Shrimad Rajchandra Vachanamrut
Transcript
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Recitations restored to their canonical wording: Mangalacharan — Sarva Mangala Mangalyam, Namokar mantra.
0:12णमो अरिहंताणं णमो
0:14सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो
0:19उवज्झायाणं णमो लोए सव्व
0:22साहूणं अघनाशने,
0:28अघनाशने। णमो अरिहंताणं णमो
0:31सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व
0:36साहूणं अघनाशने। णमो अरिहंताणं
0:42णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं
0:45णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व
0:47साहूणं अघनाशने। णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं
0:54णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व साहूणं ... मुंगलं कुरु मा कुरु। मुंगलं कुरु कुरु
1:00कुरु। जयं कुरु कुरु कुरु। सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं
1:04सर्वकल्याणकारकम। प्रधानं सर्वधर्माणां जैनं जयति शासनम॥
1:10महत्। ॐ तत्सदिति वाक्यं तत्त्वेन तन्मयात्मना।
1:23श्रीमद राजचंद्र वचनामृत पत्र
1:27number 103 तेईस साल की उम्र और बम्बई से पत्र लिखा है।
1:38विषय है कि आत्मसाधना करने के लिए क्या करना चाहिए। बोले
1:45कुटुंब रूपी काजल की कोठरी में रहने से
1:51संसार बढ़ता है, संसार माने राग द्वेष। राग द्वेष माने बंधन।
1:58बंधन बढ़ता है।
2:00चाहे जितना उसका सुधार करे तो भी एकांत...
2:06एकांतवास से जिसका जितना संसार क्षय होने वाला है।
2:12उसका सवा हिस्सा भी उस काजल ग्रह में रहने से नहीं होने वाला
2:19है। एक दूसरे का ख्याल रखना
2:20पड़ता है, feelings का ख्याल रखना पड़ता है। साथ में रहना है, दोनों को गरज है।
2:26जितने भी साथ में रहते हैं सब तो एक दूसरे की गरज है।
2:30अकेले रह नहीं सकते इस दुनिया के अंदर और साथ में रहे तो... और
2:36साथ में रहे तो। नहीं चाहते हुए बहुत से मामले में अपना विचार नहीं मिलते।
2:40लेकिन रहना पड़ता
2:44है। एक tension एक बोझ है सर के ऊपर। निभाना पड़ता है कभी-कभी।
2:49बहुत सी चीजें तो निभाना पड़ता है।
2:52एकांतवास से जितना संसार क्षय होने वाला है।
2:57उसका 100वाँ हिस्सा भी
2:59उस काजल गृह में रहने से नहीं होने वाला है। वो कसाय का निमित्त है।
3:05कसाय कराने वाला नहीं है, कसाय का निमित्त है। परिवार में रहना
3:10ये कसाय का निमित्त है। मतलब उनके रहने संग मात्र से अपने में अपने आप
3:16बिना प्रयत्न क्रोध मान माया लोभ अपने आप पैदा हो जाते हैं। उसके contact में रहने से।
3:23अपने आप सब... कहाँ से हो गए पैदा?
3:28अगर पानी normal रहे तो
3:30कोई... अगर पानी normal रहे तो कोई पानी के रूप में रहेगा लेकिन ठंडी का संग करेगा तो,
3:34freezer में रखोगे तो, तो बर्फ बन जाएगा। उबालोगे तो, तो
3:39भाप बन जाएगा। अग्नि का संग करेगा,
3:42तो भाप बन जाता है। ठंडी का संग करेगा तो बर्फ बन जाता है। और normal condition में
3:49अपने प्रवाहिता में रहता है शीतल।
3:52इसी प्रकार से,
3:54अकेले रहते हैं तो कोई problem नहीं। गुरुदेव कहते थे
3:57एकड़े एकने बगड़े। गुरुदेव कहते थे एकड़े एक ने बगड़े। बे थया
4:00ते बगड़े। बगड़े बगड़े बिगड़ जाना।
4:05बगड़े बे दो हो गए तो खत्म।
4:08तो दो में से तीन होंगे तो 6 पाँव वाला होता है। दो
4:11बना तो जानवर बनता है इंसान में से।
4:15लड़का होता है तो 6 पाँव वाला हुआ। तो भमरा बन गया।
4:20फिर उसकी शादी की तो 8 पाँव वाला हुआ। तो
4:24क्या बना spider बन गया 8 पाँव वाला spider। Spider बन
4:28गया 8 pound वाला spider होता है। अपनी जाल खुद ही बनाता है और खुद ही फंसता है। खुद
4:33ही बाहर नहीं निकल पाता जाल में
4:34से। जितने steps बढ़ते हैं उतना परेशानी है।
4:39एकांतवास में जितना संसार क्षय होने वाला है उसका 100वाँ हिस्सा भी
4:45उस काजल ग्रह में रहने से नहीं होने वाला है। वो कषाय का निमित्त है।
4:52मोह के रहने का अनादिकालीन पर्व। के रहने का
4:55अनादिकालीन पर्वत है। जहां भी जाओगे तो शरीर मिलेगा,
4:59शरीर के पैदा करने वाले मां-बाप होंगे,
5:02परिवार होगा, सब में अपनापन होगा। जहां भी जाएंगे, अनंत जिंदगियां बीत चुकी वहां,
5:08अनंत बार जन्मे, अनंत बार मरे,
5:10और अनंत परिवार को छोड़ते आए।
5:14लेकिन जब-जब भी वहां contact में रहे तब-तब अपनापन से रहे।
5:20और गए दुखी होकर के रो-रो... और गए दुखी होकर के रो-रो के गए, वापस नए
5:24जगह पे गए, नया परिवार खड़ा हो
5:25गया। मतलब परिवार बदलते हैं,
5:32शरीर बदलता है, संयोग बदलते हैं, परिस्थितियां बदलती हैं, लेकिन मोह नहीं बदलता है।
5:40मोह intact रहता है। अपनापन, अपने को भूल करके दूसरों को अपना मानना,
5:46ममता करना,
5:47एकत्व करना, ये नहीं मिटता है। ये continuous... ये नहीं मिटता है। ये continuous है।
5:52और यही दुख का कारण है। Changes तो है लेकिन changes में हमारी आदत नहीं बदलती है।
5:58भ्रांति की आदत नहीं बदलती है।
6:02अनुभव से बहुत कुछ सीखने को होता है। बहुत कुछ हम
6:05feel करते हैं। अनुभव तो बहुत कुछ है।
6:08खास तौर पे सुख का नहीं तो भी दुख का तो अनुभव है। सभी को है।
6:14दुख का अनुभव कैसे होता है सबको पता है। लेकिन
6:17छोड़ना नहीं चाहता। लेकिन छोड़ना नहीं चाहता है। चाहता है शांति चाहिए।
6:23लेकिन दुख का अनुभव होने के
6:25बावजूद भी, वहाँ से हटना नहीं चाहता है। वहीं वहीं वहीं वहीं रहना है।
6:30ये क्या है? ये मोर
6:33है। ये शराबी को शराब की लत है। अफीम खाने वाले को अफीम खाए बिना चैन नहीं पड़ता है।
6:40Drugs के आदी हो जाते हैं तो उनको drugs नहीं लेंगे तो खलास। दम पछाड़ कर देते हैं।
6:46वैसे ये... कर देते हैं। वैसे ये जीव को पर पदार्थ के बिना नहीं चलता है।
6:50मालूम है सुख नहीं है, सुख बाहर से नहीं आने वाला है। लेकिन मालूम है तो क्या होगा?
6:57बीड़ी पीने वाले को मालूम है कि मेरा health खराब होता है। लेकिन क्या होता है?
7:02मालूम होने से क्या होता है? मालूम रहते हुए भी उल्टा चलना होवे।
7:09और स्वयं को ही नुकसान करे ऐसा कार्य करना होवे,
7:12उसका नाम ही मोह है। न जाने उस time में क्या होता है, अपना हित अहित भूल जाते हैं।
7:19क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, कैसा अच्छा लगता है, कैसा बुरा लगता है, वो
7:23सब उस वक्त भूल जाते हैं।
7:25उस वक्त तो ऐसे अपना भान भूल कर के ऐसे फंस जाते हैं।
7:32कि नहीं चाहते हुए भी गलत काम हो जाते हैं। इसका नाम ही मोह है।
7:38अपने अनुभव से हम नहीं सीखते। बहुत कुछ अनुभव है।
7:43जैसे-जैसे age बनती है वो ऐसे-ऐसे प्रसंग बढ़ते जाते हैं।
7:47और सब जगह से जूते खाता है ये जीव।
7:52क्या बाहर वाले ही दुखी करते हैं ऐसा नहीं है सबसे ज्यादा दुखी
7:55बाहर वाले नहीं करते हैं।
7:58सबसे ज्यादा दुखी कौन करता है जिसके contact में हम रहते हैं।
8:02जिससे हम ज्यादा राग करते हैं। वही सबसे ज्यादा हमको दुखी करता
8:07है क्योंकि वो जब नहीं मानता है ना तब हमको तकलीफ होती है। उनको तकलीफ होती है।
8:10जब उनके हमारे विचार नहीं मिलते ना तो बहुत तकलीफ होती
8:14है। पड़ोसी हमारी बात नहीं मानता है तो कोई problem नहीं, भई उसकी मर्जी है भई।
8:19नहीं माने तो नहीं माने। लेकिन अपने घरवाले अपनी बात नहीं माने तो बहुत tension आता
8:27है। जीना
8:28हराम हो जाता है, रात की नींद खराब हो जाती है। साथ में रहना
8:32नहीं है और रहना पड़ता है, ये मजबूरी भी हो,
8:35इसका preferring आता है, ये सब दुखों का अनुभव होता है। Life
8:40परिवार की जिंदगी ऐसी ही है और इस काल में तो खास तौर पे ऐसा है। ये
8:45कलयुग बोलते हैं सतयुग नहीं बोलते
8:47वेदांत की भाषा में। सबसे ज्यादा झगड़ा तो घर-घर में ही होता है।
8:53बाहर वाले से हम अच्छा रहेंगे हंस के बात करेंगे। लेकिन घर वाले से तो
8:57बात करना भी पसंद नहीं करेंगे। ये
9:00कलयुग में ऐसा ही होता है। बहुत झगड़ा पंचायत होता है। आग्रह इतने रहते
9:04हैं। आग्रह इतने रहते हैं, अपेक्षाएं इतनी रहती हैं।
9:08घरवाला है ना तो फिर हमारे को help करना ही चाहिए। नहीं करे तो घरवाला...
