वो निमित्त बनते हैं।

40:00आप अपने स्वरूप को भूल जाते हो। अपने आत्मशांति के target को भूल जाते हो।

40:05आत्मा के पीछे नहीं लगते हो, फिर वो क्या होता है?

40:09फिर वो निमित्त बन जाते हैं। अगर

40:12आप alert हो, आप जागृति में हो, आपको... आप

40:13alert हो, आप जागृति में हो, आपको अपने आत्मा पे प्रेम है।

40:16अपने आत्मा की दया आती है।

40:18तो परिवार वाले कुछ नहीं कर सकते, आपकी शांति को

40:21थोड़ा भी भंग नहीं कर सकते। लेकिन आप ही नहीं रह सकते हो ना ठिकाने

40:26पे। तो कषाय का उपादान नहीं है, ये कषाय

40:28का... उपादान कौन है कषाय का? अपना मोह, अपने को भूल करके,

40:36अपने आत्मा की चिंता नहीं करके,

40:38दूसरों की चिंता करना, ऐसा जो अपना मोह है, जो अज्ञान है, ये... जो

40:41अपना मोह है जो अज्ञान है ये कषाय का उपादान है।

40:44जब हम ऐसी गलती करते हैं तो बाद में कोई ना कोई very nearest कौन है सबसे पहले शरीर

40:50और next में कौन है? परिवार वाले। वो क्रोध मान माया लोभ में निमित्त बनते हैं।

40:58मोह के रहने का अनादिकालीन पर्वत है। देखो।

41:05अपने को जीव भूलता है।

41:07अपने को भूल करके कहाँ रहता है वो? सारा दिन। सारा दिन करता क्या

41:12है? अपना मन शरीर को अपना मानता है तो पहले उसकी सेवा करता

41:15है जितना चाहे उतना। यहाँ से अगर हटा तो अंदर तो आता नहीं

41:20है। अंदर तो देखा नहीं है और बाहर जाता है तो nearest कौन है?

41:26शरीर के बाद nearest कौन है? शरीर के उत्पन्न करने वाले माँ-बाप,

41:31पत्नी, पुत्र ये सब हैं।

41:35सबसे ज़्यादा विकल्प उनके ही आते हैं। Business करने

41:37आता है। Business करने जाता है अकेला काहे के वास्ते जाता

41:41है? अपने अकेले के लिए जाता है। कितना चाहिए चाचा को?

41:44अपने परिवार को सुखी करने के लिए। कि लड़के को पढ़ाना है।

41:49तो पैसा कमाना है, उसको college की fee भरनी है।

41:52या घर में TV नहीं है, TV की demand है। Vehicle चाहिए तो vehicle चाहिए, तो उसका।

41:58ये सब काहे के वास्ते है सब?

42:02पूरा परिवार है ये सब। पूरे परिवार का बोझ है और फिर ये... पूरे परिवार का बोझ है और

42:07फिर ये चक्कर ये मोह रूपी बैल।

42:10समय सार में भी आया है starting में चौथी नंबर की बात

42:14में। ये मोह रूपी भूत है ना। ये जीव राजा को ऐसा बांध के रख दिया है।

42:20काम कराओ राग द्वेष कराओ काम कराओ। रात दिन और कभी file बंद नहीं होगा।

42:27एक एक file खुलते जावे रोज के रोज। आज तो account बंद हो

42:31जाएगा लेकिन 15 दिन और चल गया है। पुराना करने जाओ तब तक। पुराना करने जाओ तब

42:35तक 15 दिन का और नया

42:37आया है। क्या कैसा बंद होता है वो?

42:39बंद होने का नहीं है। चक्की चलती रहती है।

42:42करो करो करो करो और एक दिन आओ चले जाओ तुम।

42:46अभी पूरे नहीं होने वाले। ये मोह रूपी भूत उसको

42:51अंदर में घुस गया है। अब पूरा काम कराता है मजो जी। नाचो।

42:57कूदो राग द्वेष करो क्रोध मान माया लोभ जी भर के करो।

43:01और नए नए कर्म बांध। ओ नये नये कर्म बांध बांध करके जाओ गलेक नीकळो.

43:06एक गुरुदेव की language में तो हर प्रवचन में ए बाधा देते बाईडी छोकरा धंधो जापो.