9:13घरवाला है ना अपने परिवार वाला है ना तो हमारे को ऐसा बोलना ही नहीं चाहिए।
9:18इसी प्रकार से बरतना चाहिए। इसी प्रकार से respect देना चाहिए।
9:21तमीज से बात करना चाहिए। शिष्टाचार, discipline...
9:27वो कितने-कितने लफड़े हैं। ठीक। वो
9:32हम पर अपेक्षा रह जाती है। और ये अपेक्षा के कारण
9:38जब पूरी नहीं होती है तो फिर
9:40हम दुखी होते हैं और दुख का आरोप अपना मोह पे नहीं लगाते हैं। हम मोह ही हैं,
9:45हमने अपेक्षा रखी, ऐसा नहीं लेकर के क्या करते हैं?
9:49तू जिम्मेदार है मुझे दुखी करने के लिए। बस कोई नहीं मिला तो वो मिलता
9:55है। और अगर जल वो एक पत्थर मारता है तो दो पत्थर हम भी मार सकते हैं।
9:59जब तक कलेजा में ठंडक नहीं पहुंचेंगे... हम तक नहीं पहुँचेंगे। वो
10:03एक बात सुनाएगा तो दो
10:04बात हम नहीं सुनाएंगे तब तक हमको शांति नहीं होगी। समझता क्या है अपने आप को?
10:09कि हमको नहीं मालूम पड़ता है क्या? ऐसा करके वो शुरू तो करता है।
10:12Tant की भाषा में सीधी तरीके से नहीं बोलता तो tant की भाषा में बोलता
10:16है। Direct नहीं बोल सकता। नाम लिए बिना बोलना होता है। Politician ऐसे ही करते हैं।
10:24गालियां जितनी चाहे दे लो लेकिन नाम नहीं लेना। उसने बोला हमने
10:27मुसलमान का नाम नहीं लिया speech के अंदर। Speech
10:31के अंदर। बाकी सब गालियां जितना देना था दे दिए। हमने कहा हमारी speech
10:34में बताओ कहां हमने मुसलमान
10:35का नाम लिया है किधर? नहीं लिया।
10:38ये काहे को हो गया? लेकिन सबको मालूम है कि कौन है। Target पे कौन है।
10:45बस नाम लिए बिना कुछ भी कर सकते हैं आप। और हिंदुस्तान में तो
10:48आजादी है speech की। कुछ भी करो।
10:51Prime Minister भी गाली दे दो
10:52कोई बात नहीं। कोई problem नहीं। बीमा बूमा ले आ दूसरे दिन। मेरा... मांग लेना दूसरे
10:57दिन। मेरा ऐसा कहने का इरादा नहीं था।
11:02क्या है सब माफ़? कब तक झगड़ा करोगे?
11:05झगड़ा करने वाले ही बेवकूफ। उसका रातों की नींद खराब हो
11:09जाती है। वो उबाला हो जाता है, पूरी दुनिया में
11:12आवाज़ गूंजती है। कि इसने Prime Minister को ऐसी गाली दी।
11:18माफ़ी मांगो, वो बोलता है माफ़ी मांगो।
11:21थोड़ा उबाला होने के बाद वो बोलता है कि
11:23मेरा कोई ऐसा कहने का इरादा नहीं था। अच्छा ध्यान दो।
11:25जादा नहीं अच्छा ध्यान दो खत्म करा मामले
11:28ऐसा ही होता है कुछ भी बोलना हो जाता है
11:34तो
11:35इसी प्रकार से घर में भी इसी प्रकार का वातावरण वो कसाय का निमित्त है
11:40और मोह के रहने का अनादि काल का पर्वत शरीर बदल जावे संयोग बदल जावे
11:45परिवार छूट जावे क्या
11:49लेकिन वो आड़त अपने को भूल करके दूसरों में अपनापन करना।
11:55दूसरों में अपनापन करना, उनसे अपेक्षाएं रखना,
11:59अपेक्षाएं पूरी होवे तो खुश हो
12:01जाना, अपेक्षाएं पूरी ना हो तो दुखी होकर के सर पीट लेना। ये जो आदत, वो अनादि काल की
12:07है। कब तक रहेगी?
12:10जब तक हमको हमारा
12:11स्वरूप का पता नहीं होगा तब तक रहेगी। अनादि काल का पर्वत।
12:17वह प्रत्येक अंतर गुफा में जाज्वल्यमान है।
12:22ऐसा... ऐसा मोह रूपी अंधेरा
12:24हर एक दिल के अंदर छाया हुआ है। कोई
12:26साफ सुथरा नहीं है। कौन पहला पत्थर मारेगा?
12:31सजा देने आया है ना, कौन पत्थर पहला मारेगा?
12:34जिसने आज तक अंश मात्र भी पाप नहीं किया हो, संपूर्ण नदी दोस्त हो, पत्थर मारो।
12:42इसने बहुत गलत काम किया है, सजा देना है, लेकिन कौन देगा सजा?
12:48क्या पापी पापी को सजा दे सकता है क्या? ये कहने का मतलब क्या है कि ये
12:53जो गलतियां हैं मोह की गलती,
12:56असाइन की गलती, इस दुनिया में कौन ऐसा है जो बिल्कुल safe है?
13:01जिसने एक भी गलती ना की हो? क्रोधमान मायालोभ ना हो कौन है?
13:08कोई भी तो नहीं है। प्रत्येक अंतर गुफा में जाज्वल्यमान। ऐसी स्थिति है
13:14इस दुनिया की और अपनी। अब ये स्थिति... अब ये स्थिति कब
13:19जब तक बने रहेगी जब तक क्या होगा? ये संसार की channel चलते रहेगी।
13:26Break नहीं होने वाली। पुराने कर्म आएंगे।
13:30हम राग द्वेष करके जोड़ेंगे, नए कर्म बांधेंगे,
13:35आपी सुचका नया भविष्य में आएगा।
13:38जब तक हम नहीं बदलेंगे तब तक हम चक्कर में रहेंगे। जिस दिन हम बदल गए अपने को...
13:46अपने को अपने स्वरूप का भान हो गया। उस दिन से channel कट जाती है।
13:53ये channel को काटना माने क्या?
13:56अपने original स्वरूप को माने परमात्मा का अनुभव करना।
14:01और जो गलती हमारे अनंत काल से करते आ रहे थे
14:03दूसरों को अपना मानने का, दूसरों से अपेक्षा रखने का,
14:07बाहर से सुख मिलेगा ऐसी भावना रखने का।
14:11उसको तोड़ देना हमेशा के लिए। डाली पत्तों को नहीं। दाली पत्तों को नहीं काटना।
14:16झाड़ के मूड़ को काट देना। दाली पत्ते को रहने दो कोई फर्क नहीं पड़ता है।
14:21वो अपने आप सूख जाएंगे। 15 दिन तक पानी नहीं मिलेगा।
14:27मूड़ कट गया है। क्या होगा अब दाली पत्तों का? वो अपने आप खत्म हो जाएंगे।
14:32इतनी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं।
14:35क्रोध को हटाओ, मान को हटाओ, माया को हटाओ,
14:38लोभ को हटाओ, हँसना नहीं,
14:40रोना नहीं, नींद नहीं लेना सब इतना... नींद नहीं लेना सब इतना
14:42लफड़ा करने की जरूरत नहीं है।
14:45क्या? अब अंदर में अपने परमात्मा का दर्शन करके
14:49मोह को जड़ मूल से काट देना, खत्म। मामला finish। नहीं अभी भी राग द्वेष हो रहा है ना?
14:56पहले में अब में फर्क है।
14:58अभी और साधना बढ़ाओ
14:59और फर्क बढ़ेगा। और अंतर्स्थिरता बढ़ेगी तो
15:05श्रावक धर्म आएगा।
15:06और अंतर्स्थिरता बढ़ेगी तो मुनि बन जाओगे। जितना
15:09अपने परमात्मा... जितना अपने परमात्मा से प्रेम करोगे
15:12उतनी परमात्मा की कृपा होते जाएगी।
15:16उतना उतना तेरे क्रोध, मन, माया लोभ अपने आप हटते जाएंगे। तुझे
15:19ये झाड़ू लगाने की कोई जरूरत नहीं
15:21है इतनी मेहनत करने की। परमात्मा को ये काम दे दो।
15:27तुम सिर्फ परमात्मा की भक्ति करो, प्रेम करो बस और कुछ मत करो।
15:32कैसे आएगी मुंडशा? ऐसे ही आएगी। कैसे बनेंगे भगवान?
15:35परमात्मा की कृपा होगी तो होगी। प्रभु आज्ञा है। कृपा हगी तो
15:40हगी प्रभु आज्ञाए थाशुं ए स्वरूप ए परम पद प्राप्तिनुं
15:44कर्युं भान ज्ञान धजा वगर ने हाल मनोरथ
15:52तो पण निश्चय राजचंद्र मनने रहे
15:57प्रभु आज्ञाए थाशुं ते ज
16:00प्रभु की कृपा हगी तो
16:02बन जायेंगे क्या नहीं बन सकता है प्रभु के दर्शन मात्र. प्रभु के दर्शन मात्र से
16:06अनंत काल से जो हम शरीर से मोह करते थे,
16:10वो खत्म हो गया।
16:11इतनी बड़ी कृपा हुई, जन्म मरण का अंत हो गया। 15 भव में मुक्ति होगी निश्चित हो गया।
16:17तो प्रभु की कृपा होगी तो क्या नहीं हो सकता? Possible है।
16:23सुधार करते हुए, अभी सुधार करना है तो क्या करना है? तो
16:26यहाँ कृपाण देव को स्वयं को नहीं मालूम था।
16:30कि अवलोकन और भेद ज्ञान क्योंकि अवलोकन 108 पत्र से शुरू होता है। वैरागी बहुत थे।
16:36क्योंकि उनको जातिस्मरण में मालूम था। बहुत से परिवारों को
16:41मोह करके फसे थे और हैरान हो करके राग द्वेष करके वापस नया जन्म वापस नया जन्म।
16:48ऐसा करते करते 900 भाव का उनको जातिस्मरण
16:53ज्ञान था। केवल 7 साल की उम्र में। इनको ये
16:56सब मालूम था इसलिए संसार में कहीं मज़ा नहीं आता।
17:00वो छूटना चाहते थे लेकिन देखो contract। होते थे लेकिन देखो contract छूट नहीं सकते थे
17:04शादी पहले ही हो गई
17:05थी छोटी उम्र में 23 साल की उम्र में वो business करते थे
17:13बम्बई में और बम्बई से ही पत्र लिखा है और बोझ महसूस करते थे
17:20जिस अनंत परिवारों को छोड़ के आए और राग द्वेष किए और दुखी हुए
17:25आज भी यही गलती दोबारा कर रहे हैं। बम्बई में क्यों बैठे हैं?
17:31किसके लिए बैठे हैं? खुद के लिए बैठे
17:35हैं? नहीं, 2 time की रोटी तो कहीं भी मिल जाती है। नहीं, परिवार के लिए चाहिए।
17:40इतना income बस नहीं होता है। ज्यादा कमाना है तो बम्बई में रहो। मां-बाप हैं,
17:47wife है, बच्चे हैं, सबका भोजन
17:50कैसे करेंगे? कैसे निकालेंगे? रहना पड़ता है बम्बई
17:54में। और अंदर से पूरा पता है कि ये परिवार मेरा नहीं है।
17:59कैसे पता है? आत्मज्ञान से नहीं।
18:02अभी आत्मज्ञान तो हुआ नहीं। पता कैसे है? जाति स्मरण ज्ञान में
18:07जो हमने भूतकाल में कई
18:09परिवार को छोड़ के आए। उसका एकदम clear cut मालूम पड़ता है। मेरा ये पहले घर वो था।
18:15पहले माँ-बाप वो थे, अब ये हैं।
18:18अब ये मेरी wife है, पहले वो
18:19थी। वो कहाँ चले गई नहीं मालूम। लेकिन पहले मैं इनके साथ था।
18:26इसके पहले मैं... उनके साथ था। इसके पहले मैं इनके साथ था। और हर वक्त हमने
18:32ऐसी ही गलती की थी। जिस समय जिस परिवार में रहे ना उसको ही सब कुछ मान करके।
18:38उसको गले लगा करके। पूरा dance कर लिया था राग बेसे।
18:43आज वापस सब छूट गए वो भी गए सहयोग भी कर गए।
18:46नहीं मिले लेकिन नहीं मिले तो भी वापस तो वही हो रहा है ना।
18:50गलती कहाँ सुधर रही है। अब क्या करें? तो अपने को जो ख्याल में था,
18:58जो भूतकाल में गलतियां की थी, उसको याद करते हुए या अपने अपने हिसाब से बताते हैं
19:05कि अब क्या करना चाहिए। परिवार में रहना है तो क्या करना, फंस तो गए
19:09हैं। वो छोड़ के भागना मुमकिन नहीं है।
19:12और contract के पहले आप छोड़ के भाग भी नहीं सकते।
19:16कहाँ जाओगे? यहाँ से भागोगे तो क्या?
19:19समझे जहर खा लिया चलो मान लो, क्या होगा? मान लो क्या होगा? The end सबन छूट गए
19:25दूसरा परिवार में जाओ। ये परिवार छोड़ेगा दूसरा मिलेगा। बच तो नहीं सकते आप।
19:32जो कर्म आपने किए हैं उसकी सजा तो आपको भोगनी है।
19:37नहीं बहुत तकलीफ होती है बहुत दुख होता है भाग जाना है यहाँ रहना नहीं है कहाँ जाओगे?
19:43किधर जाओगे घर छोड़ के किधर जाओगे? जब घर में
19:47अच्छा नहीं लगता है तो बाहर में अच्छा लगता है?
19:50घर में... अच्छा लगता है। घर में ₹10 की थाली होती है बाहर ₹40 है। क्या?
19:56घर में कोई भी काम तो हम आज़ादी से कर सकते हैं। बाहर में तो limitations हैं।
20:03वहाँ झाड़ू भी अपने को लगाना पड़ेगा। यहाँ तो कोई काम वाले वगैरह रहते हैं।
20:07बर्तन भी नहीं धोते चलता है पटक दो। उठाने की ज़रूरत नहीं।
20:10खाना भी जाने की ज़रूरत नहीं है वो खुद आकर के देके जाता है तब हम खाते हैं।
20:14Order से काम चलता है।
20:16बाहर order करके देखना है एक को भी भूनना हो।
20:18Order करके देखना है एक को भी बोलना हो order करना। इतनी सुविधा में घर के
20:22अंदर भी आजादी से रहते हो
20:24तो भी इतने दुखी महसूस करते हो।
20:27और फिर घर में नहीं रहना है। कि कहाँ भाग के जाना है कहाँ जाना है। कौन सगा वाला है।
20:34सगों के बीच अपनों को भी इसमें दुखी हो तो परायों के बीच में क्या हाल होगा।
20:39अभी सोचा है।
20:42घर में अगर हम बीमार पड़ेंगे तो समझो किसी को मालूम भी। किसी को मालूम भी पड़ेगा तो
20:47दया आएगी doctor के पास लेके जाएंगे
20:50लेकिन अकेले कहीं बाहर गए और बीमार पड़ गए तो कौन लेके जाएगा किसको फुर्सत है
20:56किसी को फुर्सत नहीं है
20:58सबको अपना अपना काम रहता है लेकिन नहीं वो
21:03इतना तकलीफ महसूस करते हैं ना घर के अंदर
21:08है ना नहीं इससे तो क्या फायदा क्या घर वाले रह कर के क्या फायदा ऐसा होता
21:13घर वाले अगर पराई। घरवाले अगर पराए जैसा व्यवहार करें
21:15तो फायदा क्या रहने का मतलब क्या साथ में काहे को रहना।
21:18ठीक है भैया तुम चले जाओ। फिर वो थोड़ा सोचता है तो अकल आ जाती है ठिकाने।
21:25कहाँ जाऊँगा? किधर जाऊँगा? किधर जाऊँगा?
21:30इससे ज्यादा सुविधा तो कहीं नहीं मिलूँगा। ये सुधार करते हुए
21:35कैसे सुधार करना ऐसी परिस्थिति के अंदर? ये घर-घर की कहानियाँ हैं। तो ऐसा रखना।
21:41खुले रखेंगे तो... ना। खुले रखेंगे तो बस problem हो जाएगा।
21:44पूरी पोल खुल जाएगी। बांधी मुट्ठी। कितना रुपया है भैया?
21:50तुम अंदाजा लगाओ कितने हो। कि बांध के रखा है तो। बांधी मुट्ठी लाख।
21:56खोल दी तो खाक। कुछ भी नहीं है अंदर। लेकिन ऐसा रखा है मेरे पास भी।
22:02मैं भी दांव लगा सकता हूँ। लेकिन वक्त आए पे लगाऊंगा। अभी मुट्ठी ऐसा बांध के रखता है।
22:08अच्छा तुम खेलो मेरी एक काम। तुम खेलो
22:10मेरी एकता। Right moment में मैं भी अपनी मुट्ठी खोल के
22:12दांव लगाऊंगा लेकिन मुट्ठी में भैया क्या है
22:14वो तो बताओ। कि नहीं वो secret है।
22:18खोलना नहीं खोले तो बहुत परेशानी है। इसमें इज्जत है कि नहीं कुछ होगा कुछ होगा।
22:25ऐसा करो। लेकिन असल में हकीकत में कुछ नहीं होता
22:31है ऐसा। खाली ढोल है। बड़ा अंदर पूरी पोल है। क्या? अंदर में देखें
22:34तो हालत बहुत खराब है।
22:36अंदर में देखे तो हालत बहुत खराब है।
22:40और क्यों ना हो, घर में ही ऐसे करके आए तो
22:42ऐसे ही होते हैं। जितने झगड़े बाहर वालों से नहीं होते हैं,
22:45उतने झगड़े रोज़ पल-पल में,
22:48any moment घर के अंदर हो सकते हैं।
22:52नहीं वो ऐसा बन ही नहीं सकता। मैं मानने को तैयार नहीं हूँ।
22:55इतने लोग बैठे हैं इसके परिवार में, कुछ भी तकलीफ ना हो, सास-बहू की ना हो,
22:59पति-पत्नी की ना हो, बेटे-बहू की ना हो, माँ-बेटे की ना हो, मैं मानने को तैयार नहीं
23:06हूँ। करने को तैयार हुई होता ही है 100% अब क्या करना उसकी बात
23:13अपने हिसाब से रास्ता बताते
23:19सुधार करते हुए कदाचित श्राद्ध उत्पत्ति होना संभव है
23:31सुधार कर सकते हैं मतलब दुख मिटा तो नहीं। कर सकते हैं मतलब दुख मिटा तो नहीं
23:36सकते। लेकिन दुख को कम ज़रूर कर सकते
23:39हैं। मिटाने के लिए तो वही है बाकी क्या?