43:12आने कई अक्कल ज नथी. शुं? धूळनी पाछळ पड्यो छे शुं धूळ धूळ धूळ एटले शुं पैसा.

43:18गुरुदेव के हर lecture में मिलेगा ए

43:20बांध. बडा मजूर है बडा मजूर. थोडा मांगे

43:25छोटा भिखारी और बडा राजा जेसा है वो ज्यादा मांगे वो

43:28बडा भिखारी है. भावनगर के राजा. बड़ा भिखारी। बावनगर के राजा

43:33आए सुनने के लिए। उनका नाम लेकर के बोले। क्या? राजा

43:37की property की बात होती है इधर किराए पे दिया, उधर किराए पे दिया, इतनी

43:40सारी property है। राजा है। सब जगह से किराया आता है हर महीने।

43:45और लाखों-अब्जों रुपये की पैदास होती है हर महीने की। बैठ के

43:49मज़ा में खाना, घूमना, बाहर-बाहर।

43:52बोले थोड़ा मांगे वो थोड़ा भिखारी

43:54और ज़्यादा मांगे वो... ज़्यादा भिखारी, उनको भिखारी कह दिया।

43:58बड़ा भिखारी। ना भिखारी उनको भिखारी कह दिया, बड़ा

44:04भिखारी कहा वो। मजूर मजूर। गुरुदेव उनको शर्म नहीं

44:05होती। और गांधी जी को ही बोल दिया बड़े मजूर हो तुम।

44:09क्या? सारा देश,

44:11लोग क्या है सामान उठाते हैं,

44:13बिस्तरा पुतला उठा रहे हैं, लाओ विदेश रुपया। और तुम क्या करते हो?

44:19तुम सारे देश की उपाधि लेते हो सर। गांधी जी को बोल दिया,

44:22बड़े मजूर हो, तुम्हारे जैसा मजूर नहीं मिलेगा दुनिया में। करनी है। मुँह पे बोलने का।

44:30डरने मरने वाला नहीं है क्योंकि देश सेवा करते हो पुण्य इकट्ठे करोगे।

44:34अभी नहीं लेते हो बाद में मिलेगा यार। स्वर्ग में सब मिलने वाला

44:37है। इतनी सेवा करते हो नहीं मिलेगा? कहाँ भोगोगे?

44:41अभी तो बोले कि नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए निस्वार्थ सेवा करना है लेकिन भैया

44:44ऐसा नहीं चलता है। निस्वार्थ सेवा करोगे तो ज्यादा मिलता है।

44:50कुछ मांग करके लेते हो तो नहीं मिलता है ज्यादा। तो यहीं कुछ थोड़ा बहुत नाम

44:55साम मिल जाता है। तो यहीं

44:56कुछ थोड़ा बहुत नाम साम मिल जाता है, फूल

44:58की माला मिल जाती है, कुर्सी मिल जाती है, तो 50% यहीं cutting

45:01हो जाता है। बीमे के दो प्रकार होते हैं, मालूम है? क्या? बीमे, बीमे

45:05करने का, life insurance। एक तो आप भरते

45:08जाओ, फिर 5 साल के बाद आपको थोड़ा-थोड़ा मिलते जाएगा

45:11हर 5 साल में। तो आखिरी में कम मिलता है। क्या?

45:16और एक तो नहीं, आप जमा ही करते जाओ, भरते वक्त या

45:20end होगा तब बहुत ज्यादा amount आएगा।

45:22क्योंकि आपने बीच में कुछ लिया नहीं है ना। ऐसे ही सेवा करते जाओ

45:26कुछ फूल की मालाएं पहनते

45:28जाओ तो क्या होगा? आखिरी में कम मिलता है।

45:31गांधी जी को कम नहीं मिला।

45:33गांधी जी को बहुत मिला है क्यों? क्योंकि कभी मांगा नहीं और सेवा करते गए।

45:36कहाँ गए स्वर्ग में?

45:37वहाँ बहुत पैर दबाने वाले हाथ दबाने वाले बहुत हैं। और भाग भी नहीं सकते

45:43आज नहीं चाहिए तो कहाँ से भागोगे भैया स्वर्ग से कैसे

45:47भागोगे? Before maturity आप भाग नहीं सकते लेना ही पड़ता है।

45:51आखिर यहाँ नहीं मिला तो वहाँ मिला। मिलेगा तो सही। छोड़ के कैसे भागूँ?