23:42अवलोकन और वेद ज्ञान करके अपने
23:44स्वरूप का। ज्ञान करना और अपने परमात्मा के साथ रहना
23:48वही एक उपाय सच्चा है। सच्चा उपाय वो है permanent इलाज।
23:54इसमें क्या है? सुधार करते हुए कदाचित साद उत्पत्ति होना संभव है।
24:00मैं बताता हूँ रास्ते से कोशिश। मैं बताता हूँ रास्ते से कोशिश करो। अडाचित
24:06सुधार हो जाएगा मतलब क्या? कि दुख मिटेगा नहीं। लेकिन कम ज़रूर।
24:13Control थोड़ा बहुत तो आएगा। क्या करना उसके लिए? सबसे पहला point। इसीलिए
24:20परिवार में रहो लेकिन अल्पभाषी रहना।
24:24या बड़बड़ बड़बड़ बड़बड़ नहीं करना। नहीं बोलना। नहीं बोलना हो
24:30गड़बड़ है office। तो
24:32सबके नज़र में आ जाओगे कि ये
24:34तो बात ही नहीं करता है, कुछ इसके दिल में है।
24:36बात नहीं करना मतलब क्या? उसके दिल में कुछ खोट है, कालापन है, दाल में कुछ काला है।
24:42लेकिन बात करो, ज़रूरत जितना करो, कोई problem नहीं
24:46है। कि नहीं उसके मन में कुछ नहीं है, वो
24:47कम बोलता है इतना। जितना कम बोलोगे, इतने झगड़े कम, इतने विचारों के घर्षण कम।
24:54नहीं तो विचार में घर्षण होते हैं। नहीं विचारों के घर्षण... विचारों के घर्षण तो
24:58है, विचार कदी पुंस तो है।
25:01लेकिन बोलोगे नहीं तो कैसे मालूम पड़ेगा?
25:04बोलोगे तो मालूम पड़ेगा ना, बोलो ही मत। अपने काम की बात ले लो।
25:11सब पूर्ति बात करो। जरूरत अल्पभाषी।
25:14Minimum minimum अपना काम चले, routine work चले, खाना पीना रहना उठना बैठना होवे।
25:20अपना minimum minimum बात करो।
25:23अल्पभाषी हो जाओ। बातिएगा। देखते
25:24वक्त कोई topic की
25:27बात करें जरूरी है
00:25:31.1000 --> 00:25:35.902
बोलना। उस वक्त कहाँ life drop हुई या repetition नहीं होना, तो उसके पे
25:36क्या था? हम क्या करते
25:36हैं, हम हमारे... पता पड़ना पर late पता पड़ना। वो जागृति नहीं है इसलिए।
25:42हम अपने अनुभव से सीखते नहीं।
25:44अवलोकन करते-करते देखोगे तो आपको खुद को मालूम पड़ेगा कि कहाँ
25:48बात करते-करते कहाँ से turning point हुआ, बिगड़ना कहाँ से शुरू हुआ।
25:52मेरी beginning में तो ऐसा कुछ नहीं होता था। Very beginning में
25:55तो ऐसा कुछ नहीं होता है। थोड़ा आगे चलते-चलते
25:56कोई ऐसा मोड़ आ जाता है बातचीत का जो
25:58उसको सामने वाले को नहीं सुहाता। अवलोकन।
26:02तो अवलोकन से तो पता चल ही जाता है कि कहाँ turning point हुआ था।
26:06नहीं अपुन cricket match देखते हैं और match हार जाते हैं। फिर पूछते हैं
26:11कि match का turning point कौन सा था।
26:14कि 80 run बना के जब run out हुआ ना, running out हुआ।
26:19अगर ये out नहीं होता था ना, अपुन जीत जाते थे। अपन जीत जाते थे।
26:24क्या? पूरी picture जो है ना visualize करो।
26:28जो प्रसंग बन गया है, ये जूते तो खा लिया है। अब rewind करो।
26:34सूक्ष्म अवलोकन करो। मालूम पड़ेगा कहाँ हमने mistake कर ली थी। हाँ,
26:40अब दोबारा ध्यान रखना
26:41है। इस प्रकार की mistake दोबारा नहीं करना है। देखिए हमेशा स्मरण
26:46में बाद में मालूम पड़ने में तो फायदा नहीं। बाद में मालूम पड़ते हैं लेकिन... बाद में
26:51मालूम पड़ते हैं लेकिन बाद में इसीलिए मालूम करना है
26:53ताकि भविष्य में ऐसे प्रसंग बने तो
26:55हम पहले से ही सावधान रहें। फिर वापस ऐसे
26:57ही है कि बाद में मालूम पड़ता
27:03है। पर जब line चल रहा हो जब line कहाँ draw होती है वो... नहीं वो तो अवलोकन के बिना
27:07नहीं होता। अवलोकन से ही होता है। अवलोकन
27:10इसका original उपाय तो अवलोकन है बेद ज्ञान। लेकिन अवलोकन से बिल्कुल बंद नहीं
27:14होता control आ जाता। अवलोकन से पता
27:16पड़ जाता। पता पड़ जाता है। हाँ पता पड़ जाता है। काम miss करते हैं।
27:19बात करते करते ऐसी कौन सी बात हम बोल दिए कि सामने वाले को चुभ गई,
27:23तीर के जैसी चुभ गई। शुरू शुरू में वैसे मालूम पड़ेगा लेकिन बाद में तो क्या होएगा कि
27:28वो बोलने से पहले ही मालूम हो जाएगा कि ये बोलूंगा तो उसको पसंद नहीं
27:31आएगा फिर खत्म। तो वो बोलना कम होता
27:33है। अपने आप कम होता है क्योंकि वो मानने
27:34वाला नहीं, उसके विचार हमारे विचार नहीं मिलते।
27:38फिर बेकार का हम भी दुखी होवे वो भी दुखी होवे काहे के वास्ते ये सब। अल्पवासी बन जाओ।
27:44Time time काम निकाल लो
27:45बाकी छोड़ दो। Time to time काम निकाल लो बाकी छोड़। दूसरा क्या है कि हम
27:48discussion में सामने से जाते क्यों हैं?
27:50सामने वाला पूछेगा लेकिन हम discussion में क्यों जाते हैं?
27:52क्योंकि हमको एक अपना knowledge का
27:55प्रदर्शन करना होता है कि हम भी कुछ कम नहीं हैं भैया।
27:58हम भी कुछ जानते हैं।
27:59बोलिए। नहीं
28:16बेटा मैं और कुछ
28:17से बोलना चाह रहा
28:18हूँ। Generally argument का जो रूप आ जाता है मतलब ना ये कि
28:21अपनी बताना है ना ये कि जबरदस्ती बात करनी है। अपनी बात को defend करने
28:23के लिए या अपना explain करने के लिए।
28:25के लिए अपना explain करने के लिए लंबी
28:27बात हो जा रही है। हाँ वो
28:28दूसरा point आया सफाई
28:29वाला। सफाई सफाई देने का है। तो मेरे मन मेरा intention ऐसा नहीं था। क्या?
28:32आप गलत समझ लिए। आप भले ही गाली देना है तो दो लेकिन मेरे को गलत मत समझो कम से कम।
28:34इतना आग्रह क्यों? समझे तो वो दुखी
28:36होगा। आपको क्यों तकलीफ इतनी सारी? नहीं नहीं लेकिन
28:38अपना नाक कट जाती है अगर गलत समझे तो। Problem ये
28:41है। Problem यहाँ है। अपना ही गड़बड़ है। क्या करना फिर? Let go नहीं
28:45करो तो क्या करोगे बताइए? झगड़ा करोगे? दो में से एक बात करो। Let go करके शांति
28:49चाहते हो तो let go करो, नहीं चाहते हो तो फिर पत्थर मारो सर पे।
28:52तो आप मार सकते हो क्या?
28:53वो नहीं मार सकता है। सामने वाला जब अपने को देखते हैं, क्या कोई गलत समझता है तब, तब
28:58वो expect नहीं कर रहा है
28:59कि हम जाके या तो explanation दें, या
29:01तो उससे कुछ ना कुछ छिटकें हम करें। वो गलत समझता है। छेड़खानी हम करें। वो गलत
29:05समझता है उसका intention ही ये
29:07है कि वो आके हमको कुछ बोलना चाह
29:09रहा है। कोई जानबूझकर कोई गलत आरोप लगा देता है,
29:15अपने को छेड़खानी छेड़खानी करता है वो। और हम क्या करते हैं उसकी जाल में फंस जाते
29:20हैं, trap। हमारा intention ऐसा नहीं था,
29:23हमारा ऐसा कुछ बात करने का नहीं था, हमारे दिल में भी कुछ नहीं था।
29:26पर नहीं था तो तुम चुप से शांति से मजे से रहो ना।
29:31दिखाने की क्या जरूरत है?
29:32आप दुखी मत रहो, मजे में, वो
29:34कितनी भी गालियां देओ आप बिल्कुल मजे
29:36में रहो calm से। गलत। सामने वाला मतलब गलत अपने को समझता है। हाँ तो भी ये
29:42तो बहुत सीखने की बात है। ये बहुत practical बात है।
29:45कभी कभी expression दे दे तो सामने वाला शांत भी हो जाता है ऐसा
29:50भी होता है। ऐसा तो cases बहुत कम हैं।
29:51सामने वाले की नाप कट जाएगी। एक दफे गलत समझने के बाद फिर हम expression देवे
29:58और फिर वो reverse of माफी मांगे तो उसकी नाप कट जाएगी।
30:01नहीं लेकिन शांत हो जाता है माफी मांगे तो शांत तो ऐसे ही शांत हो जाएगा अब
30:04बुखार आएगा। हो जाएगा। अब बुखार
30:06आएगा। समझो। दो चार दिन रहेगा। नहीं दोगे
30:08दवा तो भी शांत हो जाने वाला। अगर सामने
30:10वाले में इतनी corona आती है और उसको अगर शांति करना है तो explanation से
30:14अच्छा अपने बर्ताव से उसको बताते हैं कि वो... मजे में रहो। हमको मान अपमान का मत रखो।
30:19कोई गलत समझे कोई सही समझे। हम मजे में रहो।
30:21अपनी मर्जी मजे को देख कर के वो हैरान हो जाएगा।
30:24वो अगर... बोले इसको कुछ भी नहीं... ज़्यादा मुझे तो
30:31लगता है सामने वाले को ज़्यादा तकलीफ हो
30:36जाएगी। नहीं इसका जो वैसे होने वाला है। अपुन
30:38मजे में रहो। गुरु जी, अपन मजे में रहना से वैसा है तो और
30:39ऐसा भी होता गुरु जी? देखो मैं बताता
30:40हूँ इसके अंदर क्या है राज। मजे में रहना दो
30:44तरीके का होता है। एक बार एक मजे में रहना क्या है कि वो
30:48गलत समझ रहा है, समझना
30:49तो समझ... मजे में रहना मतलब बाहर का प्रदर्शन नहीं बोलना चाहता।
30:52लेकिन अंदर में कुछ कषाय करने की जरूरत नहीं। शांत रहो आप। ये उदय आया है आने दो।
30:58गलत समझता है, समझने दो।
30:59अपन कोई बाहर में और रसगुल्ला खाने की जरूरत नहीं। और रसगुल्ला खाने
31:02की ज़रूरत नहीं उसके सामने उसके अग्नि में घी
31:05डालने की। ऐसा कोई ज़रूरत नहीं। 99% हम लोग ऐसे... अंदर में
31:08हिलचाल नहीं होना। अंदर में
31:09हिलचाल नहीं। सफाई means अपनी सफाई
31:11देना मतलब उसको repeat नहीं करना मतलब generally अपने
31:14repetition से सामने वाले को लगता है कि उसकी बात का असर नहीं
31:19हो रहा तो वो चिढ़ा।
31:23सामने वाला अपने लिए well wisher है।
31:26हाँ ठीक। ऐसा नहीं है कि वो ज़बरदस्ती
31:31अपने को torture करना चाहता है। ठीक। torture करना चाहता है। but
31:34अपनी आदत से repetition की
31:36आदत से या बात की सफाई
31:38देने की आदत से वहां तो वहां drop
31:39कैसे होना। main तो आप अवलोकन से ही सीखोगे ऐसा कि कहां-कहां आपकी
31:41गलती हुई, कहां-कहां वो hurt हुआ।
31:44और अगर अनजाने में उसको अपने से तकलीफ पहुंची है तो हम माफी मांगने में ना
31:51हिचकिचाएं, माफी मांग लें।
31:53हमारे तरफ से हम clear
31:54रहे, उसके तरफ से वो assumption कर-करके और नया-नया... Assumption कर कर के
31:58और नया नया नया नया खुद काम करके
32:01अपने को गलत समझ करके झूठा झूठा आरोप लगाता है, लगाने दो।
32:05उसका tension अपने को नहीं लेना। और एक बात इसमें ऐसा है
32:08कि कोई अगर अपने बारे में assume कर रहा है, जब तक सामने आकर उसने कुछ कहा नहीं,
32:13भले उसके behavior से कुछ हो,
32:15जब तक सामने आकर उसने table पे बैठ के बात नहीं की, तब
32:17तक हम लोग ऐसे क्यों assume करें कि वो
32:19हमारे बारे में कुछ assume कर रहा है? नहीं करना, क्योंकि हम हम पहल हम करेंगे फिर।
32:23इसका मतलब क्या हुआ? कुछ होने के पहले हम
32:25start... कुछ होने के पहले हम start करते हैं। हम
32:26अगर assume करते हैं तो हमारा behavior तो खराब हो जाएगा। हमारी गलती है।
32:32किसी के बारे में और जब तक क्या होता है अपेक्षा रहती है तब ऐसे सब problem होते
32:37हैं। अपेक्षा नहीं रहेगी।
32:39तो ऐसे कोई problem नहीं होती। दूसरा अच्छा हो चाहे बुरा हो हम मजे में रह सकते हैं।
32:44अगर हम attachment में नहीं हैं तो।
32:46हम attachment में हैं तो problem है अपेक्षा है तो problem है। कि
32:56सामने वाला अपनी एक बार सफाई देके सामने वाला कुछ भी समझो एक बार उसको बोलने दो। समझो
33:00एक बार उसको बोलने दो और... उसमें तो अपना मान
33:02आ जाता है कि एक बार अपने हिसाब से clear कर दो माने
33:03नहीं माने। एक बार में... हम तो clear हो गए ना। मतलब अपनी नाक तो ऊंची रह
33:07गई ना मियाँ गिरे तो भी
33:08तंगड़ी ऊंची। ये अपना मान है। इसके सामने
33:10वाले को आदत भी हो जाती है कि वो हर
33:12time चाहेगा कि हम उनको... हर वक्त सफाई देना फिर। पर अपने से मुझे कोई
33:15cross question पूछे तो अपने को एक बार तो बोलना ही होगा फिर। प्रसंग
33:19आप देखो... प्रसंग आप देखो
33:22अगर exact प्रसंग होगा तो मैं आपको रास्ता बता सकता हूँ। कि ऐसा ऐसा exact बना था
33:27फिर मैं आपको रास्ता बता सकता हूँ। क्योंकि प्रसंग के हिसाब से changes करना रहता है।
33:32जो जो प्रसंग जैसे जैसे situation रहती है वैसे changes करना रहता है।
33:36उसके अपने संबंध कैसे हैं उसका अपना status कैसा है।
33:40कैसा कैसा status है कैसा कैसी बातें बनी है उस time में कैसे changes करना है।
33:45वो अगर clear होवे तो कुछ perfect guidance बनता है।
33:49अभी general में तो ये बात है। अभी general में तो ये बात। खुद की
33:51इसमें point निकल रहा है ना कि
33:56खुद की आदत है। ये तो 100% है। देखो ताली एक हाथ से नहीं बजती। ताली दो हाथ से बजती।
34:01कुछ भी हुआ है गड़बड़।
34:04तो जैसे हम उसके दुख में निमित्त बने हैं वैसे वो भी हमारे दुख में निमित्त बने हैं।
34:08एक दूसरे को परस्पर ऐसा संबंध हुआ है तभी तो हुआ है। अकेले कैसे ताली बजेगी?
34:14ये तो possible नहीं है। तो ये यहाँ पर general... तो ये यहाँ पर general laws हैं।
34:20कि general laws में सबसे पहले अल्पभाषी बनना।
34:22अपने पंडिताई का अपने knowledge का प्रदर्शन नहीं करना। कम बोलना।
34:28लेकिन ज्यादा लगाव किसी पे नहीं रखना। लेकिन अपने वाले
34:32हैं ना, घर में चुपचाप रहे तो क्या फायदा? घर में किसी से बातचीत नहीं तो
34:36वो भी अच्छा नहीं लगेगा। कम बोलना।
34:40आजकल आप बहुत ज्यादा नहीं बोलते हो ये भी तकलीफ होता है। लेकिन वो
34:43वो तकलीफ change करना सही है।
34:45कम बोल करके। सही है कम बोल करके। लेकिन ज्यादा बोल करके
34:48फिर आग में घी डालते जाना ये बहुत खतरनाक है।
34:51इससे better है कि हम कम ही बोलें और अल्पभाषी हो जाएं।
34:55दूसरा point है अल्पहासी बनना। मतलब नहीं हँसना ऐसा नहीं।
35:01प्रसंग आया तो हँसना भी।
35:03लेकिन minimize। ये हँसना माने उसको सांस दिया जैसा। किसी की film उतारी
35:10तो हँसना होता है। लेकिन उसका control रहना चाहिए। ज़्यादा हँसोगे तो वो
35:16मित्रता हो जाएगी। एक दूसरे को support किए ऐसा हो गया हँसने में। समझो
35:20third party कोई गिर गया और हम हँसने लगे एक
35:23देख करके। दूसरा उसके साथ पी रहा है। या कोई joke सुना। या mimicry होती है।
35:30तो एक आदमी mimicry करके हँसता है। क्योंकि किसी की film उतारता
35:34है। लालू प्रसाद यादव की नहीं उतारता है वो। कौन
35:37उतारता है? शेखर सुमन। शेखर सुमन। और हमको मज़ा आती है।
35:40वाजपेयी की उतारता है, सबकी उतारता है। राजपा की उतारता है सबकी उतारता है।
35:43और हम लोग हँसते हैं
35:44तो सब हँसने वाले फिर क्या होते हैं?