45:59इसीलिए अपने करने का फल तो अपने को मिलता ही

46:05है। कुछ भी नहीं करें जीव जानने देखने में रहे तो मुक्ति है।

46:09बाकी बुरा करें तो तो भी है।

46:12जूते रेडी हैं तैयार हो रहे हैं

46:14सब। और अच्छा करें

46:15अभी कुछ मत मांगो। बाद में ज्यादा ले लेना। मांगो। बाद में ज़्यादा ले

46:18लूँगा ब्याज के साथ जमा हो जाएगा। हाँ मिलेंगे।

46:22हमने निस्वार्थ भाव से सेवा की है लेकिन भैया तुमने

46:24सेवा की है ना अपनी तो नहीं के लिए कुछ।

46:27मुक्ति तो नहीं मिलेगी। जाओ उधर ऊपर। भोगने के लिए।

46:34इसलिए मोह के रहने का अनादिकालीन पर्वत है। नहीं चाहिए नहीं चाहिए तो भी।

46:40फिर वहाँ जहाँ मिलेगा ना वहाँ मोह करना ही पड़ेगा।

46:44जहाँ जाओगे वहाँ अभी नहीं करते हो वहाँ मोह करोगे। वा के वा अभी नहीं

46:47करते वा मोह करो। ये मोह छूटता नहीं है अंदर से। एक कुटुंब परिवार में रहना

46:52ये कसाय का निमित्त है मोह रखना। और मोह में मोह के रहने का अनादि कालीन पर्व है।

46:59एक तो हम अपने स्वरूप को भूले हुए हैं।

47:01और फिर उस गलती को और मजबूत करने के लिए और मजबूत करने के लिए।

47:06उस उस मोह रूपी पौधे को पानी पिलाने के लिए।

47:11ये सब है। रोज पानी डालते जाओ तो छूटता

47:13ही नहीं। रोज पानी डालते जाओ तो सूखता ही नहीं कभी मोह।

47:15रोज पानी पिलाओ।

47:18ये मोह का झाड़ कभी सूखता नहीं। ये प्रत्येक अंतर गुफा में जाज्वल्यमान है।

47:24हर एक अज्ञानी जीव के अंदर में तो पड़े हैं चोर। क्रोध, मान, माया, लोभ,

47:30शरीर का प्रेम, परिवार का प्रेम, अंदर चोर पड़ा है।

47:35प्रत्येक अंतर गुफा में जाज्वल्यमान है, ये तो नहीं मिलता है, हमारे नसीब में नहीं

47:40है। अगर नसीब होता तो एक को

47:41किसी और को देते। अगर नसीब होता तो एक को किसी और को देते नहीं कुछ। शास्त्र में आया

47:44है एक बात। कि इस जीव को इतनी तृष्णा है,

47:47कितना देखना है कि बे limit, limit नहीं है। कितना सुनना है कि कोई limit नहीं है।

47:53कितना खाना है कि कोई limit नहीं है, इच्छा रही, इच्छा का हेन नहीं है।

47:57लेकिन क्या करें नसीब में जितना है उतना मिलता है।

48:00अगर पूरे अगर खुल जावे ना बाप, तो ये दुनिया की जितनी संपत्ति है या जो कुछ भी है,

48:07ये किसी और को देगा नहीं अगर ताकत होती।

48:09पूरा अकेला ही हड़प लेगा। रेखा होती है। पूरा अकेला ही हड़प लेता है। इतनी अंदर में है

48:13तो भी भूखा का भूखा रहेगा। तो भी इच्छाओं का अंत होने वाला

48:18नहीं है। इच्छा रूपी समुद्र का अंत नहीं है।

48:23उसका कोई किनारा नहीं है, उसका कोई end नहीं है।

48:26ये धरती और आकाश मिलते हैं, कभी end होगा?

48:30लगते हैं कि मिले हुए हैं लेकिन मिले हुए हैं

48:33और आगे जाओ क्या होता है? और आगे चले जाओ, क्षितिज

48:36रेखा बोलते हैं इसको। चले हैं क्षितिज रेखा बोलते हैं

48:40वो मिले हुए लगते हैं लेकिन धरती और आकाश कभी मिलते नहीं हैं

48:45इसका end नहीं है endless है इसी प्रकार इच्छाओं का अंत नहीं है आशा रूपी खड्डा

48:51बाहर से कुछ लेने की जो इच्छा है कभी पूरा होने वाला नहीं है

48:57सुधार करते हुए अगर आपको उसको इच्छाओं को नाश करना है

49:03सुधार करना है तो कदाचित। तो कदाचित संभव।

49:08कदाचित माने क्या? 100% sure नहीं बोल सकते लेकिन शायद, कदाचित।

49:14श्राद्ध उत्पत्ति होना संभव है। माने क्या?