35:46उसका एक group होता है। जो उनके बीच में आपस का प्रेम बढ़ता है, प्रेम माने राग।
35:52प्रेम नहीं बढ़ता है राग बढ़ता है। ये खतरनाक है।
35:57वो उसकी अपेक्षाएँ बढ़ेंगी तेरे अपने से। कि जब जब भी वो बोलेगा
36:01तब तब वो अपुन अगर नहीं हँसे तो उसको problem हो जाएगी। हँसते हँसते जिस
36:04दिन अपुन नहीं हँसे ना। कोई
36:05job के ऊपर दोबारा नहीं हँसे तो
36:06उसको problem हो जाएगी। नहीं हंस सकता कोई problem
36:08हो जाए। परेशानी होती है इसलिए नहीं हंसना ऐसा भी नहीं।
36:14लेकिन control में रहना चाहिए। ताकि
36:17कोई जरूरी नहीं है कि वो हर वक्त mimicry करे और हम हंसे ही ऐसा कोई जरूरी नहीं
36:21है। मतलब हर वक्त हम सामने वाले को साथ देंगे ऐसा कोई जरूरी नहीं
36:25है। हर वक्त उसकी हर बात में शामिल होंगे ऐसा कोई जरूरत नहीं
36:30है। इतना अपने आप को control रखना।
36:32अल्पहासी होना। तो आप धारावाहिक में बोले थे लेकिन ऐसे हंसते
36:39हैं। हँसना है लेकिन अपने स्थान में से। हटना ना जाए।
36:45वो वो ध्यान में रखना। अल्प हासी होना। तीसरा
36:48अल्प परिचयी होना। एक दूसरे की आदत, एक दूसरे के स्वभाव को जानना।
36:56उसका ख्याल रखना, उसको क्या पसंद आता है वो ख्याल रखना।
37:00उसको कैसी situation अच्छी लगती है। एक दूसरे के
37:04behavior का, वर्तन का... का, वर्तन का, उनके स्वभाव का, सबका ख्याल रखना।
37:10कैसे-कैसे प्रसंग में कैसा-कैसा उसका reaction change होते हैं।
37:13जितना हम परिचय बढ़ाते हैं,
37:15तो हम ही ज्यादा दुखी होते हैं क्योंकि फिर हमको ज्यादा संभालना पड़ता है।
37:19परिचय किया मतलब आप knowledge में आ गए।
37:22अब knowledge में आने के बाद आप गलत नहीं कर सकते, फिर आपको
37:24ज्यादा सावधान रहना है। Better है कि आप परिचय ही मत लो।
37:28ज्यादा मेलजोल में मत बनो।
37:30एक दूसरे के करीब इतने मत आ जाओ। इतने contact में मत रहो। इतने contact में ना
37:34रहें। रहते हैं परिवार में ही
37:35साथ में ही रहते हैं लेकिन अल्प परिचय।
37:37उसको जो लगे वो करे हमको जो लगे हम करें।
37:40ज्यादा परिचय में नहीं आएं। एक दूसरे के स्वभाव के या व्यवहार से बहुत परिचय ना हो।
37:46ऐसा करें अल्प परिचय में आएं। तो
37:49जिम्मेदारी बहुत कम हो जाएगी। अपेक्षाएं बहुत कम हो
37:52जाएंगी। कौन क्या करता है हमको नहीं मालूम। घर में रहते हैं
37:56लेकिन हमको नहीं मालूम। कि सौगानी जी लिखते थे कि मेरे को कोई घर में आ करके
38:01घुस के... घुस के चोरी करके जावे तो ये मुझे पता नहीं चलता। मतलब क्या?
38:08कि वो अपने में इतने रहते थे ये।
38:11और बच्चे कैसे बड़े हुए, कैसे पढ़े हुए,
38:14कौन से school में पढ़ते हैं, कौन से standard में पढ़ते हैं, उनके
38:18दोस्त का नाम क्या है, हमको कोई पता नहीं। जितने महापुरुष होते हैं,
38:25उनको करीब-करीब यही हाल होता है। ये सौगानी जी के हाल है। इतना ही
38:28नहीं, जिस गांव में रहते हैं... इतना नहीं जिस गाँव में रहते हैं
38:31उसमें उन्होंने लिखा है अपने बारे में।
38:33कि Kolkata में रहता था तो Kolkata में अमुक कुछ area है।
38:38उतने ही रास्ते मुझे मालूम इससे ज्यादा मुझे पता नहीं क्या।
38:45कुछ पता नहीं। ये Arvind भाई को पूछा था बहुत से question किए थे तो।
38:50मालूम पड़ा कि आप नहीं मिलते हो इतना नहीं मालूम। मेरे को
38:53बोरीवली से आगे कुछ पता नहीं।
38:56पागला में क्या है कांदीवली कितना है। गाँगा में क्या है कांदी वाली कितना है क्या
39:02है हमको पता है। इसलिए ऐसे लोगों को कोई काम नहीं देना नहीं कोई भी। हमने काम दिया तो
39:06पछताए। ऐसे लोगों को काम देना
39:07नहीं। क्यों? काम पूरा नहीं होवेगा कभी। उनको
39:12बोले बाजू में ही है railway station से आप 5 minute में आ जाओगे।
39:16लेकिन वो 5 minute चलेंगे नहीं पैसा नहीं होंगे तो भी
39:19taxi से आएंगे क्योंकि पता नहीं है अपने को taxi वाला
39:22ढूँढ लेगा मेरे को पहुँचा देगा। taxi
39:25का ₹15 खर्च कर दो। Taxi का ₹15 खर्च कर। पैदल जा
39:28सकते हैं लेकिन नहीं होता है क्यों? मालूम नहीं
39:31है। कुछ मालूम नहीं है बस। माने अपने ही अपने area के जितना ही मालूम बाकी कुछ मालूम
39:39नहीं। अरुण भाई की ऐसी स्थिति है। पहला मैं आने को बोले तो
39:43मेरे को नहीं मालूम West में कि East
39:45में कि किधर क्या कुछ पता नहीं। गोरी वाली तीन मुर्दी का
39:49मुझे पता नहीं है गोरी वाली में रहते हो
39:51लेकिन वो वो side है ना। हम तो West में रहते हैं। हम तो West में रहते हैं वो
39:54वो side हमको पता नहीं। ऐसे
40:00बनता है इस चीज़ का कि पता कुछ भी नहीं रहता है कि कैसे जाना है क्या करना
40:04है क्या। सौगानी जी को ऐसा था कि हमको खास
40:08जो बहुत ज़रूरत है उतना ही area का पता है इसके
40:11आगे हमको कुछ पता नहीं है। पता रहने के बाद भी ऐसा छुपाने का भी रहता है कि thank
40:16you so much। वो अलग बात हो गई। वो तो अपना प्रयोजन नहीं होता है
40:20और सर पे कोई ना आवे वो। और सर पे कोई ना आवे वो उसका प्रयोजन अलग है।
40:23ध्यान की निर्मलता। यहाँ तो राग द्वेष से बचना
40:26है। हाँ
40:27extra बोझ से बचना है। नहीं यहाँ तो complete absent mindedness जैसे हो गया मैं
40:32ध्यान ही नहीं रख रहा
40:33बस। एक ही जगह ध्यान। तो अल्प
40:35परिचय परिचय नहीं बढ़ाना। राग द्वेष कम होने
40:38के लिए जो सूत्र है अल्पभाषी होना। अल्पहासी होना। अल्पपरिचयी। लेकिन
40:42हम परिवार में रहते हैं तो कैसे
40:43अल्पपरिचयी हो? सबके
40:50साथ में... सबके साथ में रहते हैं हमारे साथ में रहते हैं और सबको
40:53आज़ादी चाहिए जैसे हमको आज़ादी चाहिए वैसे सबको चाहिए।
40:56और राग द्वेष में रहेंगे तो हम आज़ादी में नहीं रह पाएंगे। इसीलिए
41:01better है कि हम दूर-दूर रहें घर में रहते हुए भी एक दूसरे की आज़ादी को
41:08touch नहीं करें, परेशान नहीं करें।
41:10ऐसा रहे। दीदी सामने वाला भी समझ ना पाए एक समझे तो। सामने वाला अपने आप
41:15समझ जाएगा तो फिर वो अपने आप...
41:16ऐसा होता है ना सामने वाला... अपने से आप... सामने वाला अपने आधा हिस्सा
41:19निकाल लेगा, उसमें क्या... इसमें पूर्व कर्म का, पूर्व कर्म का role तो जबरदस्त है।
41:22वो तो है ही। इसीलिए उन्होंने क्या कह दिया है?
41:26कि सुधार करते हुए कदाचित श्राद्धोत्पत्ति होना संभव है।
41:31आप अपनी तरफ से कोशिश करके देखो, शायद minimize हो जाए।
41:35बाकी पूर्व कर्म से तो कोई बच नहीं सकता। पूर्व के contract है तो आप बिल्कुल
41:41side में रखो, आँख बंद करके, कान बंद करके तो भी जूते पड़ेंगे ही। क्या?
41:45क्या? क्योंकि contract कैसे करके आए?
41:50मच्छर को थोड़ा मालूम है कहाँ पे आप कोने में बैठे हो।
41:52वो आके नाक पे नाक पे कैसे बैठता है?
41:55और हैरान कितना करता है, हटाते ही वापस आ जाता है।
41:59उसको क्या मालूम? वो जानता थोड़ा है कि आप देवचंद भाई
42:04हो और देवचंद भाई को हैरान करना है। इतना knowledge उसको नहीं है। ये क्या
42:08चीज़ है? वो तो किधर भी
42:11आप कोने में जाके पाताल में, सातवें पाताल में... जाके पाताल में
42:13सातवें पाताल में छुप जाओगे ना।
42:16आपके किए हुए कर्म आपके पीछे पीछे आकर के
42:19आपको वहां से भी उठा लेंगे। वो बात अलग बात है। बाकी ये तो
42:24जितना बचने की बात अपने ढंग से बताते हैं वो बात।
42:29कोशिश करके देखो अल्प परिचयी होना ये 3 point हो गए। चौथा
42:34अल्प सहकारी होना। ये राग बढ़ाने
42:37में बहुत important factor है।
42:39जरा please मेरे लिए दवा लेके आना नहीं मेरे को काम नहीं। दवा लेके आना।
42:41नहीं मेरे को काम नहीं है। मेरे को काम है मैं नहीं जा सकता।
42:46क्या? दोबारा वो काम बोलेगा भी नहीं। एक दो बार तीन चार बार ऐसा हुआ बाद में वो
42:50काम नहीं बोलता। जरा ये जाके थाक भाजी लेके आना।
42:54नहीं मेरे को काम है इधर मैं नहीं करता। क्या होता है? ये attachment छूट जाता है।
43:01हम नौकर को हम बोल सकते
43:02हैं 10 बार ऊपर नीचे कह सकते हैं लेकिन अपने घर में किसी को अपुन नहीं बोल सकते।
43:07दूसरों को बोल सकते हैं लेकिन अपने घर में नहीं बोल सकते।
43:10ये सहकार
43:11नहीं देना। हम्म।
43:18करना परेशानी
43:19है। हाँ करना परेशानी है, कौन बोला नहीं?
43:22क्योंकि जितना करोगे, जितना जाओगे बाहर, उतने फसोगे अपने। अपने अंदर का काम कब करोगे?
43:28सबसे बड़ी बात तो अपने अंदर का काम करना है।
43:31जितना बाहर का ध्यान रखोगे, इतना अंदर का कटिंग होगा ही होगा। तो ये अल्प सहकारी होना।
43:37मंडल में joint होना, kitty parties,
43:40एक दूसरे के साथ में, combine में सब efforts करना।
43:43combine में ticket लेने को जाना, फिर एक... अब
43:46मैं नहीं आता हूँ cancel करना, तो अभी combine में जाना।
43:49और combine वाले को बहुत मज़ा आता है,
43:51आप हमारा ticket निकलवा लो। 4 दिन के बाद हमारे लिए cancel करा देना। क्या?
43:54combine में है तो सब पंचायत नहीं है कुछ इसी
43:58प्रकार। खाना भी combine में है, सब combine में,
44:03जाना आना combine में, खर्चा बहुत कम लगता है, लोग हमको...
44:06इनमें खर्चा बहुत कम
44:07लगता है लोग हमको आश्चर्य करते हैं ₹1500 में trip 10 दिन का? कैसे हो
44:10सकता है? 10 दिन में सिर्फ ₹1500? अब ये
44:15लोग बढ़ाने वाले हैं बढ़ाने वाले मतलब क्या?
44:19कि ₹1500 इतना कम है कि
44:20हमको ₹2500 खर्च करने को तैयार हैं तो AC की ticket निकालो ना आप। लोग ऐसे बोलते
44:26हैं। कि हम ₹1000 ज्यादा देने को तैयार हैं। इतना कम खर्च में trip करेंगे तो
44:30लोग हँसते हैं। ₹2500 ₹3000 हुआ तो जरा कुछ
44:32trip करके आए ऐसा लगता है। तो ज़रा कुछ करके आए ऐसा लगता है।
44:35मतलब रुपये की value ख़त्म हो गई
44:38है। क्या ₹1500 के अलावा ₹5 लगता है ₹1500? ₹5 में 10 दिन जाके
44:44आए ऐसा लगता है। अभी
44:45AC का ticket बढ़ाओ थोड़ा standard बढ़ाओ।
44:47Double फ़ायदा है। खर्चा भी बढ़ जाएगा कोई status बनेगा अपना।
44:52और AC की मज़ा भी मिलेगी। और साथ में भी रहना होगा। देखो कैसी बात है।
44:59ये सहकारी बनना।
45:01अल्प सहकारी होना। एक दूसरे को support कम करना। आप जा रहे हो ना साग भाजी तो
45:07मेरा भी थोड़ा साग भाजी लेके आना साथ।
45:09अच्छा आप साग भाजी लेने जा रहे हो तो मैं भी चलती हूँ आपके साथ में।
45:13एक ही auto में दोनों का काम हो जाएगा। share sharing sharing।
45:18फिर क्या एक दूसरे की अपेक्षा राग बढ़ता है।
45:22और राग जितना बढ़ता है वो सब द्वेष में परिवर्तित होने में देर नहीं लगती।
45:28contract खत्म हुआ और राग खत्म हुआ। हुआ और आग खत्म हुआ और फिर तो
45:31पहले तो रोज हमारे घर में इतना आते थे जाते थे इतना वो था ये था
45:35अब तो मुँह फिरा लेते हैं बात नहीं करते हैं वो नहीं करते हैं
45:39जिंदगी भर का द्वेष हो जाएगा जिंदगी भर
45:44इसीलिए अल्प सहकारी होना आगे अल्प भावना बताना
45:52कोई अपनी बात करे तो उसमें शामिल होना हाँ
45:54ये ठीक है ये बात ठीक है लेकिन ये
45:56बात मुझे अच्छी नहीं लगी
45:57पहले। ये बात मुझे अच्छी नहीं लगी। मतलब negative positive अपने
46:00विचार... दिखाते रहना उसे।
46:04कि ये मेरा भी ऐसा एक प्रसंग बना था करके अपुन उसको...
46:07join करते हैं और उसकी भावना को...
46:10develop करते हैं, मजबूत करते हैं। या फिर
46:13उसके against में भी हम कुछ अपना point बताते हैं।
46:16मतलब भावना अपना अपने मन की बात हम उस प्रसंग को लेकर के बताते हैं।
46:22जैसे America का एक प्रसंग बन गया। तो हम सब अपनी अपनी भावना बताते हैं।
46:28तो सब अपनी अपनी भावना बताते। Pakistan में
46:31ऐसा हुआ तो उसकी उसकी अपनी
46:33अपनी भावना बताते। ऐसे कोई प्रसंग बनता है तो अपनी अपनी भावना बताते। BJP वाले
46:36अच्छा कर रहे हैं BJP
46:37वाले अच्छा नहीं कर रहे। चर्चा चलती है।
46:40ये चर्चा वालों ने नखोद कर लिया है।
46:42वो है Punjab वालों ने तो बहुत गड़बड़ किया है exit poll की वजह से हम हार गए।
46:46ऐसा बोल दिए उन्होंने। क्योंकि ये सब भावना बताते हैं ना advance में।
46:51फिर बोलने वाले को मौका मिल जाता है हम क्यों गिरे
46:54क्योंकि exit... मौका मिल जाता हम क्यों गिरे क्योंकि exit
46:56poll था। exit poll में हमको zero mark आया तो फिर हम हार ही जाते ना।
46:59इसलिए सब ये बंद कर दो। अब आगे से कोई सर्वेक्षण नहीं करना किसी का। बंद करो।
47:06भावना कम से कम बताना। अच्छा किए बुरा साड़ी लेके आया अच्छी कैसी लगी?
47:15क्या? भावना अच्छी है तो खलास फिर मर गए। बुरी कहे तो तो खलास। तो तो आप समझ लो।
47:23फिर आपको 10 बार सुनना पड़ेगा
47:24कि आपकी साड़ी अच्छी नहीं है। आप किसी को बुरा बोले तो वो आपको बुरा बोलेंगे।
47:29मौका देखेंगे कि मैंने मैं साड़ी लेके आया तो बुरा बोले। अब आने दो मेरे
47:34क्या जूते लेके आया है देख के। ऐसे शुरू होता है। कुछ crossing होता है।
47:40और support करे तो खला।
47:43support करे तो वो चिपक जाएंगे।
47:45फिर आप हमको दिला देना ऐसी साड़ी है।
47:51आपकी choice भाई 6 है। choice अच्छी है। जो है सही है
47:56कर सकता था। जी चुप रहे कोई बोलता है appreciate
47:59नहीं किया। नहीं किए। लेकिन वो अच्छा है। वो अच्छा है क्योंकि दूर रहेंगे ना। लेकिन ये
48:03साथ में रहने का जो दुख है बहुत बड़ा ज्यादा दुख है। ये ऊपर बता दिया है
48:06कि परिवार में joint रहते हैं
48:07तो तकलीफ ज्यादा है। अकेले रहने से
48:09तकलीफ कम है। अपनी साधना करने के लिए समय
48:11चाहिए वो कैसे करोगे? कैसे निकालोगे समय? अकेले रहोगे तो निकालोगे।
48:16अल्प भावना बताना। अल्प सहचारी होना।
48:22अल्प सहचारी आ गए ना आगे और आगे दूसरा शब्द
48:25है। अल्प सत्कारि होना। सत्कार देना,
48:27welcome। ये शिष्टाचार की भाषा में कोई आया तो welcome welcome आओ आओ,
48:32पानी का गिलास, बैठो, खाना खिलाओ,
48:34चाय पानी, तबीयत का पूछो, ये सब क्या है? उसको सम्मान दिया गया, सत्कार किया।
48:41योग्य
48:42अपने status के हिसाब से सत्कार
48:44किया। तो ज्यादा चिपकेगा। ज़्यादा चिपकेगा वो। इसलिए सत्कार भी limit में ही करना है।
48:52अभी आजकल तो ऐसे कम ही हो गया है आना जाना, मिलना जुलना।
48:56और इसलिए party वगैरह में कभी जाते हैं
48:58वो अलग बात है कोई kitty party, birthday party ऐसा।
49:01बाकी generally लोग एक दूसरे को खबर अंतर पूछना है, मिलना जुलना है वो तो
49:04बंद हो गया है। नहीं तो
49:05यात्रा से जाना जाके आते हैं ना तो
49:07सब लोग मिलने को आते हैं, यात्रा से आ गए।
49:10आने लेके आते हैं सर फोड़ने के लिए। पहले ज़माने में ऐसा चलता था।
49:15या कोई बीमार है मालूम पड़ा तो पूरे
49:16गाँव में बात फैलती है फिर एक-एक करके आते रहता है।
49:19सुबह दोपहर शाम आते रहते हैं।
49:21कैसी है तबीयत अब? नहीं अभी वो सब गया ज़माना अभी अभी कोई पूछता नहीं
49:26है। आप जियो मरो आपका वो अर्थी निकले तब बोलना ना।
49:29तब थोड़ी देर मुँह दिखाने के लिए आए थे बाकी कुछ नहीं। अब hospital में भी लोग नहीं
49:34आते हैं क्यों? disturb नहीं करना।
49:37patient को। और डॉक्टरों ने भी ताला मार देते हैं बाहर। मिलने का नहीं है। आजकल
49:44इतना मिलना जुलना कम हो गया है, सत्कार भी कम हो गया है, प्रेम भावना भी कम हो गई
49:49है। ये cutting होते गया है। पहले संयुक्त परिवार का जो मज़ा था अब विभक्त
49:55होते जाते हैं। लोग अपना अपना अपना वाला हम दो हमारे दो बाकी सबको
50:00वृद्धाश्रम में भेज दो अब ये जमाना है आज का।
50:05अलग रहना चाहते हैं सब। अब एक
50:07माँ बाप 4 बच्चों को संभाल सकते हैं। आप 4 बच्चों को संभाल सकते हैं।
50:11लेकिन एक 4 लड़के मिलकर के
50:14माँ-बाप को नहीं संभाल सकते। ये जमाना इस प्रकार का चल रहा है।
50:18कहने का मतलब सत्कार कम करना। सत्कार से मेलजोल बढ़ता है।
50:24सबको मान चाहिए और अगर आप मान दोगे तो वो ज्यादा चिपेगा।
50:28और मान नहीं दोगे तो आप अपना दूरी बना के रखोगे, दूरी बना के रखना बहुत जरूरी
50:36है। अल्प गुरु होना।
50:38सलाह बात बात में सलाह। उसने पूछता नहीं है फिर भी सलाह देते हैं।
50:44ऐसा ऐसा हो गया वैसा वैसा। ऐसा तो भई एक काम करो
50:47ना ऐसा income tax का ऐसा return भरवाओ।
50:49इतना ये कर दो इतना वो कर दो फलाना कर दो दिखड़ा कर दो ऐसा बिना पूछे सलाह दे देना।
50:54सबका गुरु बात बात में। furniture अच्छा कहाँ से लिए इतने में?