49:18श्राद्धोत्पत्ति माने क्या? श्रावक धर्म। नीचे अर्थ दिया है।

49:23श्राद्ध माने श्रावक धर्म। उत्पत्ति माने प्रगटता। ये श्राद्ध वगैरह करते हैं,

49:29पूजा पाठ करते हैं, अच्छा काम करते हैं। ये ये सज्जन... ये ये

49:34सज्जनों के श्रावकों के धर्म हैं। यहाँ श्राद्धोत्पति माने क्या सुधार शायद हो

49:40सकता है प्रभु भक्ति में लग सकते हो

49:42पूजा पाठ में लग सकते हो अपना कल्याण कर सकते हो। लेकिन वो chances हैं

49:48अगर सुधार करना चाहो तो। लेकिन उसके लिए क्या करना पड़ेगा?

49:55अगर अपने को मोह में नहीं फँसना है परिवार में रहते हुए भी।

49:59शरीर में रहते हुए भी अपने को मोह में नहीं फँसना है।

50:02जो गलतियाँ करते हैं, क्रोध, मान, माया, लोभ बढ़ाते हैं, अगर वो नहीं करना है,

50:07सुधर जाना है,

50:09तो हम सुधर सकते हैं। लेकिन इसके लिए क्या करना पड़ेगा? आप कोशिश करके देखो,

50:15शायद आपका कल्याण हो जाए।

50:18Guarantee नहीं है, क्यों guarantee नहीं है? कि ये जो बताए रास्ते हैं,

50:23वो चरणानियोग के हैं, द्रव्यानियोग के नहीं

50:26हैं। क्या? असल में जो मूल फायदा होता है... असल में जो

50:29मूल फायदा होता है वो अवलोकन से और वेद ज्ञान से होता है।

50:33और यहाँ पर जो कृपादेव ने जो बातें बताई हैं,

50:36उन्होंने अवलोकन की बात नहीं बताई,

50:39वेद ज्ञान की बात नहीं बताई। जो इलाज बताया है,

50:44क्रोध, मान, माया, लोभ को कम करने का इलाज बताया है, वो इलाज

50:50चरणान योग के हिसाब से बताया है।

50:52क्योंकि अभी आत्मा तो मिला नहीं था, तो द्रव्याण योग की बात कैसे

50:55करेंगे? अवलोकन भी 108 से शुरू होता है, 1... अवलोकन

50:59भी 108 से शुरू होता है, 103 number है ये। उनको वैराग्य था परिवार से,

51:04क्यों? कि जातिस्मरण ज्ञान में बहुत

51:05से परिवारों को छोड़ा था, 900 भवों

51:07का पूरा ज्ञान था। 900 भव जन्मे और मरे,

51:11सुधी, अलग-अलग वेश धारण किया, सब उनको पता था। तो वैराग्य बहुत था।

51:17और जिस कारण से शरीर मिलते गए,

51:20change होते गया, वो क्रोध, मान, माया लोग, वो भी पता चल गया। उनको छोड़ना भी है।

51:27लेकिन अंदर की line मिली नहीं थी अभी। इसीलिए अंदर की बात का उपाय नहीं बताए।

51:32यहाँ जो उपाय बताते हैं कृपावदेव, वो चरणवान योग की दृष्टि से बताए।

51:37कौन से उपाय बताते हैं?