50:59इससे वहाँ अच्छा था वहाँ से लेना
51:01था। ये carpenter अच्छा है वो अच्छा है। इधर से शुरू होता है color में तो।
51:06इधर से शुरू होता है color
51:07में तो ये color ठीक नहीं था उसके बदले
51:09आपको वो color कराना अच्छा होता। एक गुरु बनने की आड़।
51:14कि अपने पास knowledge बहुत है और गुरु बनते हो तो क्या होते हो फस जाते हो।
51:19चेले तो बहुत हैं लेकिन अपने को गुरु नहीं बनना
51:22है। अल्प गुरु बनना है पूछे तो जवाब दो नहीं पूछे तो कोई आगे से जा कर के बोलने की कोई
51:27जरूरत नहीं है। मतलब context कम रखना। और आखिरी में जो last line दिया है।
51:34परिणाम का विचार करना।
51:38तो मैं कुछ भी कर रहा हूँ, जो कुछ भी कर रहा हूँ, मन वचन काया की जो प्रवृत्ति
51:43कर रहा हूँ, परिवार में। इसका after effect क्या आएगा?
51:48इसका result क्या आएगा? मैंने ये किया, अच्छा, उसका result क्या आएगा?
51:53मैंने एक action लिया उसको अच्छा लगा तो result क्या आएगा?
51:56उसको बुरा लगा तो result क्या आएगा? आखिर में क्या बनने का? ऊपर से मालूम पड़ जाता है।
52:02कि मेल बढ़ता है कि मेल टूटता है कि क्या होने वाला है। इसका अंदाजा तो अपने को...
52:09थोड़े बहुत इतने experience वाले हैं, बाल सफेद थोड़े फुकड़ कर किए हैं।
52:14तो सब अंदाजा तो पूरा आ जाता है।
52:16अपने अपने को अगर ऐसे दिन नहीं आए लेकिन लोगों की कहानियों से अपने को मालूम पड़ता है।
52:21दूसरे गिरते हैं तो हम संभल जाते हैं। ऐसे भी knowledge तो मिलता है।
52:26कि आगे वाला speed breaker पे गिरा। तो मालूम पड़ गया अंधेरे में भी।
52:31कि यहाँ आगे जाके खतरा है speed breaker है। ऐसे ही मालूम पड़ जाता है, नहीं मालूम
52:34पड़ता ऐसी कोई बात नहीं है।
52:38परिणाम का विचार करना। कि मेरा
52:41अंतिम result क्या आने वाला है। मैं इतना मेलजोल बढ़ाता हूँ, इतना राग द्वेष करता हूँ।
52:46इतना अपने आप में दुखी होता हूँ। और दूसरों को भी दुख में निमित्त बनता हूँ।
52:51आखिर इसका benefit क्या है? मेरे को मेरी आत्मा को क्या लाभ? ऐसा करके reverse
52:56checking करना। करके reverse checking करना तो reverse checking से बहुत कुछ आपका
53:01line सुधर जाएगा। film को rewind करोगे ना तो
53:04आपकी बहुत सारी गलतियां दिखने में आ जाएगी। खैर अभी इनको
53:08अवलोकन की बात नहीं मालूम। अवलोकन
53:11में होता तो ये सब automatic होता है।
53:13अल्पभाषी, अल्पहासी, अल्पसत्कारी, अल्पभावना बताना,
53:19अल्पगुरु होना, अल्पपरिचय बढ़ाना क्योंकि अवलोकन में ये सब शामिल है।
53:24आप एक अवलोकन करो सब अपने आप automatic... अवलोकन करो सब अपने आप automatic आएगा। इनको
53:28क्या हुआ अवलोकन शुरू करने से
53:30पहले ये बात आ गई बाहर की बात पहले से है। सावधानी की बात ज्यादा है।
53:36अब अवलोकन करेंगे तो वो सावधानी naturally अंदर से आती है।
53:40ये सावधानी बाहर से रखनी पड़ती है।
53:43और वो अवलोकन वाली सावधानी रखनी नहीं पड़ती है
53:47अपने आप हो जाती
53:50है। तो ये 103 number में है
53:52और वो 105 108 के अंदर अवलोकन... आज 108 के अंदर अवलोकन चालू हो गया। मतलब
53:57जो छूटना चाहता है उसको वो
53:59इलाज मिलता है कौन सा
54:01अवलोकन का। जो natural होवे। और इसलिए 108 के अंदर उन्होंने वो बात बताई।
54:07General चारित्र जनून योग के हिसाब से देखा जाए तो कैसे रहना चाहिए परिवार के अंदर।
54:12ताकि कम से कम conflict होवे। कम से कम राग द्वेष होवे।
54:17कम से कम एक दूसरे के दुख सुख में निमित्त बने।
54:20इसके लिए क्या करना है वो general terms में यहाँ पर। के लिए क्या करना है
54:23वो general terms में यहाँ पे बताया है।
54:26इसका summary निकाले तो ये है कि अकेले में जितनी आत्मसाधना अच्छी होती है,
54:32इतनी सबके साथ में सबके साथ उलझते-उलझते
54:36आत्मसाधना अच्छी होती नहीं। ये हर 3 महीने में 4 महीने में trip निकालने का,
54:43customers के साथ और दूसरे
54:46contact को छोड़ना, अपने area के contact को छोड़ना... को छोड़ना। ये क्यों ऐसा?
54:52ये आदत बने हमारी कि बार-बार break होवे, हम चले जावे, सबको छोड़ कर के यहीं।
54:59आखिरी एक दिन तो जाना है, सबको छोड़ कर के हमेशा के लिए।
55:03लेकिन इसकी तैयारी हर 3-3, 4-4 महीने में छोड़-छोड़ के, छोड़-छोड़ के करें।
55:08तो आखिरी में तकलीफ नहीं होगी, हम अपनी बराबर जागृति में जाएंगे।
55:12समाधि मरण जो है, वो समाधि मरण अपने आप आ जाएगा।
55:16क्योंकि हम रहते-रहते भी किसी से जुड़े नहीं थे।
55:19ना business से जुड़े, ना परिवार वालों से जुड़े, ना अड़ोस-पड़ोस से जुड़े,
55:23ना customers से जुड़े। Dealing किया, सब साथ में रहे लेकिन कैसे?
55:31कि काम से काम, बाकी कोई लगाव नहीं। कभी भी छोड़ के जा सकते हैं।
55:37ये एक हमने system, यात्रा की system कहो, निवृत्ति में जाने की system कहो,
55:42कि छोड़ के जाना है, अकेले रहना है।
55:45फिर... फिर सब एक ही
55:47standard वाले एक ही अपेक्षा वाले सब साथ में मिले तो उसको भी क्या कहते हैं?
55:53एकांत कहते हैं। हम अकेले नहीं गए चिंचन। 65 लोग आए सब मिला कर।
56:00और वो दूसरे लोग मिला कर सब मिलाए तो 83 होते हैं।
56:04लेकिन सबका angle एक था आत्मकल्याण के लिए जाना
56:07तो फिर उसको क्या बोलते हैं? एकांत बोलते हैं।
56:10एक अंत। एक अंत माने goal।
56:15एक ही goal वाले भले 100 जना हो 200 जना हो। तो भी उसको एकांत बोलते हैं। और संसार के
56:22angle वाले हो तो भले ही ना कम हो लेकिन उसको
56:26एकांत नहीं बोलते वो नाचना कूदना ज्यादा होता है इसके में।
56:29सम स्वभावियों को मिलना उसे
56:31ज्ञानी पुरुषो एकांत कहते हैं। और थोड़ा साथे जाजो मेला।
56:39ये वधारे दुखदायी थे। रोग कम है। लोग कम हैं
56:43लेकिन हमारा उनके साथ उठना बैठना लगाव इतना ज्यादा है। जैसे
56:48ये 5 लोगों के बीच में नहीं रहते हैं 50 लोगों के बीच में रहते हैं। उलझ जाते हैं।
56:54थोड़ा साथ जाजो भेड़ा। ये वधारे दुखदाई से।
57:02और सम स्वभाव से मिलना एने ज्ञानी पुरुषों एकांत कहते हैं एकांत की ये अर्थ।
57:07के हम अपने परिवार से घर से। परिवार से, घर से, दुकानदारी से छूटे।
57:12एक हफ्ता भर, 10 दिन लेके देखें कैसा लगता है। Difference मालूम पड़ता है।
57:18कि कहाँ आग है और कहाँ शांति है, पानी में। ये सब पता चलता है।
57:23कि पानी की प्यास बढ़ते जाती है और अंदर की साधना भी अपने आप
57:27बढ़ती है। अपना goal के तरफ जाना होता है। यहाँ एक पत्र पूरा होता है।
57:34महेंद्र भाई के बारे में
57:35एक letter और आया था। जन्मदिन के बारे में। जन्मदिन के बारे में
57:39आज पढ़ना ठीक समझता हूँ। श्री सद्गुरु देवाय नमः। Be late happy birthday,