51:41इसीलिए यहाँ, मतलब कुटुंब में रहते हुए

51:44आपको क्या करना है? 7 मुद्दे

51:51हैं। 7 मुद्दे का विचार करना है। सबसे पहले अल्पभाषी होना।

51:55ये ज़बान पे control पहले सबसे पहले कर लेना। ये ज़बान बहुत गड़बड़ करती है।

52:01तलवार नहीं काटती है लेकिन ज़बान का घाव तो

52:03ऐसा गहरा जाता है। कि जीव मरते दम तक नहीं भूलता। उसने मुझे ऐसा कहा था।

52:11खलास। बहुत कम

52:15बोलना। ज़बान पे

52:18control करना। अब ये control

52:20कर सकते हैं कि नहीं कर सकते दूसरी बात। नहीं कर सकते दूसरी बात है लेकिन control

52:25जिन्होंने control किया है उसको बहुत फायदा हुआ है

52:28जो कर सके हैं इसलिए कदाचित लिखा है ना सुधार करते हुए कदाचित साधोत्पत्ति

52:34होना संभव है कदाचित doubt है

52:38क्योंकि भूतकाल में भी उन्होंने ऐसा कुछ कोशिश किया होगा लेकिन संभव नहीं हुआ होगा

52:44लेकिन फिर भी the best बताते हैं best उपाय बताते हैं कि हम गलती करते हैं मुँह से

52:48नहीं। कि हम गलती करते हैं, मुँह से

52:50नहीं चाहते, अभी कुछ निकल जाता है ना, फिर गड़बड़ बढ़ जाती है। इसलिए क्या करना?

52:57मौन रहना नहीं है।

52:58मौन रहना अलग बात हो गई, इन्होंने क्या शब्द लिखा है?

53:01अल्पभाषी होना। मौन रहना तो व्यवहार कैसे करोगे?

53:05गलत तो अपने को है तो बोलना तो पड़ेगा। कि खाना दो,

53:08इतना तो बोलना पड़ेगा। कम बोलना। हाँ, कम बोलना। मौन रहना अलग।

53:12मौन रहना अलग हो गया। मौन रहना तो अंदर चलते रहता है। मौन तो reversible है। मौन तो

53:17impossible है। मुंदाना का साची। मौन तो

53:20impossible है। फिर अपने को गरज है तो

53:22क्या बोलना?

53:29सामने वाला

53:29क्या करता है

53:30अपने को बराबर तपाता है। समझता ही नहीं है आखिर बोलना पड़ता है।

53:35वो अपने को बुलाने के लिए समझता है फिर भी नहीं बोलता है कुछ भी नहीं करता

53:39है। बोलेगा आज उसको बुला के रखना है।

53:42क्या आग्रह हो जाता है। इससे better है कि आप दाल में नमक जितना

53:44बोलो ना। दाल में नमक जितना बोलो ना, जरूरत पड़े उतना अपना काम निकलवा लो।

53:49दूसरा ज्यादा रंजत नहीं करना, ज्यादा पंचायत discussion उसमें, guidance

53:51में... विचार खत्म करो।

53:54discussion खत्म करो। विचार नहीं मिलते हैं,

53:57discussion खत्म करो। और मेरे को topic पे

54:00बात नहीं करना, मेरे को दूसरा काम है। मालूम पड़ गया

54:06कि इसका इरादा क्या है,

54:08हमारा इरादा क्या है, matching नहीं हो

54:09रहा है, दोनों को विचार नहीं जुड़ना। No argument. तू तेरे हिसाब से... argument तू

54:14तेरे हिसाब से मैं मेरे हिसाब से

54:15argument नहीं बातचीत ही बात। उस विषय में बातचीत बाकी दूसरा विषय भी चालू रखो क्योंकि

54:22उसको भी गरज है और अपने को भी। महात्मा नहीं बन गए तो गरज तो अपने को भी

54:26है। इसलिए मौन नहीं होना है

54:28अल्पभासी होना है। ये first number है। दूसरा है अल्पहासी

54:33अपना time होता है कल ही देंगे।

54:36ये 7 मुद्दे हैं कल देंगे।

54:38बहुत important है। असल में आखिरी में उन्होंने लिया

54:40है अवलोकन भी। में आखिरी में उन्होंने लिया है अवलोकन भी

54:42लिया है लेकिन अलग ढंग से लिया है।

54:45क्योंकि

54:47वो अवलोकन 108 में चालू होने वाला है तो उसकी तैयारी अभी से ही होती

54:51है। बात तो एक ले लिया है।

54:53लेकिन ये मुद्दे German योग के हैं।

54:56जो अवलोकन कर सकता है उसके लिए बहुत easy है

54:58लेकिन जो अवलोकन नहीं कर सकता है उसके लिए easy

55:00नहीं है। लेकिन उसका चर्चा कल करेंगे। 7 point।